14 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को मिला जीआई टैग, गुजरात के मसाला उत्पादों को वैश्विक ब्रांड पहचान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को मिला जीआई टैग, गुजरात के मसाला उत्पादों को वैश्विक ब्रांड पहचान

सारांश

उत्तर गुजरात के ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को भारत सरकार की जीआई रजिस्ट्री ने आधिकारिक जीआई टैग दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे किसानों को 20–30% अधिक बाज़ार मूल्य मिल सकता है और वैश्विक निर्यात के नए दरवाज़े खुलेंगे।

मुख्य बातें

ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को 13 जुलाई को भारत सरकार की जीआई रजिस्ट्री द्वारा आधिकारिक जीआई टैग प्रदान किया गया।
जीआई-प्रमाणित उत्पाद सामान्य उत्पादों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक बाज़ार मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।
इस उपलब्धि में एपीएमसी ऊंझा , एसडीएयू , ईडीआईआई गुजरात और राज्य के बागायत विभाग ने सामूहिक भूमिका निभाई।
गुजरात के गिर केसर आम , भालिया गेहूं , कच्छी खारेक सहित अब जीआई सूची में और दो नए मसाला उत्पाद जुड़े।
भारत की जीआई रजिस्ट्री में अब 400 से अधिक उत्पाद पंजीकृत हैं।

भारत सरकार की जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) रजिस्ट्री ने उत्तर गुजरात के दो प्रमुख मसाला उत्पादों — ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ — को प्रतिष्ठित जीआई टैग प्रदान किया है, जिससे ये दोनों उत्पाद अब वैश्विक बाज़ार में एक प्रमाणित भौगोलिक ब्रांड के रूप में स्थापित हो सकेंगे। 13 जुलाई को सामने आई इस उपलब्धि के साथ गुजरात के जीआई-पंजीकृत कृषि उत्पादों की सूची और विस्तृत हो गई है।

जीआई टैग क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है

भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत जीआई टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जिनकी विशिष्ट गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषताएं किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र से अटूट रूप से जुड़ी हों। यह टैग उत्पाद की प्रामाणिकता की गारंटी देता है, निर्धारित गुणवत्ता मानकों की रक्षा करता है और नकली उत्पादों की बिक्री पर कानूनी रोक लगाने में सहायक होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जीआई टैग प्राप्त उत्पाद सामान्य उत्पादों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक बाज़ार मूल्य प्राप्त कर सकते हैं, जिससे किसानों की आय में सीधा सुधार होता है।

किसानों और व्यापारियों पर असर

जीआई टैग मिलने के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में ऊंझा जीरे और सौंफ की विश्वसनीयता बढ़ेगी। ऊंझा कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) के चेयरमैन दिनेश पटेल ने कहा, 'ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को मिला जीआई टैग ऊंझा के किसानों और मसाला व्यापार के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। वैश्विक स्तर पर इनकी मांग और स्वीकार्यता बढ़ेगी, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ निर्यात और मूल्य संवर्धन के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।'

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मसाला निर्यात बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। ऊंझा, उत्तर गुजरात का यह छोटा-सा शहर, एशिया के सबसे बड़े जीरा-सौंफ व्यापार केंद्रों में से एक माना जाता है।

किन संस्थाओं ने निभाई भूमिका

इस जीआई टैग को हासिल करने की प्रक्रिया कई संस्थाओं के समन्वित प्रयासों का परिणाम रही। इनमें खेतीवाड़ी उत्पन्न बाजार समिति (एपीएमसी), ऊंझा; गुजरात सरकार का बागायत एवं किसान कल्याण विभाग; सरदार कृषि नगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय (एसडीएयू); और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), गुजरात शामिल हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस उपलब्धि पर कहा, 'यह केवल एक सरकारी प्रमाणन नहीं है, बल्कि हमारे किसानों की अथक मेहनत, गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन, व्यापारियों के विश्वास और ऊंझा की समृद्ध कृषि परंपरा का सम्मान है।' उन्होंने इसे 'गांव से ग्लोबल' के संकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

गुजरात के जीआई उत्पादों की बढ़ती सूची

गौरतलब है कि भारत सरकार की जीआई रजिस्ट्री में अब 400 से अधिक उत्पाद पंजीकृत हैं। गुजरात के गिर केसर आम, भालिया गेहूं, कच्छी खारेक और अमलसाड़ी चीकू पहले से इस सूची में शामिल हैं। ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ के जुड़ने से राज्य के जीआई-प्रमाणित कृषि उत्पादों की श्रृंखला और मज़बूत हुई है। आने वाले समय में इन उत्पादों के निर्यात और मूल्य संवर्धन के नए अवसर खुलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके बाद शुरू होती है — यानी निर्यात संवर्धन, ब्रांडिंग निवेश और किसान-स्तर तक लाभ पहुंचाने की व्यवस्था। गौरतलब है कि कई पहले से जीआई-प्रमाणित भारतीय कृषि उत्पाद वादे के अनुरूप निर्यात वृद्धि हासिल नहीं कर पाए, क्योंकि टैग मिलने के बाद आपूर्ति श्रृंखला और विपणन ढांचे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। ऊंझा के लिए यह अवसर तभी सार्थक होगा जब एपीएमसी और सरकार मिलकर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक सीधी पहुंच और गुणवत्ता-सत्यापन तंत्र सुनिश्चित करें — अन्यथा यह मान्यता महज कागज़ी उपलब्धि बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को जीआई टैग क्यों मिला?
इन दोनों उत्पादों की विशिष्ट गुणवत्ता और विशेषताएं उत्तर गुजरात के ऊंझा क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी हैं, जो जीआई टैग की बुनियादी शर्त है। भारत सरकार की जीआई रजिस्ट्री ने भौगोलिक संकेतक अधिनियम, 1999 के तहत यह मान्यता प्रदान की।
जीआई टैग से ऊंझा के किसानों को क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार जीआई-प्रमाणित उत्पाद सामान्य उत्पादों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक बाज़ार मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ निर्यात और मूल्य संवर्धन के नए अवसर भी खुलेंगे।
जीआई टैग दिलाने में किन संस्थाओं की भूमिका रही?
एपीएमसी ऊंझा, गुजरात सरकार का बागायत एवं किसान कल्याण विभाग, सरदार कृषि नगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय (एसडीएयू) और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई) गुजरात ने मिलकर इस प्रक्रिया को पूरा किया।
गुजरात के और कौन-से उत्पादों को पहले जीआई टैग मिल चुका है?
गुजरात के गिर केसर आम, भालिया गेहूं, कच्छी खारेक और अमलसाड़ी चीकू पहले से भारत की जीआई रजिस्ट्री में पंजीकृत हैं। ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ के जुड़ने से राज्य की यह सूची और मज़बूत हुई है।
भारत में कुल कितने उत्पादों को जीआई टैग मिला है?
भारत सरकार की जीआई रजिस्ट्री में अब तक 400 से अधिक उत्पाद पंजीकृत हैं, जिनमें कृषि, हस्तशिल्प और खाद्य उत्पाद शामिल हैं। ऊंझा जीरा और सौंफ इस सूची में नवीनतम प्रविष्टियाँ हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले