असम पॉक्सो अदालत का सख्त फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी मोहर अली को 20 साल की कठोर कैद
सारांश
मुख्य बातें
असम की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने 15 मई 2026 को नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी मोहर अली को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और ₹25,000 का जुर्माना लगाया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना न अदा करने की स्थिति में दोषी को छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। कोकराझार जिले से जुड़े इस मामले में सुनाया गया यह फैसला बाल यौन शोषण के विरुद्ध न्यायपालिका की कड़ी प्रतिबद्धता का प्रमाण माना जा रहा है।
घटनाक्रम: क्या हुआ था
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 7 जुलाई 2022 को कोकराझार सदर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत काठलगुरी गाँव में घटी थी। आरोपी मोहर अली कथित तौर पर एक नाबालिग लड़की को गौरांग नदी के किनारे स्थित एक सुनसान जूट के खेत में बहला-फुसलाकर ले गया और वहाँ उसका यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता के परिवार ने इसके बाद कोकराझार सदर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जाँच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
मुकदमे की प्रक्रिया और साक्ष्य
आरोपी पर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए गए। विशेष पॉक्सो न्यायालय में चले मुकदमे के दौरान पीड़िता और उसके परिजनों के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट तथा फोरेंसिक साक्ष्य अभियोजन पक्ष के मामले की नींव बने। इन साक्ष्यों की सावधानीपूर्वक जाँच के बाद अदालत ने दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।
अभियोजन पक्ष की प्रतिक्रिया
विशेष लोक अभियोजक एवं जिला न्यायालय के वकील मनजीत घोष ने न्यायालय परिसर के बाहर मीडिया से बात करते हुए इस फैसले को न्याय की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय अदालत द्वारा साक्ष्यों की गहन समीक्षा और बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षित रखने की उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
व्यापक संदर्भ: असम में बाल यौन शोषण की स्थिति
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब असम के बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (बीटीआर) में बाल यौन शोषण के मामलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के आँकड़ों के अनुसार, असम में 2023 में 1,500 से अधिक बाल यौन शोषण के मामले दर्ज किए गए। गौरतलब है कि पॉक्सो अदालतें हाल के वर्षों में नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों में कड़ी सजा सुनाने की प्रवृत्ति अपना रही हैं।
नागरिक समाज की माँग
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने माँग की है कि ऐसे मामलों का त्वरित निपटारा हो और बाल संरक्षण कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। इस सजा को न्यायिक रुझान के अनुरूप देखा जा रहा है, जो भविष्य में संभावित अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है।