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बिहार विधानसभा सदस्यों का दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम गया में संपन्न, संसदीय दक्षता पर रहा फोकस

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बिहार विधानसभा सदस्यों का दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम गया में संपन्न, संसदीय दक्षता पर रहा फोकस

सारांश

बिहार विधानसभा के सदस्यों के लिए गया में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम 12 जुलाई को संपन्न हुआ। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन द्वारा उद्घाटित इस कार्यक्रम में संसदीय परंपराओं, विधायी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सत्ता पक्ष व विपक्ष के सदस्यों ने मिलकर मंथन किया।

मुख्य बातें

बिहार विधानसभा के सदस्यों के लिए बिपार्ड, गया में 11-12 जुलाई को दो दिवसीय आवासीय प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी.पी.
राधाकृष्णन ने 11 जुलाई को किया था।
अंतिम दिन संसदीय परंपराओं, विशेषाधिकार, विधायी प्रक्रिया और संसदीय समितियों पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित हुए।
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और सांसद जगदंबिका पाल सहित कई वरिष्ठ विशेषज्ञों ने सत्रों को संबोधित किया।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ.
प्रेम कुमार ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों ने समान उत्साह से भागीदारी की।
समापन पर गया आयुक्त , जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक सहित कई अधिकारियों को सम्मानित किया गया।

बिहार विधानसभा के सदस्यों के लिए बिहार विधानसभा सचिवालय, बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) और प्राइड (लोकसभा सचिवालय) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय आवासीय 'प्रबोधन कार्यक्रम' 12 जुलाई को गया स्थित बिपार्ड परिसर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन संसदीय परंपराओं, विधायी प्रक्रिया, विशेषाधिकार, नवाचार और संसदीय समितियों की भूमिका पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों व जनप्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। इस कार्यक्रम का उद्घाटन 11 जुलाई को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया था।

दूसरे दिन का कार्यक्रम: वृक्षारोपण से हुई शुरुआत

दूसरे दिन की शुरुआत बिपार्ड परिसर में ब्रह्मयोनि पहाड़ी के निकट वृक्षारोपण से हुई। इसके बाद पहले तकनीकी सत्र में पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने बजट निर्माण, वित्तीय प्रावधानों और विभागीय कार्यप्रणाली पर अपने अनुभव साझा किए। प्राइड के निदेशक पार्थो गोस्वामी ने विधायी प्रक्रिया, सरकारी एवं गैर-सरकारी विधेयकों, बजटीय प्रक्रिया तथा संसदीय समितियों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

विधायक संदीप सौरभ ने प्रश्नकाल की उपयोगिता पर अपने विचार रखे, जबकि विधायक उमेश कुशवाहा ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने विधायी कार्यों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है।

विशेषाधिकार और संसदीय परंपराओं पर मंथन

दूसरे सत्र में उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि जनता का विश्वास ही जनप्रतिनिधियों की सबसे बड़ी पूंजी है और विधायकों को अपने विशेषाधिकारों का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। राज्यसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव राघव प्रसाद दास और पुलिस मुख्यालय के सहायक महानिदेशक (रेल) डॉ. कमल किशोर सिंह ने विशेषाधिकारों और संसदीय परंपराओं के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाया।

संसदीय समितियों और जनहित कानून पर तीसरा सत्र

तीसरे सत्र में सांसद जगदंबिका पाल सहित अन्य वक्ताओं ने संसदीय समितियों की भूमिका, वित्तीय अनुशासन, विधेयकों की समीक्षा और जनहित आधारित कानून निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। विधायक दीपा कुमारी, कमरुल होदा और सतीश कुमार सिंह यादव ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। सभी सत्रों में प्रश्नोत्तर के माध्यम से सदस्यों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया।

विधानसभा अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

समापन समारोह के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि कार्यक्रम में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सदस्यों ने समान उत्साह और गंभीरता के साथ भागीदारी की। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्यप्रणाली, विधायी दायित्व, सदन की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हुए विमर्श से विधायकों की कार्यक्षमता को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान सदन की कार्यवाही की गुणवत्ता को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

समापन अवसर पर विधानसभा उपाध्यक्ष नरेन्द्र नारायण यादव ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर गया की आयुक्त सफीना एएन, पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव, जिलाधिकारी शशांक शुभंकर, वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सहित कई अधिकारियों को सम्मानित किया गया। कृषि मंत्री एवं गया के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम बिहार विधानसभा की संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि सदन में इनका प्रभाव दिखे — प्रश्नकाल की गुणवत्ता, विधेयकों की समीक्षा और समितियों की सक्रियता में। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में विधानसभाओं के सत्रों की अवधि घटती जा रही है और विधायी बहसों की गहराई पर सवाल उठते रहे हैं। बिहार विधानसभा के लिए यह एक सकारात्मक पहल है, पर इसकी सफलता तभी मापी जा सकेगी जब प्रशिक्षित विधायक सदन में अधिक प्रभावी जवाबदेही सुनिश्चित करें।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार विधानसभा का प्रबोधन कार्यक्रम क्या था?
यह बिहार विधानसभा सचिवालय, बिपार्ड और प्राइड (लोकसभा सचिवालय) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम था, जो 11-12 जुलाई को गया स्थित बिपार्ड परिसर में हुआ। इसमें विधायकों को संसदीय प्रक्रिया, विशेषाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रशिक्षित किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन किसने किया?
कार्यक्रम का उद्घाटन 11 जुलाई को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया था। समापन पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया।
कार्यक्रम के अंतिम दिन किन विषयों पर चर्चा हुई?
अंतिम दिन तीन तकनीकी सत्रों में संसदीय परंपराएँ, विधायी प्रक्रिया, सरकारी एवं गैर-सरकारी विधेयक, बजटीय प्रक्रिया, विशेषाधिकार, नवाचार और संसदीय समितियों की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन से प्रमुख वक्ता शामिल हुए?
कार्यक्रम में पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, सांसद जगदंबिका पाल, प्राइड निदेशक पार्थो गोस्वामी और राज्यसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव राघव प्रसाद दास सहित कई विशेषज्ञ शामिल हुए।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यक्रम के बारे में क्या कहा?
बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों ने समान उत्साह और गंभीरता से भागीदारी की। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान सदन की कार्यवाही की गुणवत्ता और जनप्रतिनिधियों के दायित्व निर्वहन को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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