गुजरात में तालुका प्लानिंग सुधार: दो समितियाँ मिलकर बनी 18 सदस्यीय UTPC, ग्रामीण विकास को मिलेगी रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 1 अगस्त 2026 को तालुका स्तर पर प्रशासनिक ढाँचे में बड़ा बदलाव करते हुए दो अलग-अलग विकेंद्रीकृत योजना समितियों को मिलाकर 'एकीकृत तालुका योजना समिति' (Unified Taluka Planning Committee — UTPC) का गठन किया है। 18 सदस्यों वाली इस नई समिति का मकसद प्रशासनिक देरी घटाना, जिम्मेदारियों के दोहराव को समाप्त करना और गुजरात के ग्रामीण इलाकों में कल्याणकारी योजनाओं व इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को तेज़ी से ज़मीन पर उतारना है।
सुधार की पृष्ठभूमि
यह निर्णय गुजरात प्रशासनिक सुधार आयोग (GARC) की अगस्त 2025 में सौंपी गई चौथी रिपोर्ट की सिफारिशों पर आधारित है। आयोग ने पाया कि तालुका स्तर पर तीन समानांतर संरचनाएँ — तालुका योजना समिति, 'आपणो तालुको-वाइब्रेंट तालुको' (ATVT) कार्यकारी योजना समिति और तालुका पंचायत योजना समिति — एक साथ काम कर रही थीं।
इन समितियों की जिम्मेदारियाँ अक्सर एक-दूसरे से टकराती थीं। कई बार एक ही सदस्य एकाधिक समितियों में शामिल होकर बार-बार एक ही विषय पर चर्चा करते थे, जिससे निर्णय प्रक्रिया लंबी खिंचती थी और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब होता था।
नई समिति की संरचना
नई UTPC में तालुका पंचायत के अध्यक्ष चेयरपर्सन होंगे। सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) सह-अध्यक्ष और तालुका विकास अधिकारी (TDO) सदस्य सचिव की भूमिका निभाएँगे।
समिति में संबंधित क्षेत्र के सांसद, विधायक, जिला पंचायत सदस्य और सामाजिक न्याय समिति के अध्यक्ष भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, सड़क एवं भवन, तथा कृषि विभागों के अधिकारी भी इसके सदस्य होंगे।
UTPC की जिम्मेदारियाँ
नई समिति स्थानीय विकास प्राथमिकताओं की पहचान करने, विकेंद्रीकृत जिला योजना कार्यक्रम के अंतर्गत एकीकृत योजनाएँ तैयार करने और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करने के लिए जिम्मेदार होगी।
अधिकारियों के अनुसार, इस एकीकृत ढाँचे से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पेयजल, सड़क, कृषि, सिंचाई और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में योजना निर्माण की प्रक्रिया मज़बूत होगी, क्योंकि विकास योजनाओं को स्थानीय ज़रूरतों के साथ बेहतर ढंग से जोड़ा जा सकेगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर ज़ोर
राज्य सरकार ने कहा है कि UTPC से विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही मज़बूत होने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में कल्याणकारी योजनाओं की 'लास्ट-माइल डिलीवरी' को प्राथमिकता दे रही है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह सुधार GARC की एक वर्ष पुरानी सिफारिश के आधार पर लागू किया गया है, जो यह दर्शाता है कि राज्य प्रशासन ने समीक्षा प्रक्रिया को गंभीरता से लिया। नई समिति के गठन के साथ अब यह देखना होगा कि तालुका स्तर पर फैसले लेने की गति वास्तव में कितनी तेज़ होती है और क्या यह एकीकरण ज़मीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दे पाता है।