हरसिमरत कौर बादल का पंजाब सरकार पर हमला: दलजीत सिंह के परिवार पर पुलिस प्रताड़ना का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने 29 अक्टूबर 2026 को मानसा जिले के भम्मे कलां गाँव पहुँचकर दलजीत सिंह के परिवार से मुलाकात की और पंजाब पुलिस तथा आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दलजीत सिंह का परिवार इतने भय के माहौल में जी रहा है कि उसे अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है।
मुख्य आरोप और परिवार की स्थिति
बादल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि दलजीत सिंह की पत्नी परमजीत कौर ने उन्हें बताया कि पुलिस उन पर एक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने का दबाव बना रही है। परमजीत कौर के अनुसार, जब उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार किया, तो पुलिस बार-बार उन्हें और उनके 14 वर्षीय बच्चे को थाने बुलाकर परेशान करने लगी।
बादल ने यह भी आरोप लगाया कि दलजीत सिंह के पिता, माँ, बहन, पत्नी और बच्चों को लगातार पुलिसिया दबाव का सामना करना पड़ रहा है। परिवार को कथित तौर पर अपना घर छोड़कर धरना स्थल पर शरण लेनी पड़ी है।
पाँच बिंदुओं में बादल का पक्ष
हरसिमरत कौर बादल ने मामले पर पाँच प्रमुख बिंदु सामने रखे। उनके अनुसार, मानसा और पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है। पुलिस ने दलजीत सिंह का शव दिनदहाड़े अपने कब्जे में लिया। परमजीत कौर पर कथित तौर पर बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। परिवार के सदस्यों को प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके अलावा, गाँव से हिरासत में लिए गए 20 से अधिक लोगों का कोई अता-पता नहीं है।
मौत की परिस्थितियों पर विवाद
बादल ने दलजीत सिंह की बहन अमरजीत कौर का हवाला देते हुए कहा कि परिवार का दावा है कि दलजीत सिंह की मौत ड्रग ओवरडोज़ से हुई, जबकि प्रशासन इसे हत्या का मामला बताने की कोशिश कर रहा है। यह विरोधाभास मामले की संवेदनशीलता को और बढ़ा देता है।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने शुरुआत में मामले को शांत करने की कोशिश की और कथित तौर पर नौकरी तथा आर्थिक सहायता की पेशकश भी की, जिसे परिवार ने ठुकरा दिया। दलजीत सिंह के पिता के लापता होने का दावा भी परिवार की ओर से किया गया है।
सरकार पर सीधा निशाना
हरसिमरत कौर बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब सरकार को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि पुलिस का काम लोगों की रक्षा करना है, न कि उन्हें डराना। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पहले नशा तस्करों को संरक्षण मिला और अब दलजीत सिंह की मौत के मामले में भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है।
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब में नशे की समस्या और पुलिस की कार्यप्रणाली पर विपक्ष पहले से ही सवाल उठाता रहा है। पंजाब सरकार और पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना अहम होगा कि सरकार इन गंभीर आरोपों का जवाब कैसे देती है और क्या इस मामले में कोई स्वतंत्र जाँच आदेश होती है।