ईंधन मूल्य वृद्धि पर सिद्दारमैया का केंद्र पर पलटवार: 'मीडिया उनसे क्यों नहीं पूछता?'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 21 मई को बेंगलुरु में स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए टैक्स में कोई कटौती नहीं करेगी। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर ईंधन की कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाते हुए मीडिया से सवाल किया कि इस मुद्दे पर केंद्र से जवाब क्यों नहीं माँगा जाता।
मुख्यमंत्री का सीधा पलटवार
पत्रकारों के सवालों के जवाब में सिद्दारमैया ने कहा, 'वे (केंद्र सरकार) ईंधन की कीमतें बढ़ाएंगे, और क्या हमें उन्हें कम करना चाहिए? मीडिया इस मुद्दे पर उनसे सवाल क्यों नहीं करता? इसके बजाय मीडिया हमसे ही पूछता रहता है कि क्या हम कीमतें कम करेंगे।' जब पत्रकारों ने यह कहा कि राज्य सरकार ने भी ईंधन पर अधिक टैक्स लगाए हैं, तो उन्होंने पूछा, 'आप मुझसे इसके बारे में क्यों पूछ रहे हैं? क्या आपको पहले उनसे नहीं पूछना चाहिए, जिन्होंने कीमतें बढ़ाई हैं?'
मनमोहन बनाम मोदी: ईंधन कीमतों की तुलना
मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद की ईंधन कीमतों की तुलना करते हुए कहा, 'मनमोहन सिंह के कार्यकाल में डीजल ₹48 प्रति लीटर और पेट्रोल ₹70 प्रति लीटर था। एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹414 थी। अब कीमतें क्या हैं? इन्हें किसने बढ़ाया है?' यह तुलना कांग्रेस-भाजपा के बीच ईंधन कर नीति पर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है।
राहत के सवाल पर चुप्पी
जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या राज्य सरकार ईंधन मूल्य वृद्धि से प्रभावित आम नागरिकों को कोई राहत देगी, तो सिद्दारमैया ने कोई जवाब नहीं दिया और वहाँ से चले गए। यह चुप्पी उल्लेखनीय है, क्योंकि कर्नाटक उन राज्यों में शामिल है जहाँ ईंधन पर वैट की दर तुलनात्मक रूप से अधिक है।
आतंकवाद विरोधी दिवस पर शपथ
इसी दिन सिद्दारमैया ने विधान सौधा सम्मेलन हॉल, बेंगलुरु में आतंकवाद विरोधी दिवस के उपलक्ष्य में शपथ समारोह की अध्यक्षता की। गृह मंत्री जी. परमेश्वर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश और वरिष्ठ नौकरशाहों ने इस कार्यक्रम में भाग लेकर शपथ ली। मुख्यमंत्री ने शपथ दिलाते हुए कहा, 'हम, भारत के नागरिक, अपने देश की अहिंसा और सहिष्णुता की महान परंपरा में आस्था रखते हुए, दृढ़ संकल्प और शक्ति के साथ आतंकवाद और हिंसा के सभी रूपों का विरोध करने का संकल्प लेते हैं।'
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि केंद्र और राज्य, दोनों ईंधन कर राजस्व पर निर्भर हैं, और यह जिम्मेदारी का खेल नया नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आम उपभोक्ताओं पर दबाव बना रही हैं और विपक्षी राज्य सरकारें केंद्र की उत्पाद शुल्क नीति को निशाना बना रही हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक विधानसभा में भी गूँज सकता है।