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गुजरात निर्यात संवर्धन परिषद (GEPC) को मंजूरी, MSME और स्टार्टअप को मिलेगा वैश्विक बाज़ार तक सीधा रास्ता

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गुजरात निर्यात संवर्धन परिषद (GEPC) को मंजूरी, MSME और स्टार्टअप को मिलेगा वैश्विक बाज़ार तक सीधा रास्ता

सारांश

गुजरात सरकार ने MSME और स्टार्टअप को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने के लिए GEPC को मंजूरी दी — यह उद्योग एवं खान विभाग के अधीन SPV के रूप में गांधीनगर से काम करेगी। GRIT की मई 2025 की सिफारिश और टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद 3 नवंबर को यह प्रस्ताव जारी हुआ।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने 3 नवंबर 2026 को गुजरात निर्यात संवर्धन परिषद (GEPC) की स्थापना को मंजूरी दी।
GEPC कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत राज्य स्वामित्व की गैर-लाभकारी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी होगी; प्रारंभिक पूंजी ₹1 लाख ।
उद्योग आयुक्त प्रबंध निदेशक; मुख्य सचिव अध्यक्ष; निदेशक मंडल में 3 से 15 सदस्य।
प्रत्येक जिले के लिए अलग जिला निर्यात संवर्धन योजना (DEPC) तैयार की जाएगी।
GRIT की मई 2025 की रिपोर्ट और विनिर्माण टास्क फोर्स की सिफारिश के बाद यह कदम उठाया गया।
AI, ब्लॉकचेन, डिजिटल ट्रेड प्लेटफॉर्म, इन्क्यूबेशन सेंटर और बौद्धिक संपदा सहायता भी GEPC के कार्यक्षेत्र में शामिल।

गुजरात सरकार ने 3 नवंबर 2026 को जारी सरकारी प्रस्ताव के तहत गुजरात निर्यात संवर्धन परिषद (GEPC) की स्थापना को औपचारिक मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और स्टार्टअप को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ना और निर्यात क्षमता का विस्तार करना है। यह परिषद उद्योग एवं खान विभाग के अधीन विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के रूप में गांधीनगर से संचालित होगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब गुजरात अपनी वैश्विक विनिर्माण हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में ठोस नीतिगत ढाँचा खड़ा कर रहा है।

GEPC की संरचना और कानूनी दर्जा

सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, GEPC को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत पूर्णतः राज्य स्वामित्व वाली गैर-लाभकारी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत किया जाएगा। इसकी प्रारंभिक अधिकृत एवं चुकता पूंजी ₹1 लाख निर्धारित की गई है और पूरी शेयर पूंजी राज्यपाल के नाम पर राज्य सरकार के अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से रखी जाएगी।

परिषद के निदेशक मंडल में न्यूनतम 3 और अधिकतम 15 सदस्य होंगे। मुख्य सचिव अध्यक्ष के रूप में, उद्योग एवं खान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव उपाध्यक्ष के रूप में, तथा उद्योग आयुक्त प्रबंध निदेशक की भूमिका निभाएंगे। बंदरगाह एवं परिवहन विभाग, MSME आयुक्तालय, गुजरात औद्योगिक विकास निगम (GIDC), INDEXTB, गुजरात इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड और वित्त विभाग के प्रतिनिधि भी बोर्ड में सम्मिलित होंगे।

GEPC किन समस्याओं को हल करेगी

गौरतलब है कि गुजरात स्टेट इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (GRIT) ने मई 2025 में तैयार अपनी रिपोर्ट में निर्यात संवर्धन के लिए एक अलग संस्थागत व्यवस्था बनाने की सिफारिश की थी। इसके बाद विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता पर गठित टास्क फोर्स ने निर्यात विकास को औद्योगिक वृद्धि के तीन प्रमुख स्तंभों में से एक बताया था।

परिषद का प्राथमिक ध्यान उन बाधाओं को दूर करने पर होगा जो छोटे उद्यमों को वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचने से रोकती हैं — जैसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की माँग की सीमित जानकारी, निर्यात प्रक्रियाओं की जटिलता, अनिवार्य प्रमाणपत्रों और नियमों से अपरिचितता।

सेवाएँ और सुविधाएँ

GEPC उद्यमियों को विदेशी बाज़ारों की पहचान, बाज़ार-प्रवेश रणनीति, कारोबारी परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगी। डिजिटल ट्रेड प्लेटफॉर्म, निर्यातक पोर्टल, साझा सुविधा केंद्र, इन्क्यूबेशन सेंटर, परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाएँ और लॉजिस्टिक्स सहायता प्रणाली विकसित करने की भी योजना है।

निर्यातकों को उत्पाद-गुणवत्ता जाँच, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन, व्यापार वित्त, बीमा, शिपमेंट-पूर्व एवं शिपमेंट-पश्चात वित्तीय सहायता और आपूर्ति-श्रृंखला प्रबंधन में सहयोग दिया जाएगा। AI, ब्लॉकचेन, डिजिटलीकरण और इंडस्ट्री 4.0 जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ हरित प्रौद्योगिकियों और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों के माध्यम से टिकाऊ निर्यात को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

जिला स्तरीय निर्यात योजनाएँ

परिषद का एक महत्त्वपूर्ण कार्य प्रत्येक जिले के लिए अलग जिला निर्यात संवर्धन योजना (DEPC) तैयार करना होगा। ये योजनाएँ जिले की उत्पादन क्षमता, औद्योगिक विशेषताओं, बाज़ार की माँग और निर्यात संभावनाओं के आवधिक आकलन के बाद अद्यतन की जाएंगी। क्षेत्रीय और सेक्टर आधारित संस्थाओं के साथ समन्वय कर DEPC स्थानीय स्तर पर निर्यात गतिविधियों की निगरानी करेंगी।

आयात विकल्प और बौद्धिक संपदा सहायता

निर्यात संवर्धन के अतिरिक्त GEPC आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में भी काम करेगी। इसके लिए आयात-निर्भर क्षेत्रों की पहचान की जाएगी और घरेलू विकल्प विकसित करने वाले निर्माताओं को तकनीकी, वित्तीय और परामर्श सहायता प्रदान की जाएगी। विदेशी बाज़ारों में पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट सहित बौद्धिक संपदा अधिकार प्राप्त करने के इच्छुक निर्यातकों को भी परिषद विधिक और प्रक्रियागत सहायता देगी। अंतरराष्ट्रीय व्यापार विवादों, कानूनी मामलों और गैर-टैरिफ बाधाओं से निपटने में भी उद्यमियों को सहयोग मिलेगा।

गुजरात में निर्मित उत्पादों को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और मार्केटिंग अभियान भी चलाए जाएंगे। आने वाले महीनों में परिषद की संरचनात्मक स्थापना और परिचालन की दिशा में राज्य सरकार की ओर से अगले कदम अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — गुजरात में पहले भी ऐसी नोडल एजेंसियाँ बनी हैं जो समय के साथ ब्यूरोक्रेटिक जड़ता की शिकार हो गईं। महत्त्वपूर्ण यह है कि परिषद की सफलता का माप सिर्फ पंजीकृत निर्यातकों की संख्या नहीं, बल्कि वास्तविक निर्यात वृद्धि के सत्यापन योग्य आँकड़े होने चाहिए। जिला निर्यात योजनाओं की अवधारणा नई नहीं है — देश के कई राज्यों ने इसे आज़माया है, पर जमीनी समन्वय और बजटीय प्रतिबद्धता के अभाव में ये कागज़ी दस्तावेज़ बन कर रह गईं। ₹1 लाख की प्रारंभिक पूंजी यह भी संकेत देती है कि GEPC की वास्तविक वित्तीय ताकत बाद की सरकारी ग्रांट और संस्थागत ऋण पर निर्भर करेगी — जिसका खुलासा आने वाले बजट चक्र में ही होगा।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात निर्यात संवर्धन परिषद (GEPC) क्या है?
GEPC गुजरात सरकार द्वारा 3 नवंबर 2026 को स्वीकृत एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है, जो कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत गैर-लाभकारी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में काम करेगी। इसका उद्देश्य राज्य के MSME, स्टार्टअप और उद्योगों को निर्यात सलाह, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पहुँच उपलब्ध कराना है।
GEPC के गठन की ज़रूरत क्यों पड़ी?
गुजरात स्टेट इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (GRIT) ने मई 2025 में निर्यात संवर्धन के लिए एक अलग संस्थागत व्यवस्था की सिफारिश की थी। इसके बाद विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता टास्क फोर्स ने निर्यात विकास को औद्योगिक वृद्धि के तीन प्रमुख स्तंभों में से एक बताया, जिसके आधार पर सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।
GEPC में कौन-कौन से विभाग शामिल होंगे?
GEPC के निदेशक मंडल में उद्योग एवं खान विभाग, बंदरगाह एवं परिवहन विभाग, MSME आयुक्तालय, GIDC, INDEXTB, गुजरात इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड और वित्त विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्य सचिव अध्यक्ष और उद्योग आयुक्त प्रबंध निदेशक की भूमिका निभाएंगे।
जिला निर्यात संवर्धन योजना (DEPC) कैसे काम करेगी?
GEPC प्रत्येक जिले के लिए अलग निर्यात संवर्धन योजना तैयार करेगी, जो जिले की उत्पादन क्षमता, औद्योगिक विशेषताओं और बाज़ार की माँग के आकलन पर आधारित होगी। ये योजनाएँ समय-समय पर अद्यतन की जाएंगी और क्षेत्रीय संस्थाओं के साथ समन्वय कर जिला स्तर पर निर्यात गतिविधियों की निगरानी करेंगी।
GEPC MSME और स्टार्टअप को कौन-सी सुविधाएँ देगी?
परिषद निर्यातकों को डिजिटल ट्रेड प्लेटफॉर्म, इन्क्यूबेशन सेंटर, परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाएँ, लॉजिस्टिक्स सहायता, व्यापार वित्त, बीमा, बौद्धिक संपदा सहायता और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग में मदद करेगी। इसके साथ ही AI, ब्लॉकचेन और इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
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