प्रियंका गांधी की 'गोमूत्र विशेषज्ञ' टिप्पणी पर बवाल: भाजपा और शिक्षाविदों का कड़ा विरोध
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा लोकसभा में 31 जुलाई को पेपर लीक रोकने और शिक्षा सुधार विधेयक पर चर्चा के दौरान आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी को 'गोमूत्र विशेषज्ञ' कहे जाने पर राजनीतिक और शैक्षणिक जगत में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने इस बयान को 'शर्मनाक' और 'अपमानजनक' करार दिया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
संसद में शिक्षा सुधार विधेयक पर बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गठित छह सदस्यीय शिक्षा सुधार टास्क फोर्स में प्रो. कामाकोटी को इसलिए शामिल किया गया क्योंकि वे 'गोमूत्र विशेषज्ञ' हैं। यह बयान तत्काल विवाद का केंद्र बन गया। गौरतलब है कि प्रो. कामाकोटी एक著名 कंप्यूटर विज्ञान विशेषज्ञ हैं, जिन्हें केंद्र सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया है और जिनके नाम 150 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हैं।
भाजपा की प्रतिक्रिया
तेलंगाना भाजपा सचिव बंदारू विजया लक्ष्मी ने इस टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कहा, 'जाने-माने वैज्ञानिक कामाकोटी पर प्रियंका गांधी की टिप्पणी बहुत शर्मनाक है। जरा देखिए कि कौन किस पर टिप्पणी कर रहा है। वह परिवार-आधारित राजनीति से आई हैं और मेरा पक्का मानना है कि उन्हें भारत की जड़ों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।'
मुंबई में शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने भी इस बयान की निंदा की। उन्होंने कहा, 'प्रियंका वाड्रा ने आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामाकोटी के बारे में बहुत आपत्तिजनक टिप्पणी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाने के लिए बनाई गई छह सदस्यीय टास्क फोर्स में प्रो. कामाकोटी को सदस्य नियुक्त किया था। उनका यह बयान बेहद शर्मनाक है।'
शिक्षा जगत का विरोध
जूनागढ़ एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के कुलपति वी.पी. चोवटिया ने प्रो. कामाकोटी की उपलब्धियाँ गिनाते हुए कहा, 'वे आईआईटी मद्रास के जाने-माने डायरेक्टर हैं। उन्होंने 150 से ज़्यादा शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, छात्रों के लिए कई सुधार किए हैं और 50 से अधिक व्यावसायिक सुधारों से जुड़े रहे हैं। केंद्र सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया है।'
उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर के कुलपति प्रो. चंडी प्रसाद नंदा ने इतिहासकार की दृष्टि से इस विवाद को देखते हुए कहा, 'यह सवाल उठता है कि क्या यह वैज्ञानिक, तर्कसंगत या सही है कि उन्हें 'गोमूत्र विशेषज्ञ' कहा जाए।' उनका यह कथन इस बात की ओर संकेत करता है कि शिक्षा जगत में भी इस टिप्पणी को अनुचित माना जा रहा है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद में शिक्षा सुधार और पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बहस चल रही है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियाँ मूल मुद्दे — शिक्षा व्यवस्था में सुधार — से ध्यान भटकाती हैं। यह पहली बार नहीं है जब संसद में किसी विशेषज्ञ की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक विवाद उठा हो।
आगे क्या
कांग्रेस की ओर से अभी तक इस टिप्पणी पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद शिक्षा सुधार विधेयक पर संसदीय बहस को प्रभावित कर सकता है। प्रो. कामाकोटी की ओर से भी अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।