ईंधन मूल्य वृद्धि पर सिद्दारमैया का केंद्र पर पलटवार: 'मीडिया उनसे क्यों नहीं पूछता?'

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ईंधन मूल्य वृद्धि पर सिद्दारमैया का केंद्र पर पलटवार: 'मीडिया उनसे क्यों नहीं पूछता?'

सारांश

कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया ने ईंधन टैक्स घटाने से साफ इनकार करते हुए केंद्र पर पलटवार किया — मनमोहन काल में पेट्रोल ₹70 और डीजल ₹48 का हवाला देकर पूछा: 'इन्हें किसने बढ़ाया?' लेकिन राहत के सवाल पर वे चुप रहे।

मुख्य बातें

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 21 मई को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम नहीं करेगी।
उन्होंने केंद्र सरकार पर ईंधन कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया और मीडिया से पूछा कि केंद्र से सवाल क्यों नहीं किए जाते।
मनमोहन सिंह के कार्यकाल में डीजल ₹48/लीटर , पेट्रोल ₹70/लीटर और एलपीजी ₹414 था — सिद्दारमैया ने यह तुलना केंद्र को घेरने के लिए की।
ईंधन राहत के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया।
इसी दिन विधान सौधा में आतंकवाद विरोधी दिवस पर शपथ समारोह आयोजित हुआ, जिसमें गृह मंत्री जी.
परमेश्वर और मुख्य सचिव शालिनी रजनीश शामिल हुए।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 21 मई को बेंगलुरु में स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए टैक्स में कोई कटौती नहीं करेगी। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर ईंधन की कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाते हुए मीडिया से सवाल किया कि इस मुद्दे पर केंद्र से जवाब क्यों नहीं माँगा जाता।

मुख्यमंत्री का सीधा पलटवार

पत्रकारों के सवालों के जवाब में सिद्दारमैया ने कहा, 'वे (केंद्र सरकार) ईंधन की कीमतें बढ़ाएंगे, और क्या हमें उन्हें कम करना चाहिए? मीडिया इस मुद्दे पर उनसे सवाल क्यों नहीं करता? इसके बजाय मीडिया हमसे ही पूछता रहता है कि क्या हम कीमतें कम करेंगे।' जब पत्रकारों ने यह कहा कि राज्य सरकार ने भी ईंधन पर अधिक टैक्स लगाए हैं, तो उन्होंने पूछा, 'आप मुझसे इसके बारे में क्यों पूछ रहे हैं? क्या आपको पहले उनसे नहीं पूछना चाहिए, जिन्होंने कीमतें बढ़ाई हैं?'

मनमोहन बनाम मोदी: ईंधन कीमतों की तुलना

मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद की ईंधन कीमतों की तुलना करते हुए कहा, 'मनमोहन सिंह के कार्यकाल में डीजल ₹48 प्रति लीटर और पेट्रोल ₹70 प्रति लीटर था। एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹414 थी। अब कीमतें क्या हैं? इन्हें किसने बढ़ाया है?' यह तुलना कांग्रेस-भाजपा के बीच ईंधन कर नीति पर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है।

राहत के सवाल पर चुप्पी

जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या राज्य सरकार ईंधन मूल्य वृद्धि से प्रभावित आम नागरिकों को कोई राहत देगी, तो सिद्दारमैया ने कोई जवाब नहीं दिया और वहाँ से चले गए। यह चुप्पी उल्लेखनीय है, क्योंकि कर्नाटक उन राज्यों में शामिल है जहाँ ईंधन पर वैट की दर तुलनात्मक रूप से अधिक है।

आतंकवाद विरोधी दिवस पर शपथ

इसी दिन सिद्दारमैया ने विधान सौधा सम्मेलन हॉल, बेंगलुरु में आतंकवाद विरोधी दिवस के उपलक्ष्य में शपथ समारोह की अध्यक्षता की। गृह मंत्री जी. परमेश्वर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश और वरिष्ठ नौकरशाहों ने इस कार्यक्रम में भाग लेकर शपथ ली। मुख्यमंत्री ने शपथ दिलाते हुए कहा, 'हम, भारत के नागरिक, अपने देश की अहिंसा और सहिष्णुता की महान परंपरा में आस्था रखते हुए, दृढ़ संकल्प और शक्ति के साथ आतंकवाद और हिंसा के सभी रूपों का विरोध करने का संकल्प लेते हैं।'

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि केंद्र और राज्य, दोनों ईंधन कर राजस्व पर निर्भर हैं, और यह जिम्मेदारी का खेल नया नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आम उपभोक्ताओं पर दबाव बना रही हैं और विपक्षी राज्य सरकारें केंद्र की उत्पाद शुल्क नीति को निशाना बना रही हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक विधानसभा में भी गूँज सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तथ्यात्मक दृष्टि से अधूरा — केंद्र की उत्पाद शुल्क नीति की आलोचना करते हुए वे यह नहीं बताते कि कर्नाटक खुद उन राज्यों में है जहाँ ईंधन पर वैट की दर ऊँची है। राहत के सवाल पर उनकी चुप्पी यही संकेत देती है कि राज्य सरकार राजस्व छोड़ने को तैयार नहीं। मनमोहन-मोदी तुलना कांग्रेस का पुराना हथियार है, जो भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, लेकिन वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की विनिमय दर जैसे संरचनात्मक कारकों को नज़रअंदाज़ करता है। असली सवाल यह है कि केंद्र और राज्य, दोनों ईंधन कर से कमाई करते हैं — और उपभोक्ता इस राजनीतिक जिम्मेदारी के खेल में पिसता रहता है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्दारमैया ने ईंधन कीमतों पर केंद्र को क्यों घेरा?
सिद्दारमैया ने 21 मई को कहा कि केंद्र सरकार ईंधन की कीमतें बढ़ाती है, इसलिए मीडिया को पहले उनसे सवाल करना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा टैक्स कम करने की संभावना से भी इनकार किया।
कर्नाटक सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाएगी या नहीं?
नहीं। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने स्पष्ट संकेत दिया कि राज्य सरकार पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए टैक्स में कोई कटौती नहीं करेगी। ईंधन राहत के सवाल पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ईंधन की कीमतें क्या थीं?
सिद्दारमैया के अनुसार, मनमोहन सिंह के कार्यकाल में डीजल ₹48 प्रति लीटर, पेट्रोल ₹70 प्रति लीटर और एलपीजी सिलेंडर ₹414 था। उन्होंने यह तुलना केंद्र की मौजूदा ईंधन मूल्य नीति पर सवाल उठाने के लिए की।
आतंकवाद विरोधी दिवस पर बेंगलुरु में क्या हुआ?
21 मई को विधान सौधा सम्मेलन हॉल में आतंकवाद विरोधी दिवस के उपलक्ष्य में शपथ समारोह आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शपथ दिलाई और गृह मंत्री जी. परमेश्वर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश समेत वरिष्ठ नौकरशाहों ने शपथ ली।
केंद्र और राज्य दोनों ईंधन पर टैक्स लगाते हैं — इसका उपभोक्ता पर क्या असर होता है?
पेट्रोल-डीजल की कीमत में केंद्र की उत्पाद शुल्क और राज्य का वैट, दोनों शामिल होते हैं। इसलिए अंतिम कीमत पर दोनों स्तरों की नीति का असर पड़ता है और उपभोक्ता को दोनों तरफ से बोझ उठाना पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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