क्या कोलकाता में मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ? 1 करोड़ नकद और लग्जरी गाड़ियां जब्त

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क्या कोलकाता में मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ? 1 करोड़ नकद और लग्जरी गाड़ियां जब्त

सारांश

कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय ने एक संगठित मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में लाखों की नकदी और लग्जरी गाड़ियां जब्त की गई हैं। जानिए इस रैकेट के पीछे के राज और इसका असर समाज पर।

Key Takeaways

  • कोलकाता में मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ हुआ।
  • ईडी ने १.०१ करोड़ रुपए की नकदी जब्त की।
  • लोगों को नौकरी के झूठे वादों से फंसाया जाता था।
  • जांच में कई आरोपी शामिल हैं।
  • मामले में आगे की जांच जारी है।

कोलकाता, ८ नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कोलकाता जोनल यूनिट ने शुक्रवार को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी की। यह कार्रवाई एक संगठित अनैतिक मानव तस्करी रैकेट की जांच के सिलसिले में की गई, जो मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में बार-कम-रेस्टोरेंट और डांस बारों के माध्यम से संचालित हो रहा था।

जांच में पता चला है कि आरोपी कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं को नौकरी के झूठे वादों का सहारा लेकर फंसाकर वेश्यावृत्ति में धकेलते थे और इस धंधे से भारी मात्रा में काले धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का निर्माण करते थे।

ईडी ने जिन मुख्य आरोपियों की पहचान की है, उनमें जगजीत सिंह, अजमल सिद्दीकी, विष्णु मुंद्रा और उनके सहयोगी शामिल हैं। यह जांच कई एफआईआर पर आधारित है, जो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), आर्म्स एक्ट, १९५९ और अनैतिक तस्करी निवारण अधिनियम, १९८६ के तहत दर्ज की गई थी। इन धाराओं के तहत दर्ज अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), २००२ की अनुसूचित अपराधों की श्रेणी में आते हैं। पश्चिम बंगाल पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की है, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।

ईडी की जांच में सामने आया कि उपरोक्त आरोपी और उनके नेटवर्क ने एक संगठित रैकेट खड़ा कर रखा था, जिसके तहत वे अपने नियंत्रण वाले बार-कम-रेस्टोरेंट्स के जरिए मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति का कारोबार चलाते थे। इन स्थानों पर गरीब और असहाय महिलाओं को नौकरी के नाम पर बुलाया जाता था और फिर उन्हें दबाव डालकर इस अवैध काम में शामिल किया जाता था। इस धंधे से प्राप्त नकद राशि को आरोपी अपनी कई कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए सफेद करते थे।

छापेमारी के दौरान ईडी ने १.०१ करोड़ रुपए की नकदी, कई डिजिटल उपकरण और बड़ी मात्रा में संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके अलावा, आरोपियों से जुड़े कई बैंक खातों का पता लगाया गया है। जांच के दौरान दो लग्जरी गाड़ियां भी पीएमएलए के प्रावधानों के तहत जब्त की गई हैं।

ईडी को डांस बारों से प्लास्टिक नोट भी मिले हैं, जिनका उपयोग इन अनैतिक गतिविधियों में भुगतान के लिए किया जा रहा था। एजेंसी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है और मानव तस्करी तथा मनी लॉन्ड्रिंग के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं का भी पता लगाया जा रहा है।

Point of View

NationPress
18/01/2026

Frequently Asked Questions

ईडी ने छापेमारी क्यों की?
ईडी ने मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट की जांच के सिलसिले में छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान क्या-क्या जब्त किया गया?
छापेमारी के दौरान १.०१ करोड़ रुपए की नकदी, डिजिटल उपकरण और कई लग्जरी गाड़ियां जब्त की गईं।
यह रैकेट किस तरह से काम कर रहा था?
यह रैकेट बार-कम-रेस्टोरेंट और डांस बारों के माध्यम से कमजोर महिलाओं को नौकरी के झूठे वादों से फंसाकर वेश्यावृत्ति में धकेलता था।
क्या इस मामले में आगे की जांच चल रही है?
हाँ, ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
इस रैकेट के प्रमुख आरोपी कौन हैं?
प्रमुख आरोपियों में जगजीत सिंह, अजमल सिद्दीकी और विष्णु मुंद्रा शामिल हैं।
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