कोलकाता में फर्जी PM वाई-फाई योजना का भंडाफोड़: छह गिरफ्तार, करोड़ों की ठगी का शक
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस ने 5 नवंबर 2026 को मध्य कोलकाता के डलहौजी इलाके स्थित गवर्नमेंट प्लेस (ईस्ट) में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर छह लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें पाँच महिलाएँ शामिल हैं। जाँचकर्ताओं के अनुसार, यह गिरोह कथित 'प्रधानमंत्री वाई-फाई योजना' के नाम पर लोगों को आजीवन इंटरनेट सेवा का झाँसा देकर देशभर में ठगी कर रहा था। प्रारंभिक जाँच में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की आशंका जताई जा रही है।
कैसे हुआ ऑपरेशन
एक गोपनीय सूत्र की सूचना पर कार्रवाई करते हुए कोलकाता पुलिस के जासूसों ने बुधवार को डलहौजी स्थित कॉल सेंटर पर छापा मारा। गिरफ्तार किए गए लोगों में कॉल सेंटर के मैनेजर कृष्णेंदु साहा भी शामिल हैं। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, एक बड़ा ग्राहक डेटाबेस और एक लिखित स्क्रिप्ट बरामद की, जिसका उपयोग कथित तौर पर टेलीकॉलर संभावित पीड़ितों को फँसाने के लिए करते थे।
ठगी का तरीका
पुलिस अधिकारी के अनुसार, आरोपी खुद को सरकारी प्रतिनिधि बताकर फोन पर लोगों से संपर्क करते थे। वे दावा करते थे कि केंद्र सरकार ने एक नई 'प्रधानमंत्री वाई-फाई योजना' शुरू की है, जिसके तहत एकमुश्त छोटी राशि जमा करने पर व्यक्ति जीवनभर देशभर में कहीं भी वाई-फाई सेवा का लाभ उठा सकता है। इस आकर्षक ऑफर ने बड़ी संख्या में लोगों को भुगतान के लिए राजी कर लिया।
प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि कथित पीड़ित देश के विभिन्न हिस्सों से हैं, जिनमें कोलकाता के लोगों की संख्या सर्वाधिक बताई जा रही है। गौरतलब है कि इस तरह की फर्जी सरकारी योजनाओं की आड़ में साइबर ठगी के मामले पिछले कुछ वर्षों में पूरे देश में तेज़ी से बढ़े हैं।
जाँच का दायरा
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गिरोह किस नेटवर्क के तहत काम करता था, कितने लोगों को ठगा गया और इस धंधे से जुड़े अन्य सदस्य या संगठन कौन हैं। जाँचकर्ता जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और ग्राहक रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जाँच भी कर रहे हैं, जिससे पीड़ितों की पहचान और ठगी की सटीक रकम का पता लगाया जा सके।
आम नागरिकों पर असर
यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि सरकारी योजनाओं के नाम पर साइबर ठगी किस तरह आम लोगों को निशाना बनाती है, विशेषकर उन्हें जो डिजिटल साक्षरता में कम दक्ष हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी सरकारी योजना की जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइट या हेल्पलाइन पर भरोसा किया जाए। पुलिस ने पीड़ितों से आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
आगे क्या होगा
आरोपियों पर धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। जाँच जारी रहने के साथ पुलिस गिरोह के और सदस्यों की तलाश कर रही है। ठगी के पूरे नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन का पता लगाने में अभी समय लग सकता है।