7 अगस्त 2026
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दिल्ली साइबर पुलिस ने पार्सल फ्रॉड गिरोह तोड़ा, नाइजीरियाई नागरिक समेत 4 गिरफ्तार; ₹1.46 लाख की ठगी

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दिल्ली साइबर पुलिस ने पार्सल फ्रॉड गिरोह तोड़ा, नाइजीरियाई नागरिक समेत 4 गिरफ्तार; ₹1.46 लाख की ठगी

सारांश

दिल्ली साइबर पुलिस ने पार्सल फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है जो विदेशी डॉलर-सोने का झाँसा देकर ठगी करता था। नाइजीरियाई नागरिक समेत 4 गिरफ्तार; जाँच दिल्ली, तेलंगाना और विशाखापत्तनम में हुई। ₹1.46 लाख की ठगी का मामला।

मुख्य बातें

दिल्ली साइबर पुलिस ने अंतरराज्यीय पार्सल फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरोह ने पीड़ित को अमेरिकी डॉलर और सोने के विदेशी पार्सल का झाँसा देकर ₹1.46 लाख ठगे।
नाइजीरियाई नागरिक सिमियन मिरेकल चिनोनसो को विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) से गिरफ्तार किया गया।
अन्य तीन आरोपी — दीपक कुमार (दिल्ली), कोंडा सागर और अजमीरा विनोद कुमार (तेलंगाना) — 'म्यूल' बैंक खाते उपलब्ध कराते थे।
ऑपरेशन में 7 मोबाइल फोन बरामद; जाँच दिल्ली, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में समन्वय से हुई।

दिल्ली पुलिस के दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर पुलिस स्टेशन ने एक अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें विशाखापत्तनम में रह रही एक नाइजीरियाई नागरिक भी शामिल है। गिरोह ने एक पीड़ित को अमेरिकी डॉलर और सोने से भरे विदेशी पार्सल का झाँसा देकर ₹1.46 लाख की ठगी की थी।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

31 मई 2026 को दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज हुई। शिकायतकर्ता ने बताया कि अज्ञात व्यक्तियों ने खुद को अमेरिका का निवासी बताते हुए व्हाट्सऐप चैट और फोन कॉल के ज़रिए संपर्क किया। उन्होंने धीरे-धीरे पीड़ित का विश्वास जीता और दावा किया कि उसके नाम पर अमेरिकी डॉलरसोना भारत भेजा गया है।

इसके बाद मनी डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट, फ्लाइट टिकट बुकिंग, कस्टम क्लीयरेंस चार्ज और सोना छुड़ाने के खर्च के नाम पर झूठे बहाने बनाकर पीड़ित को अलग-अलग UPI आईडी और बैंक खातों में ₹1.46 लाख ट्रांसफर करवाए गए।

जाँच और गिरफ्तारियाँ

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने एक विशेष टीम गठित की। विस्तृत तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों की जाँच, वित्तीय लेनदेन की पड़ताल और सर्विलांस के आधार पर जाँच टीम दिल्ली से तेलंगाना और फिर विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) तक पहुँची।

तकनीकी इनपुट के आधार पर आरोपी दीपक कुमार को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया और उसके पास से अपराध में इस्तेमाल एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस टीम तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली जिले पहुँची, जहाँ कोंडा सागर को गिरफ्तार किया गया। तेलंगाना से ही अजमीरा विनोद कुमार को भी पकड़ा गया और उसके पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए।

आगे के तकनीकी विश्लेषण से विशाखापत्तनम में रह रही नाइजीरियाई नागरिक सिमियन मिरेकल चिनोनसो की भूमिका उजागर हुई। पुलिस ने वहाँ छापा मारकर उसे गिरफ्तार किया और उसके पास से अपराध में इस्तेमाल चार मोबाइल फोन बरामद किए। कुल मिलाकर ऑपरेशन में 7 मोबाइल फोन जब्त किए गए।

गिरोह का तरीकाकार

जाँच से सामने आया कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट था। दीपक कुमार, कोंडा सागर और अजमीरा विनोद कुमार कमीशन के बदले सिंडिकेट को 'म्यूल' बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, ताकि ठगी की रकम को कई खातों में घुमाकर उसके स्रोत को छुपाया जा सके।

नाइजीरियाई नागरिक सिमियन मिरेकल चिनोनसो व्हाट्सऐप और फोन कॉल के ज़रिए इमिग्रेशन अधिकारियों, कस्टम अधिकारियों और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि बनकर पीड़ितों से बात करता था। विदेशी पार्सल, कस्टम क्लीयरेंस, दस्तावेज़ीकरण शुल्क और कीमती सामान छुड़ाने की झूठी कहानियाँ गढ़कर पीड़ितों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था।

आम जनता पर असर और सावधानी

यह मामला 'पार्सल स्कैम' की उस बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें ठग विदेशी उपहारों या पार्सल का लालच देकर लोगों को ठगते हैं। गौरतलब है कि ऐसे गिरोह अक्सर अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के ज़रिए काम करते हैं, जिससे इनकी पहचान और गिरफ्तारी जटिल हो जाती है।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऑनलाइन पैसे न भेजें और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें। आगे की जाँच जारी है और सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे गिरोह नए चेहरों के साथ फिर उभरते रहेंगे।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली साइबर पुलिस ने किस तरह के फ्रॉड का भंडाफोड़ किया?
दिल्ली साइबर पुलिस ने एक 'पार्सल स्कैम' गिरोह का भंडाफोड़ किया, जिसमें ठग खुद को अमेरिकी निवासी बताकर व्हाट्सऐप पर संपर्क करते थे और पीड़ित को विदेशी पार्सल में डॉलर व सोना भेजने का झाँसा देकर कस्टम क्लीयरेंस आदि के नाम पर पैसे ठगते थे। इस मामले में एक पीड़ित से ₹1.46 लाख की ठगी हुई।
गिरफ्तार नाइजीरियाई नागरिक की इस फ्रॉड में क्या भूमिका थी?
नाइजीरियाई नागरिक सिमियन मिरेकल चिनोनसो विशाखापत्तनम में रहकर इमिग्रेशन अधिकारी, कस्टम अधिकारी और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि बनकर पीड़ितों से व्हाट्सऐप और फोन पर बात करता था। वह झूठी कहानियाँ गढ़कर पीड़ितों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करता था।
'म्यूल' बैंक खाते क्या होते हैं और इस मामले में इनका क्या इस्तेमाल हुआ?
'म्यूल' बैंक खाते वे खाते होते हैं जिन्हें कमीशन के बदले अपराधियों को इस्तेमाल करने दिया जाता है ताकि ठगी की रकम को कई खातों में घुमाकर उसके स्रोत को छुपाया जा सके। इस मामले में दीपक कुमार, कोंडा सागर और अजमीरा विनोद कुमार ऐसे ही खाते सिंडिकेट को उपलब्ध कराते थे।
पुलिस ने इस गिरोह तक कैसे पहुँची?
31 मई 2026 को शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के आधार पर जाँच की। इससे जाँच टीम दिल्ली से तेलंगाना और फिर विशाखापत्तनम तक पहुँची, जहाँ सभी चार आरोपी पकड़े गए।
पार्सल स्कैम से बचने के लिए क्या सावधानी बरतें?
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऑनलाइन पैसे न भेजें, चाहे वह कस्टम क्लीयरेंस या पार्सल छुड़ाने का कोई भी बहाना बनाए। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।
राष्ट्र प्रेस
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