डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे की संप्रभुता पर अमेरिकी सीनेटर का विधेयक
सारांश
Key Takeaways
- डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा अमेरिका और ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण संयुक्त अड्डा है।
- सीनेटर जॉन केनेडी ने एक विधेयक पेश किया है जो संप्रभुता को सुरक्षित करेगा।
- 1966 के समझौते में बदलाव के लिए सीनेट की मंजूरी जरूरी होगी।
- ब्रिटेन का प्रस्ताव चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने का है।
- यह विवाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में लंबे समय से जारी है।
वाशिंगटन, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के एक सीनेटर ने एक ऐसा विधेयक प्रस्तुत किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता में किसी भी बदलाव को रोकना है, जिसमें डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा भी शामिल है। यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक कि अमेरिकी सीनेट औपचारिक रूप से अमेरिका-ब्रिटेन रक्षा समझौते में बदलाव की मंजूरी न दे।
लुइसियाना के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन केनेडी, जो सीनेट के एप्रोप्रियेशन्स कमेटी के सदस्य हैं, ने "डिएगो गार्सिया ट्रीटी ओवरसाइट एक्ट" (डिएगो गार्सिया संधि पर्यवेक्षण अधिनियम) नामक विधेयक पेश किया है। इस प्रस्ताव के तहत, 1966 में अमेरिका और ब्रिटेन के बीच हुए 'ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी' समझौते में किसी भी बदलाव के लिए सीनेट की सलाह और सहमति आवश्यक होगी।
यह कदम उस समय उठाया गया है जब वाशिंगटन में ब्रिटेन के उस प्रस्ताव पर चिंता जताई जा रही है, जिसमें चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने की बात कही गई है। इस द्वीपसमूह में मौजूद डिएगो गार्सिया अमेरिका और ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण संयुक्त नौसैनिक समर्थन अड्डा है।
सीनेटर केनेडी ने कहा, “जब दो देश किसी संधि पर सहमत होते हैं, तो उनमें से एक देश बिना दूसरे की सहमति के उसके शर्तों में बदलाव नहीं कर सकता। यह सामान्य समझ की बात है।” उन्होंने ब्रिटेन की इस पहल की आलोचना करते हुए कहा कि वह डिएगो गार्सिया पर स्थित संयुक्त सैन्य अड्डे को ऐसे व्यक्ति के “करीबी” देश को सौंपने की कोशिश कर रहा है, जिसे उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सहयोगी बताया। केनेडी ने कहा कि उनका विधेयक यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी सीनेट की मंजूरी के बिना संधि में कोई बदलाव न किया जा सके।
प्रस्तावित कानून के अनुसार, 1966 के समझौते में किसी भी संशोधन को लागू करने से पहले सीनेट की मंजूरी अनिवार्य होगी। इसके साथ ही यह भी प्रावधान है कि यदि सीनेट की सहमति न हो तो कोई भी संघीय एजेंसी इस समझौते में बदलाव के लिए धन का उपयोग नहीं कर सकेगी।
विधेयक में यह भी कहा गया है कि किसी भी संभावित संशोधन पर बातचीत शुरू करने से पहले राष्ट्रपति को कांग्रेस के समक्ष एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कारण, डिएगो गार्सिया पर अमेरिकी संचालन नियंत्रण पर संभावित प्रभाव, और किसी तीसरे देश के दावे या विदेशी सैन्य उपस्थिति से उत्पन्न जोखिमों का आकलन शामिल होगा।
सीनेटर केनेडी पहले भी चागोस द्वीपसमूह को मॉरीशस को सौंपने के प्रस्ताव की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने ब्रिटेन में इस योजना के विरोधियों से भी बातचीत की है और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से इस व्यवस्था का विरोध करने की अपील की है।
डिएगो गार्सिया, जो चागोस द्वीपसमूह का सबसे बड़ा द्वीप है, अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य प्रतिष्ठान का केंद्र है और हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिकी बलों के लिए एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल हब माना जाता है।
यह अड्डा लंबे समय से मध्य-पूर्व, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाता रहा है। इसकी भौगोलिक स्थिति अमेरिका को हिंद महासागर के विशाल क्षेत्र में नौसैनिक और हवाई अभियानों को समर्थन देने तथा रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने की सुविधा देती है।
चागोस द्वीपसमूह को लेकर विवाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में लंबे समय से जारी है। यूनाइटेड किंगडम ने 1968 में मॉरीशस की स्वतंत्रता से पहले इस द्वीपसमूह को अलग कर लिया था, जबकि मॉरीशस लंबे समय से इस पर अपनी संप्रभुता का दावा करता रहा है।