16 जुलाई 2026
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नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: कंपनी संचालक रणबीर सिंह समेत तीन गिरफ्तार, 39 मोबाइल व 10 लैपटॉप बरामद

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नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: कंपनी संचालक रणबीर सिंह समेत तीन गिरफ्तार, 39 मोबाइल व 10 लैपटॉप बरामद

सारांश

नोएडा के सेक्टर-63 में पुलिस ने एक संगठित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, जो व्यापारियों को ऑनलाइन मार्केटिंग और फर्जी सर्टिफिकेट का झाँसा देकर ठगता था। कंपनी संचालक रणबीर सिंह समेत तीन आरोपी गिरफ्तार, 39 मोबाइल व 10 लैपटॉप बरामद।

मुख्य बातें

नोएडा पुलिस ने 16 जुलाई को सेक्टर-63, ए-135 भवन में संचालित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया।
कंपनी संचालक रणबीर सिंह (इंदिरापुरम, गाजियाबाद), सहयोगी ललित कुमार (बरौला, नोएडा) और रणबीर की पत्नी ज्योति गिरफ्तार।
मौके से 39 स्मार्टफोन , 9 कीपैड मोबाइल , 10 लैपटॉप , 36 सीपीयू और 32 सिम कार्ड बरामद।
गिरोह व्यापारियों को ऑनलाइन मार्केटिंग, नए खरीदार और फर्जी प्रमाणपत्र का प्रलोभन देकर ठगी करता था।
डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जाँच जारी; नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश।

नोएडा के सेक्टर-63 स्थित एक फर्जी कॉल सेंटर का 16 जुलाई को पर्दाफाश हुआ, जब थाना सेक्टर-63 पुलिस ने संगठित साइबर ठगी के इस गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। आरोपी देशभर के व्यापारियों और उद्यमियों को ऑनलाइन मार्केटिंग, नए खरीदार उपलब्ध कराने और फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने का झाँसा देकर मोटी रकम वसूलते थे।

कैसे हुआ खुलासा

पुलिस के अनुसार, 16 जुलाई को थाना सेक्टर-63 में दर्ज एक शिकायत की जाँच के दौरान इस गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। जाँच में सामने आया कि सेक्टर-63, ए-135 भवन में फर्जी कॉल सेंटर संचालित हो रहा था, जहाँ से देशभर के व्यापारियों को फोन कर सेवाओं का प्रलोभन दिया जाता था। आरोपी पहले फर्जी दस्तावेज़ और प्रमाणपत्र दिखाकर लोगों का विश्वास जीतते, फिर आर्थिक ठगी करते थे।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी

पुलिस ने कंपनी संचालक रणबीर सिंह (निवासी इंदिरापुरम, गाजियाबाद), उसके सहयोगी ललित कुमार (निवासी बरौला, नोएडा) और रणबीर की पत्नी ज्योति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार ज्योति कॉल सेंटर के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रही थी।

बरामद सामग्री

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 39 स्मार्टफोन, 9 कीपैड मोबाइल, 10 लैपटॉप, 36 सीपीयू, 32 सिम कार्ड तथा टैक्स इनवॉइस, फर्जी दस्तावेज़ और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बरामद किए। इन सभी उपकरणों की फॉरेंसिक जाँच कराई जा रही है, जिससे गिरोह के नेटवर्क, ठगी के तरीकों और देशभर में पीड़ितों की संख्या का पता लगाया जा सके।

जाँच की स्थिति और आगे की कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और देश के विभिन्न राज्यों के व्यापारियों एवं उद्यमियों को निशाना बनाता था। अधिकारियों ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की शीघ्र पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी। थाना सेक्टर-63 में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जाँच जारी है।

नोएडा पुलिस का संदेश

नोएडा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध और फर्जी कॉल सेंटर के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा तथा ऐसे अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब देशभर में ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि ठगी के तरीके अब अधिक परिष्कृत और लक्षित हो चुके हैं। बरामद 36 सीपीयू और 32 सिम कार्ड गिरोह के व्यापक नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं, जिसकी पूरी जाँच अभी बाकी है। असली सवाल यह है कि यह गिरोह 'काफी समय से' सक्रिय था — तो इतने लंबे समय तक यह रडार से बाहर कैसे रहा?
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा के फर्जी कॉल सेंटर में क्या होता था?
सेक्टर-63 स्थित इस फर्जी कॉल सेंटर से देशभर के व्यापारियों और उद्यमियों को फोन कर ऑनलाइन मार्केटिंग सेवाएं, नए खरीदार उपलब्ध कराने और फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने का झाँसा दिया जाता था। फर्जी दस्तावेज़ दिखाकर विश्वास जीतने के बाद आरोपी मोटी रकम वसूलते थे।
इस मामले में कौन-कौन गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने कंपनी संचालक रणबीर सिंह (इंदिरापुरम, गाजियाबाद), उसके सहयोगी ललित कुमार (बरौला, नोएडा) और रणबीर की पत्नी ज्योति को गिरफ्तार किया है। ज्योति कॉल सेंटर के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाती थी।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने 39 स्मार्टफोन, 9 कीपैड मोबाइल, 10 लैपटॉप, 36 सीपीयू, 32 सिम कार्ड तथा टैक्स इनवॉइस, फर्जी दस्तावेज़ और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बरामद किए। इन सभी की फॉरेंसिक जाँच कराई जा रही है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
थाना सेक्टर-63 में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और डिजिटल साक्ष्यों की जाँच जारी है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की शीघ्र पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी।
इस फर्जी कॉल सेंटर का शिकार कौन बने?
पुलिस की प्रारंभिक जाँच के अनुसार यह गिरोह देश के विभिन्न राज्यों के व्यापारियों और उद्यमियों को निशाना बनाता था। पीड़ितों की सटीक संख्या बरामद उपकरणों की फॉरेंसिक जाँच के बाद सामने आएगी।
राष्ट्र प्रेस
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