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लखनऊ में ऑनलाइन नौकरी ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 5 जालसाज गिरफ्तार; अमूल-अमेज़न के नाम पर देते थे झांसा

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लखनऊ में ऑनलाइन नौकरी ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 5 जालसाज गिरफ्तार; अमूल-अमेज़न के नाम पर देते थे झांसा

सारांश

लखनऊ के विभूतिखंड में एक अवैध कॉल सेंटर से अमूल, अमेज़न और इन्फोसिस जैसी कंपनियों के नाम पर नौकरी का झांसा देकर देशभर के युवाओं को ठगने वाले 5 जालसाज गिरफ्तार। पुलिस ने 26 फर्जी दस्तावेज और 102 वर्क डाटा शीट बरामद कीं।

मुख्य बातें

साइबर क्राइम सेल लखनऊ ने 13 जून को विभूतिखंड, जेएस टॉवर स्थित अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारकर 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में कथित मैनेजर जीशान खान , टीम लीडर सतीश पाल और कॉलर सोनाली चौरसिया , शिवानी वर्मा , नीलू वर्मा शामिल हैं।
आरोपी अमूल, अमेज़न, इन्फोसिस, फ्लिपकार्ट सहित 8 नामी कंपनियों के नाम पर नौकरी का झांसा देते थे।
पुलिस ने 26 फर्जी दस्तावेज , 102 वर्क डाटा शीट , 11 की-पैड मोबाइल , 2 एंड्रॉयड फोन और 1 लैपटॉप बरामद किए।
ठगी की रकम फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी; एनसीआरपी पोर्टल पर देशभर से कई शिकायतें दर्ज मिलीं।
पुलिस ने युवाओं से नौकरी के नाम पर कोई भी फीस देने से पहले कंपनी की सत्यता जांचने की अपील की है।

लखनऊ में साइबर क्राइम सेल और साइबर थाना लखनऊ की संयुक्त पुलिस टीम ने 13 जून को विभूतिखंड स्थित जेएस टॉवर की चौथी मंजिल पर चल रहे एक अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारकर ऑनलाइन नौकरी दिलाने के नाम पर देशभर के युवाओं को ठगने वाले संगठित गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया। आरोपी प्रतिष्ठित कंपनियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से रकम वसूलते थे।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 की-पैड मोबाइल फोन, 2 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 102 वर्क डाटा शीट तथा 26 फर्जी जॉइनिंग लेटर, अप्रूवल लेटर और रजिस्ट्रेशन लेटर समेत अन्य दस्तावेज बरामद किए। यह कार्रवाई संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय), पुलिस उपायुक्त (अपराध) तथा अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) के निर्देशन में की गई।

ठगी का तरीका

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य कई वेबसाइटों से नौकरी तलाश रहे युवाओं का डाटा खरीदते थे। इसके बाद कॉल सेंटर से अभ्यर्थियों को फोन कर अमूल, अमेज़न, इन्फोसिस, फ्लिपकार्ट, मैनकाइंड, सुजुकी, पार्ले और सिप्ला जैसी नामी कंपनियों में आकर्षक वेतन पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता था। विश्वास जीतने के लिए फर्जी जॉइनिंग लेटर, अप्रूवल लेटर और रजिस्ट्रेशन दस्तावेज व्हाट्सएप के ज़रिए भेजे जाते थे।

गौरतलब है कि यह ठगी का तरीका कोई नया नहीं है — देशभर में नौकरी के नाम पर साइबर धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़े हैं, और यह उन मामलों में से एक है जहाँ संगठित गिरोह बाकायदा कॉल सेंटर के रूप में काम करते हैं।

वसूली और फर्जी खाते

अभ्यर्थियों से रजिस्ट्रेशन फीस, इंटरव्यू चार्ज, गेट पास शुल्क और अन्य प्रक्रियात्मक खर्चों के नाम पर रकम वसूली जाती थी। यह धनराशि फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। पुलिस द्वारा बरामद मोबाइल नंबरों और आईएमईआई की एनसीआरपी पोर्टल पर जांच करने पर देशभर से कई शिकायतें दर्ज मिलीं।

गिरफ्तार आरोपी

पकड़े गए पाँचों आरोपियों में गिरोह का कथित मैनेजर जीशान खान, टीम लीडर सतीश पाल तथा कॉलर के रूप में कार्यरत सोनाली चौरसिया, शिवानी वर्मा और नीलू वर्मा शामिल हैं। एडीसीपी किरण यादव ने पत्रकारों को बताया कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।

पुलिस की अपील

अधिकारियों ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी के नाम पर किसी भी प्रकार की फीस जमा करने से पहले संबंधित कंपनी और प्रस्ताव की सत्यता की जांच अवश्य करें। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कॉर्पोरेट पहचान की नकल पर टिकी है। एनसीआरपी पोर्टल पर देशभर से शिकायतें मिलना यह भी दर्शाता है कि यह गिरोह स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। असली सवाल यह है कि नौकरी पोर्टलों से डाटा की खरीद-फरोख्त इतनी आसान क्यों है — और उस पर लगाम कब लगेगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ में ऑनलाइन नौकरी ठगी गिरोह कैसे काम करता था?
गिरोह के सदस्य नौकरी पोर्टलों से युवाओं का डाटा खरीदते थे और फिर उन्हें अमूल, अमेज़न, इन्फोसिस जैसी कंपनियों में नौकरी का झांसा देकर रजिस्ट्रेशन फीस, इंटरव्यू चार्ज और गेट पास शुल्क वसूलते थे। विश्वास दिलाने के लिए व्हाट्सएप पर फर्जी जॉइनिंग लेटर और अप्रूवल लेटर भेजे जाते थे।
लखनऊ साइबर ठगी मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए और कौन हैं?
इस मामले में कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है — कथित मैनेजर जीशान खान, टीम लीडर सतीश पाल और कॉलर के रूप में काम करने वाली सोनाली चौरसिया, शिवानी वर्मा तथा नीलू वर्मा। सभी को विभूतिखंड स्थित जेएस टॉवर के अवैध कॉल सेंटर से पकड़ा गया।
पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या बरामद किया?
पुलिस ने 11 की-पैड मोबाइल फोन, 2 एंड्रॉयड फोन, 1 लैपटॉप, 102 वर्क डाटा शीट और 26 फर्जी जॉइनिंग, अप्रूवल व रजिस्ट्रेशन लेटर बरामद किए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल अभ्यर्थियों को ठगने के लिए किया जाता था।
क्या इस गिरोह के शिकार सिर्फ लखनऊ के युवा थे?
नहीं, बरामद मोबाइल नंबरों और आईएमईआई की एनसीआरपी पोर्टल पर जांच करने पर देशभर से कई शिकायतें दर्ज मिलीं। यह गिरोह राष्ट्रीय स्तर पर नौकरी तलाश रहे अभ्यर्थियों को निशाना बनाता था।
ऑनलाइन नौकरी ठगी से बचने के लिए क्या करें?
पुलिस अधिकारियों ने सलाह दी है कि नौकरी के नाम पर किसी भी प्रकार की फीस — रजिस्ट्रेशन, इंटरव्यू या गेट पास — जमा करने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर प्रस्ताव की सत्यता जांचें। कोई भी वैध कंपनी नौकरी देने के लिए पहले पैसे नहीं माँगती।
राष्ट्र प्रेस
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