बिहार राज्यपाल सैयद अता हसनैन बोले — विधायकों को तकनीक और संविधान की गहरी समझ जरूरी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने 11 जुलाई को गया में स्पष्ट कहा कि तेज़ी से बदलती दुनिया में जनप्रतिनिधियों के लिए निरंतर प्रशिक्षण और ज्ञान-विस्तार अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। उन्होंने कहा कि बिना प्रशिक्षण के न तो ज्ञान में वृद्धि संभव है और न ही कोई व्यक्ति अपनी आकांक्षाओं को पूरी तरह साकार कर सकता है।
कार्यक्रम का संदर्भ
गया स्थित बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (बिपार्ड) में बिहार विधानसभा के सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर राज्यपाल ने यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण हर क्षेत्र में आवश्यक है और विधायक लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
राज्यपाल का मुख्य संदेश
राज्यपाल हसनैन ने कहा कि केवल विधायी प्रक्रियाओं की जानकारी अब पर्याप्त नहीं रही — तकनीक, प्रशासन, संवैधानिक विषयों और समसामयिक मुद्दों की समझ भी उतनी ही ज़रूरी हो गई है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आधुनिक तकनीक शासन-प्रशासन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है और जनप्रतिनिधियों को इसका समुचित ज्ञान होना चाहिए ताकि वे अपनी ज़िम्मेदारियों का बेहतर निर्वहन कर सकें।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का संबोधन
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कार्यक्रम में बदलती तकनीक और उसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विधानसभा सदस्य के रूप में दायित्वों को समझने के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों का ज्ञान भी आवश्यक है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें संसद के विभिन्न मंचों पर जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद, तकनीक और विदेश मामलों जैसे विषयों पर अपनी बात रखने का अवसर मिला है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संसदीय समितियों में गहन अध्ययन और व्यापक जानकारी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
गया की आध्यात्मिक विरासत से जोड़
मुख्यमंत्री ने गया की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वह भूमि है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान का संदेश दिया था। ऐसी पवित्र धरती पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का विशेष महत्व है और यहाँ अर्जित ज्ञान जनप्रतिनिधियों के सार्वजनिक जीवन को और समृद्ध करेगा।
राज्यपाल की अपील और आगे की राह
राज्यपाल हसनैन ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि भविष्य में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्हें भी पूर्व सूचना देकर आमंत्रित किया जाए। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी संवैधानिक विषयों पर और अधिक सीखना चाहते हैं तथा विधायकों के साथ विचार-विमर्श उनके लिए भी सीखने का अवसर होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि ज्ञान और प्रशिक्षण के ज़रिये जनप्रतिनिधि बिहार और देश के विकास में और अधिक प्रभावी योगदान देंगे।