4 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोलकाता में फर्जी कॉल सेंटर रैकेट का भंडाफोड़, 41 महिलाओं समेत 67 गिरफ्तार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोलकाता में फर्जी कॉल सेंटर रैकेट का भंडाफोड़, 41 महिलाओं समेत 67 गिरफ्तार

सारांश

दक्षिण कोलकाता में पुलिस की दो ताबड़तोड़ छापेमारियों ने एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी नेटवर्क को उजागर किया — जहां स्क्रिप्टेड कॉल, नकली प्राधिकरण पत्र और 100 से अधिक म्यूल खातों के जरिए पूरे देश में लोगों को ठगा जा रहा था। 41 महिलाओं समेत 67 गिरफ्तारियां इस रैकेट की व्यापकता की गवाह हैं।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल पुलिस ने 2-3 सितंबर 2026 को राजडांगा मेन रोड, कोलकाता पर दो फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया।
कुल 67 लोग गिरफ्तार , जिनमें 41 महिलाएं शामिल हैं।
जब्त सामग्री में 71 मोबाइल फोन , डायरी, रजिस्टर, ₹16,000 नकद और दो एटीएम कार्ड शामिल।
रैकेट ने पिछले छह महीनों में कथित तौर पर लगभग 100 बैंक खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया।
मुख्य संचालक के रूप में नयाबाद निवासी संदीप बनर्जी की पहचान; अज्ञात सहयोगियों की तलाश जारी।
आरोपियों पर IT अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने 3 सितंबर 2026 को दक्षिण कोलकाता के कस्बा इलाके में राजडांगा मेन रोड पर चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया और देशव्यापी वित्तीय धोखाधड़ी रैकेट में कथित संलिप्तता के आरोप में 67 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें 41 महिलाएं शामिल हैं। लगातार दो छापेमारियों में की गई ये गिरफ्तारियां एक गुप्त सूचना पर आधारित थीं।

छापेमारी का घटनाक्रम

पुलिस ने 2 सितंबर को पहली बार राजडांगा मेन रोड स्थित एक कार्यालयनुमा परिसर पर छापा मारा, जहां से कई लोग देशभर के नागरिकों को कॉल कर रहे थे। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने 39 मोबाइल फोन, नौ चार्जर, नौ डायरी, दो एटीएम डेबिट कार्ड और ₹16,000 नकद जब्त किए।

पूछताछ के दौरान पुलिस को उसी सड़क पर एक अन्य इमारत की पहली मंजिल से संचालित दूसरे ऐसे ही ऑपरेशन की जानकारी मिली। दूसरी छापेमारी में 27 और लोगों को हिरासत में लिया गया — जिनमें 18 महिलाएं और नौ पुरुष शामिल थे — तथा 32 मोबाइल फोन और चार रजिस्टर जब्त किए गए।

धोखाधड़ी का तरीका

शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर लोगों को 5जी मोबाइल टावर लगाने, अधिक रिटर्न वाली बीमा योजनाओं, स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों और कम ब्याज दर के ऋण का लालच देते थे। पीड़ितों को प्रोसेसिंग शुल्क और अन्य चार्ज के नाम पर निर्धारित बैंक खातों में राशि स्थानांतरित करने के लिए राजी किया जाता था।

जांचकर्ताओं को संदेह है कि ये खाते 'म्यूल अकाउंट' के रूप में काम करते थे — यानी धोखाधड़ी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए उपयोग किए जाने वाले खाते। पुलिस के अनुमान के अनुसार, इस रैकेट ने पिछले छह महीनों में लगभग 100 बैंक खातों का इस्तेमाल किया। आरोपियों पर बैंकों, संगठनों और सरकारी एजेंसियों के नाम पर नकली प्राधिकरण पत्र इस्तेमाल करने का भी संदेह है।

जब्त साक्ष्य और स्क्रिप्टेड ठगी

छापे के दौरान मिली डायरी और लेजर में संभावित शिकार बनाए जाने वाले लोगों की जानकारी और उन्हें पैसे ट्रांसफर करने के लिए मनाने हेतु तैयार की गई बातचीत की पूर्व-लिखित स्क्रिप्ट भी मिली। गौरतलब है कि जांचकर्ताओं का मानना है कि यह कॉल सेंटर पहले पटुली इलाके से संचालित होता था और करीब एक महीने पहले राजडांगा मेन रोड पर स्थानांतरित हुआ था।

मुख्य आरोपी और कानूनी कार्रवाई

जांचकर्ताओं के अनुसार, दोनों कॉल सेंटर कथित तौर पर नयाबाद निवासी संदीप बनर्जी और उनके अज्ञात सहयोगियों द्वारा चलाए जा रहे थे। सभी 67 आरोपियों पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस अब इस व्यापक नेटवर्क की जांच में जुटी है — जिसमें अन्य साजिशकर्ताओं की पहचान और धोखाधड़ी से हड़पी गई कुल राशि का अनुमान लगाना शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस रैकेट ने छह महीनों में जिन 100 बैंक खातों का इस्तेमाल किया, वे खाते किसने खुलवाए और क्यों — यह KYC प्रणाली की विफलता की ओर इशारा करता है। स्क्रिप्टेड कॉल और नकली प्राधिकरण पत्र यह दर्शाते हैं कि यह महज एक स्थानीय ऑपरेशन नहीं, बल्कि एक सुसंगठित साइबर अपराध उद्योग का हिस्सा है। मुख्य संचालक संदीप बनर्जी की पहचान हो चुकी है, लेकिन 'अज्ञात साथियों' की कड़ी तब तक अधूरी रहेगी जब तक धन का पूरा प्रवाह उजागर न हो। असली परीक्षा अब न्यायिक प्रक्रिया की होगी — क्या ये गिरफ्तारियां सिर्फ ऑपरेटरों तक सीमित रहेंगी या नेटवर्क के सरगनाओं तक पहुंचेंगी।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में फर्जी कॉल सेंटर रैकेट क्या था?
यह दक्षिण कोलकाता के राजडांगा मेन रोड पर संचालित दो फर्जी कॉल सेंटरों का नेटवर्क था, जहां आरोपी टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर देशभर के लोगों को 5जी टावर, बीमा योजनाओं और सस्ते ऋण का लालच देकर ठगते थे। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 2-3 सितंबर 2026 को इसका भंडाफोड़ किया।
इस रैकेट में कितने लोग गिरफ्तार हुए और कौन थे?
कुल 67 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 41 महिलाएं शामिल हैं। पहली छापेमारी में 40 और दूसरी में 27 लोगों को हिरासत में लिया गया। मुख्य संचालक के रूप में नयाबाद निवासी संदीप बनर्जी की पहचान हुई है, जबकि उनके अज्ञात सहयोगियों की तलाश जारी है।
आरोपियों ने पीड़ितों से ठगी कैसे की?
आरोपी पूर्व-लिखित स्क्रिप्ट के जरिए कॉल करते थे और नकली प्राधिकरण पत्रों का उपयोग कर भरोसा जीतते थे। इसके बाद पीड़ितों को प्रोसेसिंग शुल्क या अन्य चार्ज के नाम पर निर्धारित बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मनाया जाता था, जो कथित तौर पर म्यूल अकाउंट के रूप में काम करते थे।
म्यूल अकाउंट क्या होता है और इस मामले में इसका क्या रोल था?
म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। जांचकर्ताओं के अनुसार, इस रैकेट ने पिछले छह महीनों में लगभग 100 ऐसे खातों का इस्तेमाल किया, जिससे धन का पता लगाना कठिन हो जाता है।
आरोपियों पर कौन-सी धाराएं लगाई गई हैं और आगे क्या होगा?
सभी 67 आरोपियों पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब नेटवर्क के अन्य साजिशकर्ताओं की पहचान और धोखाधड़ी से हड़पी गई कुल राशि का अनुमान लगाने की जांच कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले