कोलकाता में फर्जी कॉल सेंटर रैकेट का भंडाफोड़, 41 महिलाओं समेत 67 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस ने 3 सितंबर 2026 को दक्षिण कोलकाता के कस्बा इलाके में राजडांगा मेन रोड पर चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया और देशव्यापी वित्तीय धोखाधड़ी रैकेट में कथित संलिप्तता के आरोप में 67 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें 41 महिलाएं शामिल हैं। लगातार दो छापेमारियों में की गई ये गिरफ्तारियां एक गुप्त सूचना पर आधारित थीं।
छापेमारी का घटनाक्रम
पुलिस ने 2 सितंबर को पहली बार राजडांगा मेन रोड स्थित एक कार्यालयनुमा परिसर पर छापा मारा, जहां से कई लोग देशभर के नागरिकों को कॉल कर रहे थे। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने 39 मोबाइल फोन, नौ चार्जर, नौ डायरी, दो एटीएम डेबिट कार्ड और ₹16,000 नकद जब्त किए।
पूछताछ के दौरान पुलिस को उसी सड़क पर एक अन्य इमारत की पहली मंजिल से संचालित दूसरे ऐसे ही ऑपरेशन की जानकारी मिली। दूसरी छापेमारी में 27 और लोगों को हिरासत में लिया गया — जिनमें 18 महिलाएं और नौ पुरुष शामिल थे — तथा 32 मोबाइल फोन और चार रजिस्टर जब्त किए गए।
धोखाधड़ी का तरीका
शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर लोगों को 5जी मोबाइल टावर लगाने, अधिक रिटर्न वाली बीमा योजनाओं, स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों और कम ब्याज दर के ऋण का लालच देते थे। पीड़ितों को प्रोसेसिंग शुल्क और अन्य चार्ज के नाम पर निर्धारित बैंक खातों में राशि स्थानांतरित करने के लिए राजी किया जाता था।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि ये खाते 'म्यूल अकाउंट' के रूप में काम करते थे — यानी धोखाधड़ी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए उपयोग किए जाने वाले खाते। पुलिस के अनुमान के अनुसार, इस रैकेट ने पिछले छह महीनों में लगभग 100 बैंक खातों का इस्तेमाल किया। आरोपियों पर बैंकों, संगठनों और सरकारी एजेंसियों के नाम पर नकली प्राधिकरण पत्र इस्तेमाल करने का भी संदेह है।
जब्त साक्ष्य और स्क्रिप्टेड ठगी
छापे के दौरान मिली डायरी और लेजर में संभावित शिकार बनाए जाने वाले लोगों की जानकारी और उन्हें पैसे ट्रांसफर करने के लिए मनाने हेतु तैयार की गई बातचीत की पूर्व-लिखित स्क्रिप्ट भी मिली। गौरतलब है कि जांचकर्ताओं का मानना है कि यह कॉल सेंटर पहले पटुली इलाके से संचालित होता था और करीब एक महीने पहले राजडांगा मेन रोड पर स्थानांतरित हुआ था।
मुख्य आरोपी और कानूनी कार्रवाई
जांचकर्ताओं के अनुसार, दोनों कॉल सेंटर कथित तौर पर नयाबाद निवासी संदीप बनर्जी और उनके अज्ञात सहयोगियों द्वारा चलाए जा रहे थे। सभी 67 आरोपियों पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस अब इस व्यापक नेटवर्क की जांच में जुटी है — जिसमें अन्य साजिशकर्ताओं की पहचान और धोखाधड़ी से हड़पी गई कुल राशि का अनुमान लगाना शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है।