12 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोलकाता में फर्जी लोन कॉल सेंटर का भंडाफोड़: 10 गिरफ्तार, 48 मोबाइल और नकली दस्तावेज़ बरामद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोलकाता में फर्जी लोन कॉल सेंटर का भंडाफोड़: 10 गिरफ्तार, 48 मोबाइल और नकली दस्तावेज़ बरामद

सारांश

कोलकाता में फर्जी लोन कॉल सेंटर नेटवर्क का पर्दाफाश — ठग टाटा कैपिटल जैसी नामी कंपनियों के कर्मचारी बनकर लोगों को ₹2.18 लाख के लोन का झाँसा देते थे और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ऐंठते थे। पुलिस ने 10 आरोपी दबोचे, 48 मोबाइल और नकली दस्तावेज़ बरामद।

मुख्य बातें

कोलकाता पुलिस ने 9-12 जुलाई 2026 के बीच फर्जी लोन कॉल सेंटर नेटवर्क का भंडाफोड़ कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
आरोपी टाटा कैपिटल फाइनेंस के कर्मचारी बनकर लोगों को ₹2.18 लाख के लोन का झाँसा देते थे।
एक पीड़िता से प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस और डॉक्यूमेंटेशन के नाम पर ₹25,450 की ठगी की गई।
बरामदगी में 48 कीपैड मोबाइल , 1 स्मार्टफोन , 1 लैपटॉप , 6 सिम कार्ड और 2 नकली रबर स्टैम्प शामिल।
छापेमारी बोबाजार और पटुली इलाकों में हुई; सुधीर महतो 10वें आरोपी के रूप में गिरफ्तार।
पुलिस ने तकनीकी निगरानी के ज़रिए आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की; नेटवर्क के और सदस्यों की तलाश जारी।

कोलकाता पुलिस ने 12 जुलाई 2026 को शहर में कम ब्याज पर लोन दिलाने का झाँसा देकर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क का भंडाफोड़ किया और 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपी नामी वित्तीय कंपनियों के कर्मचारी बनकर लोगों को लोन का लालच देते थे और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ऐंठ लेते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से 48 कीपैड मोबाइल फोन, एक स्मार्टफोन, एक लैपटॉप, 6 सिम कार्ड और दो नकली रबर स्टैम्प बरामद किए गए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

पोर्ट डिवीजन के साइबर सेल और मेटियाब्रुज पुलिस स्टेशन के संयुक्त अभियान में यह कार्रवाई हुई। 9 जुलाई को जाँचकर्ताओं ने बोबाजार पुलिस स्टेशन क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की, जहाँ दो नकली कॉल सेंटर संचालित हो रहे थे। वहाँ से 9 लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद, पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर शनिवार को पटुली पुलिस स्टेशन क्षेत्र से सुधीर महतो नामक एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जिससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या 10 हो गई।

पीड़िता की शिकायत और ठगी का तरीका

मेटियाब्रुज इलाके में रहने वाली एक महिला की शिकायत पर यह जाँच शुरू हुई। आरोप है कि ठगों ने खुद को 'टाटा कैपिटल फाइनेंस' का कर्मचारी बताकर उसे ₹2.18 लाख का लोन दिलाने का वादा किया। विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने टाटा कैपिटल के नकली दस्तावेज़ और एक नकली डिमांड ड्राफ्ट भी तैयार किया। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस चार्ज और डॉक्यूमेंटेशन फीस के नाम पर पैसे माँगे गए। महिला ने किस्तों में कुल ₹25,450 जमा कर दिए, परंतु वादा किया गया लोन कभी नहीं मिला। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

तकनीकी निगरानी से हुई कार्रवाई

पोर्ट डिवीजन के साइबर सेल ने जाँच के दौरान तकनीकी निगरानी (टेक्निकल सर्विलांस) का उपयोग करके आरोपियों की लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद मेटियाब्रुज पुलिस स्टेशन और साइबर सेल के अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने समन्वित छापेमारी को अंजाम दिया। गौरतलब है कि चल रही जाँच की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने प्रारंभिक गिरफ्तारियों की जानकारी तत्काल सार्वजनिक नहीं की।

नेटवर्क और बरामदगी

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि यह रैकेट और भी बड़ा है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 48 कीपैड मोबाइल फोन, 1 स्मार्टफोन, 1 लैपटॉप, 6 सिम कार्ड, 2 नकली रबर स्टैम्प और कई फोन नंबरों की सूची बरामद की है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क से कितने और लोग जुड़े हैं और कितने पीड़ितों से ठगी की गई।

आगे की जाँच

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है। रैकेट में शामिल अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जाँच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। यह मामला कोलकाता में साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं की ओर ध्यान दिलाता है, जहाँ ठग अब नामी कंपनियों की आड़ लेकर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि अवसरवादी। असली सवाल यह है कि इतने बड़े नेटवर्क को चलाने के लिए डेटा — यानी संभावित पीड़ितों के फोन नंबर और वित्तीय जानकारी — कहाँ से मिल रही थी। जब तक डेटा-लीक की जड़ तक नहीं पहुँचा जाता, ऐसे रैकेट नए नाम और नए पते से फिर उठ खड़े होंगे।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता फर्जी लोन कॉल सेंटर मामले में क्या हुआ?
कोलकाता पुलिस ने 9 से 12 जुलाई 2026 के बीच बोबाजार और पटुली इलाकों में छापेमारी कर दो नकली लोन कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया और 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी नामी वित्तीय कंपनियों के कर्मचारी बनकर लोगों को कम ब्याज पर लोन दिलाने का झाँसा देते थे और फीस के नाम पर रकम ऐंठ लेते थे।
इस ठगी में आरोपियों ने किस तरीके से लोगों को फँसाया?
आरोपी टाटा कैपिटल फाइनेंस जैसी नामी कंपनियों के कर्मचारी बनकर फोन करते थे और लोन का लालच देते थे। विश्वास दिलाने के लिए नकली दस्तावेज़ और डिमांड ड्राफ्ट तैयार किए जाते थे, फिर प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस और डॉक्यूमेंटेशन के नाम पर किस्तों में पैसे वसूले जाते थे।
पीड़िता से कितने रुपए की ठगी हुई?
मेटियाब्रुज इलाके की एक महिला पीड़िता से ₹2.18 लाख के लोन का वादा करके किस्तों में कुल ₹25,450 की ठगी की गई। लोन कभी नहीं मिला, जिसके बाद महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और यह पूरा अभियान शुरू हुआ।
गिरफ्तारी में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं और क्या बरामद हुआ?
पोर्ट डिवीजन के साइबर सेल और मेटियाब्रुज पुलिस स्टेशन की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। आरोपियों के पास से 48 कीपैड मोबाइल फोन, 1 स्मार्टफोन, 1 लैपटॉप, 6 सिम कार्ड, 2 नकली रबर स्टैम्प और कई फोन नंबरों की सूची बरामद की गई।
क्या इस रैकेट में और लोग शामिल हो सकते हैं?
हाँ, पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने खुद स्वीकार किया कि यह नेटवर्क और भी बड़ा है। उन्हीं की जानकारी पर सुधीर महतो को पटुली से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब रैकेट के अन्य सदस्यों और कुल पीड़ितों की संख्या का पता लगाने के लिए जाँच जारी रखे हुए है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 दिन पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 4 सप्ताह पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले