ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को मिला जीआई टैग, गुजरात के मसाला उत्पादों को वैश्विक ब्रांड पहचान
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार की जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) रजिस्ट्री ने उत्तर गुजरात के दो प्रमुख मसाला उत्पादों — ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ — को प्रतिष्ठित जीआई टैग प्रदान किया है, जिससे ये दोनों उत्पाद अब वैश्विक बाज़ार में एक प्रमाणित भौगोलिक ब्रांड के रूप में स्थापित हो सकेंगे। 13 जुलाई को सामने आई इस उपलब्धि के साथ गुजरात के जीआई-पंजीकृत कृषि उत्पादों की सूची और विस्तृत हो गई है।
जीआई टैग क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है
भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत जीआई टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जिनकी विशिष्ट गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषताएं किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र से अटूट रूप से जुड़ी हों। यह टैग उत्पाद की प्रामाणिकता की गारंटी देता है, निर्धारित गुणवत्ता मानकों की रक्षा करता है और नकली उत्पादों की बिक्री पर कानूनी रोक लगाने में सहायक होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जीआई टैग प्राप्त उत्पाद सामान्य उत्पादों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक बाज़ार मूल्य प्राप्त कर सकते हैं, जिससे किसानों की आय में सीधा सुधार होता है।
किसानों और व्यापारियों पर असर
जीआई टैग मिलने के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में ऊंझा जीरे और सौंफ की विश्वसनीयता बढ़ेगी। ऊंझा कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) के चेयरमैन दिनेश पटेल ने कहा, 'ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ को मिला जीआई टैग ऊंझा के किसानों और मसाला व्यापार के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। वैश्विक स्तर पर इनकी मांग और स्वीकार्यता बढ़ेगी, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ निर्यात और मूल्य संवर्धन के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मसाला निर्यात बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। ऊंझा, उत्तर गुजरात का यह छोटा-सा शहर, एशिया के सबसे बड़े जीरा-सौंफ व्यापार केंद्रों में से एक माना जाता है।
किन संस्थाओं ने निभाई भूमिका
इस जीआई टैग को हासिल करने की प्रक्रिया कई संस्थाओं के समन्वित प्रयासों का परिणाम रही। इनमें खेतीवाड़ी उत्पन्न बाजार समिति (एपीएमसी), ऊंझा; गुजरात सरकार का बागायत एवं किसान कल्याण विभाग; सरदार कृषि नगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय (एसडीएयू); और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), गुजरात शामिल हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस उपलब्धि पर कहा, 'यह केवल एक सरकारी प्रमाणन नहीं है, बल्कि हमारे किसानों की अथक मेहनत, गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन, व्यापारियों के विश्वास और ऊंझा की समृद्ध कृषि परंपरा का सम्मान है।' उन्होंने इसे 'गांव से ग्लोबल' के संकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
गुजरात के जीआई उत्पादों की बढ़ती सूची
गौरतलब है कि भारत सरकार की जीआई रजिस्ट्री में अब 400 से अधिक उत्पाद पंजीकृत हैं। गुजरात के गिर केसर आम, भालिया गेहूं, कच्छी खारेक और अमलसाड़ी चीकू पहले से इस सूची में शामिल हैं। ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ के जुड़ने से राज्य के जीआई-प्रमाणित कृषि उत्पादों की श्रृंखला और मज़बूत हुई है। आने वाले समय में इन उत्पादों के निर्यात और मूल्य संवर्धन के नए अवसर खुलने की संभावना है।