चैत्र मास की पापमोचिनी एकादशी पर महाकालेश्वर मंदिर में भव्य आरती का आयोजन
सारांश
Key Takeaways
- महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र मास की पापमोचिनी एकादशी पर विशेष आरती होती है।
- महाकाल का दर्शन पापों के नाश और सुख-शांति की प्राप्ति का माध्यम माना जाता है।
- यह मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक है।
- भक्तों का उत्साह और भक्ति इस आयोजन की विशेषता है।
- महाकाल का भव्य शृंगार और आरती का आयोजन अद्वितीय होता है।
उज्जैन, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर के पवित्र स्थान पर चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी (पापमोचिनी एकादशी) के अवसर पर भक्तों की बड़ी संख्या ने यहां आने का अवसर पाया। सभी श्रद्धालु महाकाल के भव्य शृंगार को देखने के लिए अति उत्साहित थे। मान्यता है कि इस दिन महाकाल का दर्शन करने से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है।
चैत्र मास के इस विशेष दिन पर, शनिवार को सुबह 4 बजे से ही पूरा मंदिर परिसर भक्तों से भरा हुआ था। आरती के समय, भक्तों ने 'जय महाकाल' के नारे लगाकर अपने विश्वास और श्रद्धा का प्रदर्शन किया। श्रद्धालुओं के चेहरे पर भक्ति की झलक साफ देखी जा सकती थी।
महाकाल की यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा संपन्न कराई जाती है। इस आरती में, महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती के बाद, महाकाल का जलाभिषेक किया जाता है, जिसमें पंचामृत से उनका पूजन किया जाता है और पवित्र भस्म से विशेष स्नान कराया जाता है।
आरती के बाद, महाकाल का मनमोहक शृंगार किया गया, जिसमें उनका मुखारविंद (कमल के समान सुंदर मुख) को बेहद खूबसूरती से सजाया गया। बाबा के माथे पर त्रिपुंड और चंद्रमा की सजावट की गई, और नवीन मुकुट पहनाकर उन्हें फूलों की माला पहनाई गई। साथ ही ताजे बिल्वपत्र चढ़ाए गए और रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं से शृंगार को और भी आकर्षक बनाया गया। यह दृश्य सभी के मन को प्रसन्न कर गया।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक प्रमुख स्थान रखता है और इसे अद्वितीय माना जाता है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी स्वयंभू शिवलिंग है, मान्यता है कि दक्षिण दिशा मृत्यु की दिशा है और महाकाल मृत्यु के स्वामी हैं। यहां, ब्रह्म मुहूर्त में भव्य भस्म आरती के दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।