25 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ग्रेटर नोएडा: फर्जी कॉल सेंटर से लोन का झांसा देकर ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार; मोबाइल-डायरी बरामद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ग्रेटर नोएडा: फर्जी कॉल सेंटर से लोन का झांसा देकर ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार; मोबाइल-डायरी बरामद

सारांश

ग्रेटर नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर से लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार। लोन ऐप का डेटा चुराकर पीड़ितों को फर्जी अप्रूवल लेटर भेजते थे, फिर रकम उड़ा लेते थे। गिरोह का तीसरा सदस्य अभी भी फरार है।

मुख्य बातें

थाना बिसरख पुलिस ने 9 जुलाई 2025 को अजनारा ली गार्डन सोसाइटी, ग्रेटर नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारा।
गिरफ्तार आरोपी: सागर चौहान (23 वर्ष) , इंद्रापुरम, गाजियाबाद और कुलदीप (25 वर्ष) , ग्राम बरौली, मथुरा।
आरोपी लोन112 ऐप व अन्य लोन ऐप से ग्राहकों का डेटा चुराकर फर्जी लोन अप्रूवल लेटर भेजते थे।
ठगी की रकम फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी; तीसरा सदस्य 20% कमीशन लेकर बाकी नकद पहुंचाता था।
बरामदगी: 3 मोबाइल फोन और 1 डायरी ; बीएनएस व आईटी एक्ट धारा 66-डी के तहत मामला दर्ज।

थाना बिसरख पुलिस ने 9 जुलाई 2025 को ग्रेटर नोएडा की अजनारा ली गार्डन सोसाइटी में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। आरोपी लोगों को अधिक लोन दिलाने का लालच देकर फर्जी बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करा लेते थे। पुलिस ने इनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन और एक डायरी बरामद की है।

मुख्य घटनाक्रम

साइबर ठगी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत लोकल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर बुधवार को अजनारा ली गार्डन सोसाइटी के एक फ्लैट में छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में 23 वर्षीय सागर चौहान, निवासी न्याय खंड-1, इंद्रापुरम, गाजियाबाद और 25 वर्षीय कुलदीप, निवासी ग्राम बरौली, थाना बल्देव, जनपद मथुरा को मौके पर दबोचा गया।

दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना बिसरख में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ठगी का तरीका

प्रारंभिक जांच के अनुसार, दोनों आरोपी लोन112 ऐप और अन्य लोन ऐप से जुड़े ग्राहकों का डेटा हासिल करते थे। इसके बाद उन लोगों को फोन कर अधिक राशि का लोन दिलाने का भरोसा दिलाया जाता था। विश्वास जीतने के लिए फर्जी लोन अप्रूवल लेटर भेजे जाते थे।

जैसे ही पीड़ित इनके जाल में फंसता, पहले से लिए गए लोन को बंद कराने या नई प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर रकम फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करा ली जाती थी। ठगी के बाद आरोपी इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट कर देते थे, ताकि कोई सुराग न बचे।

गिरोह का नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि इस गिरोह से एक अन्य व्यक्ति भी जुड़ा है, जो फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। वह ठगी की रकम में से 20 प्रतिशत कमीशन अपने पास रखता था और शेष 80 प्रतिशत नकद नोएडा के विभिन्न स्थानों पर आरोपियों तक पहुंचाता था। आरोपी उससे केवल व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से संपर्क करते थे और उसके पास कोई स्थायी मोबाइल नंबर नहीं था।

आगे की जांच

पुलिस अब इस साइबर ठगी गिरोह के अन्य सदस्यों, फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों और डेटा सप्लाई करने वाले नेटवर्क की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। बरामद तीन मोबाइल फोन और डायरी की फॉरेंसिक जांच भी शुरू कर दी गई है। यह मामला उस बड़े ऑनलाइन लोन-फ्रॉड नेटवर्क की ओर इशारा करता है जो देश के कई शहरों में सक्रिय बताया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो लोन ऐप के कमज़ोर डेटा-सुरक्षा ढांचे का फायदा उठाकर पनप रहा है। असली सवाल यह है कि लोन112 जैसे ऐप उपयोगकर्ताओं का डेटा तीसरे पक्ष तक कैसे पहुंच रहा है — और इसकी जवाबदेही किस पर है। जब तक डेटा-लीक के स्रोत की जांच नहीं होती, केवल कॉल सेंटर ऑपरेटरों की गिरफ्तारी से इस नेटवर्क की जड़ें नहीं कटेंगी। फरार तीसरे सदस्य तक पहुंचना इस जांच की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर नोएडा में फर्जी लोन कॉल सेंटर कैसे काम करता था?
आरोपी लोन ऐप से ग्राहकों का डेटा हासिल कर उन्हें अधिक लोन दिलाने का लालच देते थे। फर्जी लोन अप्रूवल लेटर भेजकर विश्वास जीतते थे, फिर प्रक्रिया शुल्क के नाम पर रकम फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करा लेते थे।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उन पर क्या धाराएं लगाई गई हैं?
गिरफ्तार आरोपियों में सागर चौहान (23 वर्ष), इंद्रापुरम, गाजियाबाद और कुलदीप (25 वर्ष), ग्राम बरौली, मथुरा शामिल हैं। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस साइबर ठगी में तीसरे सदस्य की क्या भूमिका थी?
तीसरा सदस्य फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। वह ठगी की रकम में से 20 प्रतिशत कमीशन रखता था और शेष 80 प्रतिशत नकद नोएडा के विभिन्न स्थानों पर आरोपियों तक पहुंचाता था। वह अभी भी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
आरोपी पुलिस से बचने के लिए क्या तरीके अपनाते थे?
ठगी के बाद आरोपी इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट कर देते थे। तीसरे सदस्य से केवल व्हाट्सएप कॉल के ज़रिए संपर्क किया जाता था और उसके पास कोई स्थायी मोबाइल नंबर नहीं था।
इस मामले में पुलिस की आगे की जांच किस दिशा में है?
पुलिस अब गिरोह के फरार सदस्यों, फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों और लोन ऐप डेटा सप्लाई करने वाले नेटवर्क की पहचान में जुटी है। बरामद तीन मोबाइल फोन और डायरी की फॉरेंसिक जांच भी शुरू कर दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले