पेट्रोल ₹106 पार: सिद्धारमैया ने ₹3 प्रति लीटर बढ़ोतरी को 'जनविरोधी' बताया, केंद्र पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार, 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की हालिया बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। बेंगलुरु में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने इस फैसले को 'जनविरोधी' करार दिया और आरोप लगाया कि इससे आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर गंभीर आर्थिक बोझ पड़ेगा।
मुख्यमंत्री के आरोप
सिद्धारमैया ने कहा कि केंद्र सरकार ने ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि कर एक बार फिर अपनी आर्थिक विफलताओं की कीमत जनता से वसूली है। उनके अनुसार, 'यह केवल मूल्य वृद्धि नहीं है; यह आम भारतीयों के दैनिक जीवन पर एक और सीधा हमला है।' उन्होंने केंद्र की विदेश नीति, आर्थिक प्रबंधन और मुद्रास्फीति नियंत्रण में कथित विफलता को इस संकट की जड़ बताया।
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि जब कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम थीं, तब केंद्र ने भारी कर वसूल कर राजकोष भरा, लेकिन उसका लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँचाया। उनके शब्दों में, 'जब कीमतें बढ़ती हैं, तो बोझ तुरंत नागरिकों पर डाल दिया जाता है। यह शासन नहीं, बल्कि शोषण है।'
बेंगलुरु में ईंधन की मौजूदा कीमतें
सिद्धारमैया के अनुसार, बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत ₹106 प्रति लीटर से ऊपर पहुँच गई है, जबकि डीजल ₹94 प्रति लीटर के करीब बिक रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य मुद्रास्फीति पहले से ही घरेलू बजट पर दबाव बना रही है।
आम जनता पर असर
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि इस बढ़ोतरी का असर केवल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। उनके अनुसार, सब्जियों की कीमतें, किराने का सामान, दूध, निर्माण लागत, स्कूल वैन की फीस, टैक्सी-ऑटो का किराया और कृषि इनपुट लागत — सभी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि किसान, मज़दूर, छोटे व्यापारी, घरेलू बजट संभालने वाली महिलाएँ और मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
केंद्र पर कर नीति का आरोप
सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कच्चे तेल की कम कीमतों का लाभ उपभोक्ताओं को देने की बजाय अपने राजस्व के लिए उपयोग करती रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री आम नागरिकों की रक्षा करने की बजाय अपने 'पूंजीवादी मित्रों' को प्राथमिकता देते हैं — हालाँकि यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आगे क्या
केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईंधन मूल्य वृद्धि का मुद्दा राज्य-केंद्र संबंधों में एक बार फिर राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है, और आने वाले दिनों में विपक्षी दलों की ओर से और प्रतिक्रियाएँ आने की संभावना है।