11 जुलाई 2026
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नोएडा में फर्जी लोन कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 'ऑपरेशन साइबर वज्र' में पाँच गिरफ्तार

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नोएडा में फर्जी लोन कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 'ऑपरेशन साइबर वज्र' में पाँच गिरफ्तार

सारांश

नोएडा पुलिस ने 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत सेक्टर-2 में चल रहे फर्जी लोन कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया और पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी लोन की ज़रूरतमंद लोगों से प्रोसेसिंग फीस ठगते थे और उनके आधार, पैन व OTP भी हड़प लेते थे। देशभर में करोड़ों की ठगी का अनुमान है।

मुख्य बातें

नोएडा फेस-1 थाना पुलिस ने 11 जुलाई 2026 को सेक्टर-2, डी-80 स्थित फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारा।
पाँच आरोपी — पवन कुमार, मोहित, हर्ष शर्मा, स्वाती और प्रीती — गिरफ्तार।
आरोपी कम ब्याज पर लोन का झाँसा देकर प्रोसेसिंग फीस, आधार, पैन और OTP ठगते थे।
NCRP पर विभिन्न राज्यों से 10 से अधिक शिकायतें दर्ज; करोड़ों रुपये की ठगी का अनुमान।
बरामदगी में 5 मोबाइल, 3 लैपटॉप, 160 कॉलिंग डेटा शीट, 11 स्क्रिप्ट बुक शामिल।
पुलिस अब 159 संदिग्ध बैंक खातों और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की जाँच कर रही है।

नोएडा के फेस-1 थाने की पुलिस ने 11 जुलाई 2026 को लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से सेक्टर-2, डी-80 स्थित एक इमारत की पहली मंजिल पर संचालित फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी कम ब्याज दर पर तत्काल लोन दिलाने का झाँसा देकर पीड़ितों से प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ऑनलाइन ठगी करते थे और बाद में न लोन देते थे, न पैसे लौटाते थे।

ऑपरेशन साइबर वज्र: कैसे हुई कार्रवाई

पुलिस के अनुसार यह छापेमारी 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत की गई। इस अभियान में थाना स्तर पर प्राप्त करीब 159 संदिग्ध बैंक खातों का विश्लेषण किया गया। विभिन्न बैंकों के 19 रेड जोन और हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए और करीब 2,500 मोबाइल नंबरों तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों की जाँच की गई। जाँच में सेक्टर-2 स्थित कॉल सेंटर की गतिविधियाँ संदिग्ध पाई गईं, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की।

गिरफ्तार आरोपी और उनकी पहचान

पकड़े गए पाँचों आरोपियों की पहचान पवन कुमार (मूल निवासी बुलंदशहर, निवास सेक्टर-27 नोएडा), मोहित (मूल निवासी बागपत, निवास मयूर विहार फेस-1), हर्ष शर्मा (मूल निवासी मुजफ्फरनगर, निवास सेक्टर-66 ममूरा), स्वाती (सेक्टर-135 नोएडा) और प्रीती (सेक्टर-26 नोएडा) के रूप में हुई है।

ठगी का तरीका: डेटा से लेकर OTP तक

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पहले उन लोगों का डेटा एकत्र करते थे जिन्हें लोन की ज़रूरत होती थी। इसके बाद कॉल सेंटर से उन्हें कम ब्याज दर पर तुरंत लोन दिलाने का भरोसा दिलाया जाता था। विश्वास जीतने के बाद प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ऑनलाइन भुगतान कराया जाता था और साथ ही आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारीOTP भी हासिल कर लिए जाते थे। एक बार फीस मिलने के बाद न लोन दिया जाता था, न रकम वापस की जाती थी।

बरामदगी और जाँच का दायरा

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पाँच मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, छह चेकबुक, एक पासबुक, 160 कॉलिंग डेटा शीट, 11 स्क्रिप्ट बुक, एक बिलिंग बुक और एक इंटरनेट राउटर बरामद किया है। प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि इस गिरोह के खिलाफ NCRP पर विभिन्न राज्यों से 10 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं और आरोपियों ने देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया है।

आगे क्या होगा

पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों की भी जाँच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जाँच जारी है और गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह मामला उस बढ़ते साइबर अपराध के रुझान की ओर इशारा करता है जिसमें लोन की ज़रूरतमंद आबादी को निशाना बनाया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित अखिल-भारतीय नेटवर्क है। सवाल यह है कि 159 संदिग्ध बैंक खाते और 2,500 मोबाइल नंबर इतने समय तक निगरानी से कैसे बचे रहे। जब तक डिजिटल वित्तीय साक्षरता और त्वरित कानूनी कार्रवाई साथ-साथ नहीं चलती, ऐसे गिरोह नए नाम और नए पते से फिर उठ खड़े होंगे।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा के फर्जी लोन कॉल सेंटर में क्या होता था?
यह कॉल सेंटर लोन की ज़रूरत रखने वाले लोगों को कम ब्याज दर पर तत्काल लोन दिलाने का झाँसा देता था। भरोसा जीतने के बाद प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ऑनलाइन भुगतान कराया जाता था और आधार, पैन व OTP भी हड़प लिए जाते थे — लेकिन न लोन मिलता था, न पैसे वापस होते थे।
'ऑपरेशन साइबर वज्र' क्या है?
'ऑपरेशन साइबर वज्र' नोएडा पुलिस का साइबर अपराध-विरोधी अभियान है। इसके तहत 159 संदिग्ध बैंक खातों, 19 रेड जोन, 2,500 मोबाइल नंबरों और NCRP शिकायतों का विश्लेषण कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की गई, जिसके बाद सेक्टर-2 के कॉल सेंटर पर छापा मारा गया।
इस मामले में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और वे कौन हैं?
पुलिस ने पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया है — पवन कुमार (बुलंदशहर), मोहित (बागपत), हर्ष शर्मा (मुजफ्फरनगर), स्वाती और प्रीती (दोनों नोएडा निवासी)। सभी नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों में रह रहे थे।
इस साइबर ठगी से कितने लोग प्रभावित हुए?
NCRP पर विभिन्न राज्यों से 10 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि गिरोह ने देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी की है, हालाँकि पुलिस अभी बैंक खातों और लेन-देन की विस्तृत जाँच कर रही है।
पुलिस ने कॉल सेंटर से क्या बरामद किया?
पुलिस ने पाँच मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, छह चेकबुक, एक पासबुक, 160 कॉलिंग डेटा शीट, 11 स्क्रिप्ट बुक, एक बिलिंग बुक और एक इंटरनेट राउटर बरामद किया है। ये सभी सामग्री ठगी के संचालन में इस्तेमाल की जाती थी।
राष्ट्र प्रेस
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