नोएडा में फर्जी लोन कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 'ऑपरेशन साइबर वज्र' में पाँच गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के फेस-1 थाने की पुलिस ने 11 जुलाई 2026 को लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से सेक्टर-2, डी-80 स्थित एक इमारत की पहली मंजिल पर संचालित फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी कम ब्याज दर पर तत्काल लोन दिलाने का झाँसा देकर पीड़ितों से प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ऑनलाइन ठगी करते थे और बाद में न लोन देते थे, न पैसे लौटाते थे।
ऑपरेशन साइबर वज्र: कैसे हुई कार्रवाई
पुलिस के अनुसार यह छापेमारी 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत की गई। इस अभियान में थाना स्तर पर प्राप्त करीब 159 संदिग्ध बैंक खातों का विश्लेषण किया गया। विभिन्न बैंकों के 19 रेड जोन और हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए और करीब 2,500 मोबाइल नंबरों तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों की जाँच की गई। जाँच में सेक्टर-2 स्थित कॉल सेंटर की गतिविधियाँ संदिग्ध पाई गईं, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की।
गिरफ्तार आरोपी और उनकी पहचान
पकड़े गए पाँचों आरोपियों की पहचान पवन कुमार (मूल निवासी बुलंदशहर, निवास सेक्टर-27 नोएडा), मोहित (मूल निवासी बागपत, निवास मयूर विहार फेस-1), हर्ष शर्मा (मूल निवासी मुजफ्फरनगर, निवास सेक्टर-66 ममूरा), स्वाती (सेक्टर-135 नोएडा) और प्रीती (सेक्टर-26 नोएडा) के रूप में हुई है।
ठगी का तरीका: डेटा से लेकर OTP तक
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पहले उन लोगों का डेटा एकत्र करते थे जिन्हें लोन की ज़रूरत होती थी। इसके बाद कॉल सेंटर से उन्हें कम ब्याज दर पर तुरंत लोन दिलाने का भरोसा दिलाया जाता था। विश्वास जीतने के बाद प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ऑनलाइन भुगतान कराया जाता था और साथ ही आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी व OTP भी हासिल कर लिए जाते थे। एक बार फीस मिलने के बाद न लोन दिया जाता था, न रकम वापस की जाती थी।
बरामदगी और जाँच का दायरा
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पाँच मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, छह चेकबुक, एक पासबुक, 160 कॉलिंग डेटा शीट, 11 स्क्रिप्ट बुक, एक बिलिंग बुक और एक इंटरनेट राउटर बरामद किया है। प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि इस गिरोह के खिलाफ NCRP पर विभिन्न राज्यों से 10 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं और आरोपियों ने देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया है।
आगे क्या होगा
पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों की भी जाँच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जाँच जारी है और गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह मामला उस बढ़ते साइबर अपराध के रुझान की ओर इशारा करता है जिसमें लोन की ज़रूरतमंद आबादी को निशाना बनाया जाता है।