क्या दिल्ली साउथ-वेस्ट पुलिस ने शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश किया?
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
- गिरोह ने करोड़ों रुपये की ठगी की।
- ठगी की राशि म्यूल खातों के जरिए विदेश भेजी गई।
- साइबर क्राइम से संबंधित 63 शिकायतें दर्ज की गईं।
- पुलिस ने चार राज्यों में छापे मारे।
नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के साउथ-वेस्ट क्षेत्र की साइबर पुलिस की टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें 8 चालाक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यह गिरोह आम लोगों को शेयर ट्रेडिंग और निवेश में लाभ का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। ठगी की गई राशि को भारत के म्यूल खातों के माध्यम से कंबोडिया में मौजूद सरगनों तक पहुंचाया जा रहा था।
पुलिस की इस कार्रवाई में चार राज्यों में छापेमारी की गई, जिसमें 10 आधुनिक मोबाइल फोन और कई म्यूल बैंक खातों से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मिले हैं। जांच में यह पाया गया कि पिछले 14 दिनों में इन म्यूल खातों में लगभग 4 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। साथ ही 63 एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) शिकायतें इस गिरोह से संबंधित पाई गई हैं।
7 नवंबर 2025 को थाना साइबर, साउथ-वेस्ट जिला में एफआईआर दर्ज की गई। वसंत कुंज की 42 वर्षीय महिला ने शिकायत की कि उसे व्हाट्सएप के माध्यम से शेयर ट्रेडिंग में विशेषज्ञ मार्गदर्शन और गारंटीड रिटर्न का झांसा दिया गया। इस फर्जी दावे और नकली निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए महिला को मानसिक रूप से प्रभावित कर उससे कुल 15.58 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।
निवेश फ्रॉड मामलों में बढ़ते मामलों को देखते हुए इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें एसआई चेतन राणा, एचसी मनेंदर और एचसी विजयपाल शामिल थे। यह टीम एसीपी ऑप्स साउथ-वेस्ट जिला विजय पाल सिंह तोमर की निगरानी में काम कर रही थी। तकनीकी निगरानी, मनी ट्रेल एनालिसिस और डिजिटल फॉरेंसिक जांच के आधार पर तेलंगाना निवासी वनापटला सुनील कुमार की पहचान की गई, जो कमीशन पर म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराता था। तेलंगाना में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने कीसरा (तेलंगाना) में एक फर्जी फर्म खोलकर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में चालू खाता खुलवाया था।
इसके बाद हैदराबाद से उसके सहयोगी सकीनाला शंकर को गिरफ्तार किया गया, जिसने बताया कि यह खाता मनोज यादव को दिया गया था। उत्तर प्रदेश में दबिश देकर संत कबीर नगर से मनोज यादव को पकड़ा गया। आगे की जांच में संदीप सिंह उर्फ लंकेश (बनारस) और आदित्य प्रताप सिंह (कोटा, राजस्थान) की गिरफ्तारी हुई, जो देशभर में म्यूल खाते जुटाकर टेलीग्राम के जरिए विदेश में बैठे हैंडलर्स को उपलब्ध कराते थे।
ठगी की राशि बाद में राहुल और सोमपाल के खातों में ट्रांसफर की जाती थी। राहुल और शेरू को दिल्ली के पहाड़गंज इलाके से, जबकि सोमपाल को बरेली से गिरफ्तार किया गया। सोमपाल ने एमबीए की पढ़ाई की है और पहले एक सॉफ्टवेयर कंपनी चलाता था, जिसके बंद होने के बाद उसने अपना कॉर्पोरेट खाता साइबर अपराधियों को सौंप दिया। उसके खाते से जुड़े 51 एनसीआरपी शिकायतें पाई गईं।
आरोपियों की पहचान वनापटला सुनील कुमार (43), सकीनाला शंकर (61), मनोज यादव (38), संदीप सिंह उर्फ लंकेश (30), आदित्य प्रताप सिंह (23), राहुल (30), शेरू (38) और सोमपाल (34) के रूप में हुई। आरोपियों के पास से 10 स्मार्टफोन और 13 सिम कार्ड बरामद किए गए, जिनका उपयोग म्यूल खातों के संचालन और राशि ट्रांसफर में किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, व्हाट्सएप पर पीड़ितों को लुभाने वाले नंबर कंबोडिया से संचालित किए जा रहे थे, जबकि भारत में बैठे आरोपी म्यूल खातों के माध्यम से ठगी की राशि को घुमाकर विदेश भेजते थे। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है।