कोलकाता में फर्जी लोन कॉल सेंटर का भंडाफोड़: 10 गिरफ्तार, 48 मोबाइल और नकली दस्तावेज़ बरामद
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस ने 12 जुलाई 2026 को शहर में कम ब्याज पर लोन दिलाने का झाँसा देकर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क का भंडाफोड़ किया और 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपी नामी वित्तीय कंपनियों के कर्मचारी बनकर लोगों को लोन का लालच देते थे और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ऐंठ लेते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से 48 कीपैड मोबाइल फोन, एक स्मार्टफोन, एक लैपटॉप, 6 सिम कार्ड और दो नकली रबर स्टैम्प बरामद किए गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पोर्ट डिवीजन के साइबर सेल और मेटियाब्रुज पुलिस स्टेशन के संयुक्त अभियान में यह कार्रवाई हुई। 9 जुलाई को जाँचकर्ताओं ने बोबाजार पुलिस स्टेशन क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की, जहाँ दो नकली कॉल सेंटर संचालित हो रहे थे। वहाँ से 9 लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद, पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर शनिवार को पटुली पुलिस स्टेशन क्षेत्र से सुधीर महतो नामक एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जिससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या 10 हो गई।
पीड़िता की शिकायत और ठगी का तरीका
मेटियाब्रुज इलाके में रहने वाली एक महिला की शिकायत पर यह जाँच शुरू हुई। आरोप है कि ठगों ने खुद को 'टाटा कैपिटल फाइनेंस' का कर्मचारी बताकर उसे ₹2.18 लाख का लोन दिलाने का वादा किया। विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने टाटा कैपिटल के नकली दस्तावेज़ और एक नकली डिमांड ड्राफ्ट भी तैयार किया। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस चार्ज और डॉक्यूमेंटेशन फीस के नाम पर पैसे माँगे गए। महिला ने किस्तों में कुल ₹25,450 जमा कर दिए, परंतु वादा किया गया लोन कभी नहीं मिला। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
तकनीकी निगरानी से हुई कार्रवाई
पोर्ट डिवीजन के साइबर सेल ने जाँच के दौरान तकनीकी निगरानी (टेक्निकल सर्विलांस) का उपयोग करके आरोपियों की लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद मेटियाब्रुज पुलिस स्टेशन और साइबर सेल के अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने समन्वित छापेमारी को अंजाम दिया। गौरतलब है कि चल रही जाँच की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने प्रारंभिक गिरफ्तारियों की जानकारी तत्काल सार्वजनिक नहीं की।
नेटवर्क और बरामदगी
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि यह रैकेट और भी बड़ा है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 48 कीपैड मोबाइल फोन, 1 स्मार्टफोन, 1 लैपटॉप, 6 सिम कार्ड, 2 नकली रबर स्टैम्प और कई फोन नंबरों की सूची बरामद की है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क से कितने और लोग जुड़े हैं और कितने पीड़ितों से ठगी की गई।
आगे की जाँच
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है। रैकेट में शामिल अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जाँच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। यह मामला कोलकाता में साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं की ओर ध्यान दिलाता है, जहाँ ठग अब नामी कंपनियों की आड़ लेकर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं।