दिल्ली पुलिस ने मुंबई के साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, ₹4.81 लाख की ठगी में तीन गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली जिला साइबर पुलिस स्टेशन ने मुंबई के मलाड वेस्ट में इंश्योरेंस ब्रोकरेज फर्म की आड़ में संचालित एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का 24 जून को भंडाफोड़ किया और इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। एक वरिष्ठ नागरिक के साथ हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी नवीनीकरण के बहाने ₹4,81,788 की धोखाधड़ी के इस मामले ने देशव्यापी इंश्योरेंस फ्रॉड नेटवर्क की परतें उधेड़ दी हैं।
मामले की शुरुआत कैसे हुई
यह मामला नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायत से सामने आया। पीड़ित — एक वरिष्ठ नागरिक — को एक प्रतिष्ठित हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का एग्जीक्यूटिव बनकर व्हाट्सअप कॉल आई। कॉलर ने पॉलिसी नवीनीकरण की आड़ में पीड़ित से संवेदनशील क्रेडिट कार्ड जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद पीड़ित की सहमति के बिना उनके क्रेडिट कार्ड से ₹1,60,596 के तीन अनधिकृत लेनदेन किए गए, जिनकी कुल राशि ₹4,81,788 रही। नई दिल्ली जिला साइबर पुलिस स्टेशन में 17 अप्रैल को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू की गई।
तकनीकी जाँच और मुंबई में छापा
जाँच में तकनीकी विश्लेषण के ज़रिए पता चला कि मुंबई, महाराष्ट्र से एक संगठित गिरोह इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दे रहा था। नई दिल्ली जिला साइबर पुलिस की एक विशेष टीम — जिसमें एसआई अनुराग, हेड कांस्टेबल मनोज, हेड कांस्टेबल द्रोणा और हेड कांस्टेबल विजय शामिल थे — ने मुंबई में व्यापक तकनीकी निगरानी और फील्ड सत्यापन किया। विश्वसनीय तकनीकी सूचनाओं के आधार पर मलाड वेस्ट स्थित एक कार्यालय पर छापा मारा गया, जिसे वैध थर्ड-पार्टी हेल्थ इंश्योरेंस ब्रोकरेज फर्म के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था।
फ्रॉड मॉड्यूल का तरीका
छापे के दौरान पाया गया कि इस कार्यालय का उपयोग देशभर के इंश्योरेंस पॉलिसीधारकों को निशाना बनाकर धोखाधड़ी वाली टेली-कॉलिंग गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। आरोपी संभावित पीड़ितों की पहचान के लिए ग्राहक डेटाबेस का उपयोग करते थे और पॉलिसी नवीनीकरण, रद्दीकरण या रिफंड प्रोसेसिंग के बहाने उनसे संपर्क करते थे। भरोसा जीतने के बाद वे क्रेडिट कार्ड विवरण और OTP जैसी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते थे। जाँच में यह भी सामने आया कि ठगी से प्राप्त धनराशि का उपयोग 10 ग्राम की दो और 5 ग्राम की दो सोने की ईंटें खरीदने में किया गया — यह धन को नकद में बदलने की एक सुनियोजित रणनीति थी।
गिरफ्तार आरोपी और कार्रवाई
गिरफ्तार तीनों आरोपियों की पहचान साहिल अहमद शेख (23 वर्ष), उमेर अली सैयद (23 वर्ष) और वरुण गुप्ता (22 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों पूर्व में अन्य इंश्योरेंस ब्रोकरेज कंपनियों में टेलीकॉलर के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 13 अन्य साथियों को BNSS की धारा 35(3) के तहत पाबंद किया गया है। यह कार्रवाई इस बात की ओर इशारा करती है कि इस तरह के फ्रॉड नेटवर्क में पूर्व इंश्योरेंस कर्मचारियों की भूमिका बढ़ती जा रही है, जो ग्राहक डेटा और उद्योग की कार्यप्रणाली से परिचित होते हैं।
आगे क्या होगा
जाँच अभी जारी है और पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि वरिष्ठ नागरिक साइबर ठगों के सबसे आसान निशाने बने हुए हैं — विशेषकर जब बात इंश्योरेंस और बैंकिंग जैसी संवेदनशील सेवाओं की हो।