सूरत इकोनॉमिक रीजन 2047 तक गुजरात की GSDP में 35% से अधिक योगदान देगा: सीएम भूपेंद्र पटेल

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सूरत इकोनॉमिक रीजन 2047 तक गुजरात की GSDP में 35% से अधिक योगदान देगा: सीएम भूपेंद्र पटेल

सारांश

सूरत सिर्फ हीरों और कपड़ों का शहर नहीं रहेगा — मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने VGRC में ऐलान किया कि 2047 तक यह क्षेत्र गुजरात की GSDP में 35% से अधिक योगदान देगा। नीति आयोग-स्वीकृत मास्टर प्लान, 8 नए स्मार्ट GIDC और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के साथ दक्षिण गुजरात को देश का नया औद्योगिक केंद्र बनाने की तैयारी है।

Key Takeaways

सूरत इकोनॉमिक रीजन के 2047 तक गुजरात की GSDP में 35% से अधिक योगदान का अनुमान; नीति आयोग ने ग्रोथ हब मास्टर प्लान स्वीकृत किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 5,380 एकड़ में 8 नए स्मार्ट GIDC औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की घोषणा की। गुजरात की जीडीपी ₹1.29 लाख करोड़ (2003) से बढ़कर ₹21.90 लाख करोड़ (2022-23) हुई; 2025 तक ₹27.4 लाख करोड़ का अनुमान। राज्य देश के कुल कार्गो का 40% , औद्योगिक उत्पादन का 18% और नवीकरणीय ऊर्जा का 15% हिस्सा अकेले संभालता है। 20 प्राथमिकता क्षेत्रों के साथ 6 रीजनल इकोनॉमिक मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं; सेमीकंडक्टर, EV, ग्रीन हाइड्रोजन और AI पर विशेष फोकस।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 1 मई 2025 को सूरत में तीसरी वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) का शुभारंभ करते हुए घोषणा की कि सूरत इकोनॉमिक रीजन वर्ष 2047 तक बीस गुना वृद्धि के साथ गुजरात की GSDP में 35 फीसदी से अधिक का योगदान देगा। उन्होंने बताया कि नीति आयोग के मार्गदर्शन में सूरत को ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने का मास्टर प्लान स्वीकृत हो चुका है।

वीजीआरसी का उद्देश्य और दायरा

मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से गुजरात ने VGRC का अभिनव दृष्टिकोण अपनाया है, ताकि राज्य का कोई भी क्षेत्र विकास की दौड़ में पीछे न रहे और जिलों की क्षमताओं को वैश्विक मंच मिल सके। इससे पूर्व उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में दो VGRC सफलतापूर्वक आयोजित हो चुकी हैं।

दक्षिण गुजरात क्षेत्र की इस कॉन्फ्रेंस में सूरत के साथ-साथ तापी, नवसारी, वलसाड, डांग और भरूच जिलों की औद्योगिक संभावनाओं को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। यह आयोजन गुजरात स्थापना दिवस के अवसर पर शुरू हुआ, जिसे मुख्यमंत्री ने 2001 के बाद राज्य में हुए आमूल बदलाव का प्रतीक बताया।

सूरत की औद्योगिक संभावनाएँ

मुख्यमंत्री ने सूरत इकोनॉमिक रीजन में केमिकल एवं फार्मा, टेक्सटाइल एवं अपैरल, जेम्स एवं ज्वेलरी, कृषि, रियल एस्टेट और पर्यटन क्षेत्रों की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, रेलवे कॉरिडोर, राष्ट्रीय राजमार्ग, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, पोर्ट, एयरपोर्ट, बुलेट ट्रेन, मेट्रो रेल और आउटर रिंग रोड से जुड़कर मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट वाला भारत का वेल-कनेक्टेड शहर बन रहा है।

गुजरात के विकास के आंकड़े

मुख्यमंत्री पटेल ने बताया कि आज गुजरात अकेला देश के कुल कार्गो का 40 फीसदी हैंडल करता है। राज्य की औद्योगिक उत्पादन में 18 फीसदी और नवीकरणीय ऊर्जा में 15 फीसदी की राष्ट्रीय हिस्सेदारी है। राज्य सरकार का अपना कर राजस्व ₹9,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.55 लाख करोड़ हो गया है। गौरतलब है कि साणंद और धोलेरा अब सेमीकंडक्टर हब बन चुके हैं और दो सेमीकंडक्टर प्लांट कार्यरत हो गए हैं।

उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने वाइब्रेंट गुजरात की दो दशकों की सफलता के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2003 में गुजरात की जीडीपी ₹1.29 लाख करोड़ थी, जो 2012-13 में ₹7.20 लाख करोड़ और 2022-23 में ₹21.90 लाख करोड़ तक पहुँच गई। 2025 के अंत तक यह ₹27.4 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। गुजरात आज देश की कुल जीडीपी में 8.2 फीसदी योगदान के साथ देश का ग्रोथ इंजन बन गया है।

नए स्मार्ट जीआईडीसी और रीजनल मास्टर प्लान

मुख्यमंत्री ने दक्षिण गुजरात क्षेत्र में कुल 5,380 एकड़ में 8 नए स्मार्ट जीआईडीसी (GIDC) औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की घोषणा की — सूरत में 2, भरूच में 3, वलसाड में 1, तापी में 1 और नवसारी में 1। उन्होंने यह भी बताया कि विकसित गुजरात 2047 रोडमैप के तहत करीब 20 प्राथमिकता क्षेत्रों के साथ छह रीजनल इकोनॉमिक मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।

भविष्य की दिशा

मुख्यमंत्री पटेल ने सेमीकंडक्टर, ईवी, ग्रीन हाइड्रोजन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे भविष्योन्मुखी उद्योगों के जरिए निवेश और रोजगार दोनों बढ़ाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने उद्योग-व्यापार जगत के प्रतिनिधियों से विकसित भारत 2047 के लिए विकसित गुजरात बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य पहले से ही देश का सर्वाधिक रोजगार देने वाला राज्य घोषित हो चुका है।

Point of View

लेकिन इसे परखने के लिए जमीनी सवाल ज़रूरी हैं। गुजरात का औद्योगिक रिकॉर्ड निर्विवाद रूप से मजबूत है — कर राजस्व का ₹9,000 करोड़ से ₹1.55 लाख करोड़ तक पहुँचना इसका प्रमाण है — लेकिन GIDC घोषणाएँ और रीजनल मास्टर प्लान अक्सर क्रियान्वयन की धीमी गति से पीछे छूट जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब डांग और तापी जैसे आदिवासी बहुल जिले अभी भी बुनियादी ढाँचे की कमी से जूझ रहे हैं, और 'समावेशी विकास' का नारा तब तक अधूरा है जब तक इन क्षेत्रों में मापनीय रोजगार परिणाम सामने न आएँ।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

सूरत इकोनॉमिक रीजन 2047 तक गुजरात की GSDP में कितना योगदान देगा?
अनुमान के अनुसार सूरत इकोनॉमिक रीजन 2047 तक बीस गुना वृद्धि के साथ गुजरात की GSDP में 35 फीसदी से अधिक योगदान देगा। नीति आयोग के मार्गदर्शन में इसके लिए ग्रोथ हब मास्टर प्लान स्वीकृत हो चुका है।
वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) क्या है और यह कहाँ हुई?
VGRC वाइब्रेंट गुजरात समिट का क्षेत्रीय विस्तार है, जिसका उद्देश्य राज्य के हर क्षेत्र को वैश्विक निवेश मंच देना है। 1 मई 2025 को सूरत में तीसरी VGRC का आयोजन हुआ, जो दक्षिण गुजरात क्षेत्र के लिए थी।
दक्षिण गुजरात में कितने नए स्मार्ट GIDC की घोषणा हुई?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कुल 5,380 एकड़ में 8 नए स्मार्ट GIDC औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की घोषणा की — सूरत में 2, भरूच में 3, वलसाड में 1, तापी में 1 और नवसारी में 1।
गुजरात की GDP अभी कितनी है और 2025 तक क्या लक्ष्य है?
2022-23 में गुजरात की GDP ₹21.90 लाख करोड़ थी और 2025 के अंत तक ₹27.4 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। राज्य देश की कुल GDP में 8.2 फीसदी योगदान देता है।
गुजरात 2047 रोडमैप में कौन-से प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं?
विकसित गुजरात 2047 रोडमैप में सेमीकंडक्टर, ईवी, ग्रीन हाइड्रोजन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे भविष्योन्मुखी उद्योग शामिल हैं। करीब 20 प्राथमिकता क्षेत्रों के साथ 6 रीजनल इकोनॉमिक मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।
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