मध्य प्रदेश कैबिनेट ने ₹23,300 करोड़ से अधिक के विकास प्रस्ताव मंजूर, वन-संरक्षण और सिंचाई को प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश की मंत्रिपरिषद ने 3 नवंबर 2026 को ₹23,300 करोड़ से अधिक के कई महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्तावों को हरी झंडी दी, जिनका उद्देश्य राज्य में समग्र विकास, पर्यावरण संतुलन और बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करना है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन प्रस्तावों में वन-प्रशासन, सिंचाई, नगरीय अधोसंरचना और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश शामिल है।
वन-प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए सबसे बड़ा आवंटन
स्वीकृत प्रस्तावों में सर्वाधिक ₹10,664 करोड़ 79 लाख रुपए कार्यकारी योजना संगठन एवं वन वृत्तों की स्थापना पर व्यय किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त क्षतिपूर्ति वनीकरण योजना के लिए ₹1,994 करोड़ 30 लाख, राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना के लिए ₹1,623 करोड़ 79 लाख, इमारती लकड़ी उत्पादन के लिए ₹1,107 करोड़ 6 लाख और जू एवं रेस्क्यू सेंटर की स्थापना के लिए ₹604 करोड़ 23 लाख का प्रावधान किया गया है।
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत 9 वन-केंद्रित योजनाओं का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण, वनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण सुनिश्चित करना बताया गया है। इनमें से एक 10 वर्षीय कार्य-योजना तैयार करने की योजना भी है, जो वनों के सतत व वैज्ञानिक प्रबंधन को सुनिश्चित करेगी।
टाइगर रिज़र्व और नए रेस्क्यू सेंटर
राष्ट्रीय उद्यान स्थापना योजना के अंतर्गत प्रदेश के 9 टाइगर रिज़र्व और 10 राष्ट्रीय उद्यानों का संरक्षण व विकास किया जाएगा। संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी सघन गश्त, बाघ मॉनिटरिंग और रेस्क्यू कार्य सुनिश्चित करने की व्यवस्था होगी। जू एवं रेस्क्यू सेंटर योजना के तहत उज्जैन और जबलपुर में नए केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जो बाह्य-स्थलीय संरक्षण का भी काम करेंगे।
गौरतलब है कि क्षतिपूर्ति वनीकरण योजना का उद्देश्य विकास कार्यों के लिए वन-भूमि के उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करना है — यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राज्य में औद्योगिक और अधोसंरचना विस्तार की गति तेज़ हुई है।
सिंचाई परियोजनाओं को ₹4,103 करोड़
मंत्रिपरिषद ने पन्ना, विदिशा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और उज्जैन की सिंचाई परियोजनाओं के वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए ₹4,103 करोड़ 73 लाख की स्वीकृति दी है। ये छह ज़िले राज्य के कृषि-प्रधान क्षेत्रों में आते हैं और दीर्घकालिक जल-सुरक्षा के लिए यह आवंटन नीतिगत रूप से उल्लेखनीय माना जा रहा है।
नगरीय अधोसंरचना और स्वास्थ्य निवेश
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2029 तक जारी रखने के लिए अतिरिक्त ₹700 करोड़ की मंज़ूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में पेयजल, सफ़ाई, स्ट्रीट लाइट, आपदा प्रबंधन, मार्गों, नालियों, श्मशान घाट, सामुदायिक भवनों का निर्माण तथा आमोद-प्रमोद एवं क्रीडा स्थलों का विकास, रैन बसेरों का निर्माण जैसे कार्य नगरीय निकायों द्वारा संपादित किए जाते हैं।
यह भी निर्णय लिया गया है कि यदि आगामी वर्ष में मुख्यमंत्री कार्यालय से इस सीमा से अधिक किंतु ₹500 करोड़ तक के प्रस्ताव प्राप्त होते हैं, तो आवश्यकतानुसार उनकी प्रशासकीय स्वीकृति दी जाएगी और भविष्य में अतिरिक्त राशि की माँग वित्त विभाग से पृथक की जाएगी। इसके साथ ही लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत 'उद्योग निवेश संवर्धन सहायता योजना' को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक संचालन के लिए ₹610 करोड़ 51 लाख की स्वीकृति दी गई है, जो चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए है।
आगे क्या
इन योजनाओं का क्रियान्वयन अब संबंधित विभागों की ज़िम्मेदारी होगी। वन-प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं के लिए 10 वर्षीय कार्य आयोजना तैयार की जाएगी, जबकि सिंचाई परियोजनाओं का संचालन 2031 तक जारी रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार इन निवेशों का वास्तविक प्रभाव क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता पर निर्भर करेगा।