राजस्थान सरकार ने आरएएस अधिकारी पंकज ओझा को जारी किया चार्जशीट, फेसबुक पर सांप्रदायिक पोस्ट का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) अधिकारी पंकज ओझा के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करते हुए 29 अक्टूबर 2026 को आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी किया है। उन पर अक्टूबर 2025 के दौरान फेसबुक पर कथित तौर पर जाति आधारित, सांप्रदायिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सामग्री साझा करने का आरोप है। ओझा ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए दावा किया है कि उनके नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट प्रसारित किए गए थे।
आरोपों का विवरण
कार्मिक विभाग के अनुसार, ओझा ने कथित तौर पर अपने फेसबुक अकाउंट 'आरएएस पंकज ओझा' के माध्यम से 16, 19, 21, 22, 23, 24, 25 और 27 अक्टूबर 2025 को आपत्तिजनक, भड़काऊ और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सामग्री साझा की। उस समय वे गोपालन विभाग में निदेशक के पद पर तैनात थे।
चार्जशीट में उल्लेख किया गया है कि कुछ पोस्टों में प्रधानमंत्री तथा विभिन्न राज्यों के वर्तमान एवं पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए कथित रूप से अपमानजनक और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया गया। विभाग ने कहा है कि ऐसी सामग्री सामाजिक और धार्मिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है और एक सरकारी अधिकारी से अपेक्षित आचरण के अनुरूप नहीं है।
जाति जनगणना पर पोस्ट का विवाद
चार्जशीट में 25 अक्टूबर 2025 की एक कथित पोस्ट का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार की जाति आधारित जनगणना नीति पर सवाल उठाए गए थे। उस कथित पोस्ट में लिखा था: 'सिर्फ जाति आधारित जनगणना ही क्यों? जाति आधारित करदाताओं और जाति आधारित अपराधों का आंकड़ा भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि पता चल सके कि कौन कितना योगदान देता है।' कार्मिक विभाग ने इसे सरकारी नीति की आलोचना मानते हुए राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 के नियम 3, 4 और 11 के उल्लंघन का मामला बताया है।
सरकार की कार्रवाई और समयरेखा
शिकायत मिलने के बाद कार्मिक विभाग ने 19 जनवरी 2026 को ओझा से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था। विभाग का कहना है कि उस नोटिस का कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। अब जारी आरोप पत्र में अधिकारी को 15 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने पर एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है।
गौरतलब है कि वर्तमान में पंकज ओझा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में अतिरिक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
अधिकारी का पक्ष
ओझा ने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, 'मैंने कोई आपत्तिजनक पोस्ट नहीं की। मेरे नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट प्रसारित किए गए। वास्तव में मैं खुद इस मामले का पीड़ित हूं।' उनके अनुसार, 29 दिसंबर 2025 को उन्होंने कार्मिक सचिव और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
ओझा ने यह भी बताया कि उन्होंने जयपुर पुलिस आयुक्त से मिलकर शिकायत दर्ज कराई और अशोक नगर थाने में भी मामला दर्ज है, जो अभी जांच के अधीन है। उनका दावा है कि 27 जनवरी 2026 को उन्होंने राज्य सरकार के 'राजकाज' पोर्टल के माध्यम से विस्तृत जवाब दाखिल किया था, जिसकी रसीद उनके पास मौजूद है।
आगे क्या होगा
यह मामला अब औपचारिक अनुशासनात्मक कार्यवाही के चरण में है। एक ओर सरकार ने चार्जशीट के आधार पर जवाब मांगा है, दूसरी ओर ओझा लगातार आरोपों को साजिश का हिस्सा बता रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर सरकारी कर्मचारियों की गतिविधियों की निगरानी और आचरण नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के मामले पूरे देश में बढ़ रहे हैं। अगले 15 दिनों में ओझा का जवाब मिलने के बाद विभागीय जांच की दिशा स्पष्ट होगी।