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दिल्ली पुलिस ने रंजीत नगर में दो फर्जी जॉब कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, 11 गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने रंजीत नगर में दो फर्जी जॉब कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, 11 गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली पुलिस ने रंजीत नगर की लाल रतन बिल्डिंग से चल रहे दो फर्जी जॉब प्लेसमेंट कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया। ये ऑपरेटर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से डेटा चुराकर बेरोज़गारों को नौकरी का झाँसा देते थे और ₹1,200 से ₹3,500 तक की फीस वसूलकर गायब हो जाते थे। 11 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश जारी।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने रंजीत नगर स्थित लाल रतन बिल्डिंग में दो फर्जी जॉब प्लेसमेंट कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया।
कुल 11 आरोपी गिरफ्तार — पहले सेंटर से 6 (अर्पित, सकीना, करिश्मा, मीनाक्षी, चंचल, अशोक) और दूसरे से 5 (आसिम, संदीप, गौरव मलिक, ज्ञान सिंह, रोहित)।
जब्त सामग्री में 13 कंप्यूटर सिस्टम , 5 मोबाइल फोन , कॉलिंग सॉफ्टवेयर और पीड़ितों का डेटा शामिल।
आरोपी ऑनलाइन जॉब पोर्टल से डेटा चुराकर उम्मीदवारों से ₹3,500 , ₹1,400 और ₹1,200 की फर्जी रजिस्ट्रेशन फीस वसूलते थे।
मास्टरमाइंड की पहचान और धन-लेनदेन की जाँच के लिए आगे की कार्रवाई जारी है।

नई दिल्ली में दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ, साइबर पुलिस स्टेशन और रंजीत नगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोज़गारों से ठगी करने वाले दो फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया और 11 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने दोनों ठिकानों से 13 कंप्यूटर सिस्टम, 5 मोबाइल फोन, कॉलिंग सॉफ्टवेयर, नौकरी चाहने वालों का डेटा और डिजिटल एवं वित्तीय साक्ष्य बरामद किए हैं।

कैसे मिली सूचना और कैसे हुई कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर को रंजीत नगर स्थित शादीपुर मेट्रो स्टेशन के निकट लाल रतन बिल्डिंग से संचालित दो संदिग्ध नकली जॉब-प्लेसमेंट कॉल सेंटरों की सूचना मिली। इस पर त्वरित कार्रवाई के लिए दो अलग-अलग पुलिस टीमें गठित की गईं।

पहली टीम में रंजीत नगर पुलिस स्टेशन और स्पेशल स्टाफ के अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने तकनीकी विश्लेषण और फील्ड वेरिफिकेशन के ज़रिए पुष्टि की कि संदिग्ध जॉब-प्लेसमेंट गतिविधि से जुड़ी बड़ी संख्या में कॉलें उसी इमारत से की जा रही थीं। इसके बाद छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

ठगी का तरीका और मॉडस ऑपरेंडी

जाँच में सामने आया कि दोनों कॉल सेंटरों के संचालन का तरीका एकसमान था। ऑनलाइन जॉब-सर्च और रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म से नौकरी चाहने वालों का डेटा और संपर्क विवरण हासिल कर टारगेटेड कॉलिंग की जाती थी। ऑपरेटर रिक्रूटर बनकर आकर्षक नौकरियों का लालच देते थे।

भरोसा जीतने के बाद उम्मीदवारों से अलग-अलग पैकेज के तहत ₹3,500, ₹1,400 और ₹1,200 तक की रजिस्ट्रेशन एवं प्रोसेसिंग फीस वसूली जाती थी। पैसे मिलने के बाद कथित तौर पर कुछ दिनों तक नौकरी मिलने का भरोसा दिलाकर संपर्क बनाए रखा जाता था और अंततः वादा की गई नौकरी दिए बिना ही संपर्क तोड़ लिया जाता था।

छापे में क्या मिला और किसे पकड़ा गया

पहले कॉल सेंटर पर छापे के दौरान चार महिलाएं और दो पुरुष काम करते मिले। पुलिस द्वारा कॉर्पोरेट ऑथराइजेशन लेटर, प्लेसमेंट एग्रीमेंट या वास्तविक उम्मीदवारों के रिकॉर्ड माँगे जाने पर कर्मचारी कोई वैध दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर सके। पहले कॉल सेंटर से गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अर्पित, सकीना, करिश्मा, मीनाक्षी, चंचल और अशोक शामिल हैं।

दूसरे कॉल सेंटर पर स्पेशल स्टाफ और साइबर पुलिस स्टेशन की संयुक्त टीम ने छापा मारा, जहाँ पाँच पुरुष कर्मचारी कॉलिंग क्यूबिकल्स में काम करते पाए गए। इस स्थान से आसिम, संदीप, गौरव मलिक, ज्ञान सिंह और रोहित को गिरफ्तार किया गया।

आगे की जाँच

पुलिस के अनुसार, दोनों फर्जी कॉल सेंटरों के मास्टरमाइंड की पहचान और गिरफ्तारी, नौकरी चाहने वालों के डेटा के स्रोत का पता लगाने, धन-लेनदेन की जाँच, जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के फॉरेंसिक विश्लेषण और इस फर्जी ऑपरेशन से जुड़े अन्य संदिग्धों की शिनाख्त के लिए आगे की जाँच जारी है।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब डिजिटल माध्यमों से जॉब फ्रॉड के मामले देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि रोज़गार के अवसर तलाश रहे युवाओं को निशाना बनाने वाले ऐसे फर्जी ऑपरेशन साइबर अपराध की सबसे तेज़ी से उभरती श्रेणियों में से एक बन चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे ऑपरेशन बार-बार उभरते रहेंगे। ₹1,200 जैसी मामूली रकम की ठगी इसलिए कारगर है क्योंकि पीड़ित अक्सर शिकायत दर्ज कराने की ज़हमत नहीं उठाते — जिससे असली पैमाना कहीं बड़ा हो सकता है। मास्टरमाइंड अब भी फरार है, जो दर्शाता है कि पुलिस की यह कार्रवाई एक बड़े नेटवर्क का महज़ ऊपरी छोर पकड़ पाई है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली के रंजीत नगर में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कैसे हुआ?
3 सितंबर को मिली सूचना के बाद दिल्ली पुलिस के स्पेशल स्टाफ, साइबर पुलिस स्टेशन और रंजीत नगर पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और फील्ड वेरिफिकेशन से पुष्टि कर लाल रतन बिल्डिंग में छापा मारा। दोनों कॉल सेंटरों से 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इन फर्जी जॉब कॉल सेंटरों का ठगी का तरीका क्या था?
आरोपी ऑनलाइन जॉब पोर्टल से नौकरी चाहने वालों का डेटा हासिल कर उन्हें रिक्रूटर बनकर कॉल करते थे। उम्मीदवारों का भरोसा जीतने के बाद ₹1,200 से ₹3,500 तक की रजिस्ट्रेशन फीस वसूलते थे और पैसे मिलते ही संपर्क तोड़ लेते थे।
छापे में कितने और क्या सामान ज़ब्त किए गए?
दोनों कॉल सेंटरों से 13 कंप्यूटर सिस्टम, 5 मोबाइल फोन, कॉलिंग सॉफ्टवेयर, नौकरी चाहने वालों का डेटा तथा डिजिटल एवं वित्तीय साक्ष्य जब्त किए गए।
इस मामले में अब तक किन-किन लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
पहले कॉल सेंटर से अर्पित, सकीना, करिश्मा, मीनाक्षी, चंचल और अशोक को गिरफ्तार किया गया। दूसरे कॉल सेंटर से आसिम, संदीप, गौरव मलिक, ज्ञान सिंह और रोहित को पकड़ा गया — कुल 11 गिरफ्तारियाँ।
क्या इस मामले में मास्टरमाइंड पकड़ा गया है?
अभी तक मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस उसकी पहचान, डेटा के स्रोत और धन-लेनदेन की जाँच कर रही है। जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जाँच भी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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