राम मंदिर चढ़ावा विवाद: मंत्री मनोज पांडे बोले — एसआईटी जांच जारी, सच जल्द आएगा सामने
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे ने 12 जुलाई को प्रतापगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच एक उच्चस्तरीय एसआईटी कर रही है और जल्द ही पूरा सच जनता के सामने आएगा। उन्होंने कहा कि चूंकि मामला जांच के अधीन है, इसलिए वे फिलहाल कोई विस्तृत टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं।
मुख्यमंत्री योगी का आश्वासन और त्वरित कार्रवाई
मंत्री पांडे ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में कहा था कि 'दूध का दूध और पानी का पानी होगा।' उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 10 दिन का समय माँगा था, लेकिन सातवें दिन ही दोषियों को जेल भेज दिया गया — जो सरकार की कार्रवाई की तत्परता को दर्शाता है।
अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए पांडे ने कहा कि उन्हें पहले अपने मुख्यमंत्री काल में हुई जांचों का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने मथुरा की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी ज़मीन खाली कराने गई पुलिस पर हमला हुआ था, जिसमें एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर को घसीटकर मार डाला गया और एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। पांडे ने कहा कि उस मामले की जांच के नतीजे अखिलेश यादव को जनता और मीडिया के सामने रखने चाहिए।
राम मंदिर पर आस्था और राजनीतिक विवाद
मंत्री ने कहा कि वे राम मंदिर को उसी दृष्टि से देखते हैं जैसे भारत के 100 करोड़ सनातनी अनुयायी देखते हैं — यह भगवान श्री राम का भव्य और पूजनीय स्थल है। उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर बताया।
विपक्ष पर तीखा प्रहार
अखिलेश यादव के 'वसूली' संबंधी बयान पर पांडे ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता किस वसूली की बात हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ नेताओं ने राम मंदिर स्थल पर निहत्थे राम भक्तों पर गोलियाँ चलवाईं, राम मंदिर निर्माण में एक पैसा नहीं दिया, और अपने वकीलों के ज़रिए उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय में राम मंदिर के अस्तित्व को नकारते रहे। पांडे ने इसे 'सनातन धर्म और राष्ट्र को कमज़ोर करने का सुनियोजित षड्यंत्र' करार दिया और कहा कि इसका पर्दाफाश हो चुका है।
आगे क्या होगा
एसआईटी की जांच जारी है और सरकार के अनुसार निष्कर्ष जल्द सार्वजनिक किए जाएंगे। यह विवाद अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के बीच राजनीतिक रूप से तीखा मोड़ ले चुका है, और आने वाले दिनों में विपक्ष व सत्ता पक्ष के बीच इस मुद्दे पर और टकराव की संभावना है।