दिल्ली साइबर पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, ₹1.31 लाख की ठगी में 6 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली की साइबर पुलिस ने 9 जुलाई 2026 को पश्चिमी दिल्ली के ख्याला इलाके में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई करावल नगर निवासी अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज ई-एफआईआर के आधार पर हुई, जिसमें क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के ज़रिए उनके खाते से ₹1.31 लाख की अनधिकृत निकासी का आरोप था। यह मामला उस बढ़ते साइबर अपराध पैटर्न की एक और कड़ी है जिसमें ठग बैंक प्रतिनिधि बनकर आम नागरिकों को निशाना बनाते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पीड़ित अमित कुमार को कथित तौर पर एक व्यक्ति का फोन आया जिसने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताया और क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने की पेशकश की। भरोसा जीतने के बाद आरोपियों ने उनसे कार्ड की गोपनीय जानकारी हासिल की और बिना अनुमति के ₹1.31 लाख के ट्रांजेक्शन कर दिए। ठगी की रकम का इस्तेमाल ब्लिंकिट के ज़रिए एक सैमसंग मोबाइल फोन और दो पावर बैंक खरीदने में किया गया था।
जांच और गिरफ्तारी
नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन की एक समर्पित टीम ने तकनीकी निगरानी और डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण के ज़रिए सबसे पहले अनीश गुप्ता (20 वर्ष, रोहिणी) की पहचान की, जो पीड़ित से संपर्क के लिए इस्तेमाल मोबाइल फोन चला रहा था। अनीश की पूछताछ से ख्याला स्थित किराए के फ्लैट में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का पता चला, जहाँ पुलिस ने तत्काल छापा मारकर चार और आरोपियों को दबोच लिया।
गिरफ्तार छह आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई: नितिन सोलंकी (25 वर्ष, नांगलोई), ध्रुव (21 वर्ष, रोहिणी), अनीश गुप्ता (20 वर्ष, रोहिणी), सिमरन (24 वर्ष, टैगोर गार्डन), इशिका (25 वर्ष, मोती नगर) और बॉबी श्रेष्ठ (22 वर्ष, कराला)। जांच में सामने आया कि नितिन सोलंकी और सिमरन फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रहे थे, जबकि इशिका और ध्रुव कॉलर के रूप में पीड़ितों से सीधे संपर्क करते थे।
बरामदगी और पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस ने आरोपियों के पास से 5 मोबाइल फोन — जिनमें पीड़ित से संपर्क के लिए इस्तेमाल हैंडसेट भी शामिल है — और ठगी की रकम से खरीदे गए 2 पावर बैंक बरामद किए। उल्लेखनीय है कि आरोपी ध्रुव पहले साइबर अपराध के दो मामलों में और बॉबी श्रेष्ठ एक मामले में संलिप्त पाए जा चुके हैं, जो इस गिरोह के संगठित स्वरूप को उजागर करता है।
आगे की जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य पीड़ितों, संभावित साथियों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल अभी जारी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली में बैंकिंग प्रतिनिधि बनकर की जाने वाली साइबर ठगी की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।