दिशा सालियान केस: वकील नीलेश ओझा का दावा — नए सरकारी रिकॉर्ड मिले, सीबीआई से जांच तेज करने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
दिशा सालियान मामले में वकील नीलेश ओझा ने दावा किया है कि उनकी एफआईआर और अदालत में दर्ज आरोपों की पुष्टि करने वाले नए सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेज लगातार सामने आ रहे हैं। ओझा ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से मामले में नामजद व्यक्तियों के विरुद्ध जांच में तेज़ी लाने और विधिसम्मत कार्रवाई करने की माँग की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब यह मामला वर्षों से विभिन्न एजेंसियों के समक्ष विचाराधीन है।
गृह विभाग की रिपोर्ट का हवाला
ओझा ने बताया कि उन्होंने सीबीआई को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं, जिनमें एक महत्वपूर्ण सरकारी रिपोर्ट शामिल है। उनके अनुसार, 30 मार्च 2021 को जॉइंट सीपी क्राइम की ओर से गृह विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव को एक रिपोर्ट सौंपी गई थी। कथित तौर पर इस रिपोर्ट में सचिन वाजे की नियुक्ति, उनकी ज़िम्मेदारियों और उन्हें पुनः सेवा में लिए जाने की प्रक्रिया से जुड़े सवालों की जांच की गई थी।
ओझा का दावा है कि इस रिपोर्ट में दिशा सालियान की मृत्यु की तारीख का उल्लेख है और उससे कुछ दिन पूर्व वाजे को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट में नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। उनका आरोप है कि वाजे को निर्धारित पद और नियमों से इतर ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी।
सचिन वाजे और परमबीर सिंह से जुड़े दावे
ओझा ने यह भी दावा किया कि सचिन वाजे को पहले एक मामले के बाद विभाग से बाहर किया गया था और करीब 16 वर्ष बाद उनकी सेवा में वापसी हुई। उन्होंने तत्कालीन पुलिस अधिकारी परमबीर सिंह के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि परमबीर सिंह ने कथित तौर पर सीबीआई के समक्ष और मीडिया में वाजे की बहाली में राजनीतिक दबाव की बात स्वीकार की थी।
ओझा के अनुसार, इन बयानों और दस्तावेजों को एकसाथ देखने पर मामले की जांच के लिए महत्वपूर्ण कड़ियाँ उभरती हैं। उन्होंने सीबीआई से इन सभी पहलुओं की स्वतंत्र जांच की माँग की है।
आरोपी बनाने और बयान दर्ज करने की मांग
वकील ओझा ने सीबीआई से पूर्व अधिकारी समीर वानखेड़े सहित कई अन्य लोगों के बयान दर्ज करने की माँग की है। उन्होंने दिशा पाटनी और शिवानी मुंदरेजा को भी आरोपी बनाए जाने और उनके बयानों की जांच की आवश्यकता बताई। गौरतलब है कि ओझा ने पहले भी अपनी एफआईआर और अदालत में दाखिल हलफनामे में आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए हैं।
ओझा ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को दी गई शिकायत का भी उल्लेख किया और कहा कि उसमें लगाए गए आरोपों की भी समुचित जांच होनी चाहिए। उन्होंने सीबीआई से अनुरोध किया कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि हो, तो संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा की मांग और जांच में देरी पर चिंता
ओझा ने सीबीआई से महत्वपूर्ण गवाहों, शिकायतकर्ता और स्वयं वकील को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने की भी माँग रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें सीबीआई पर भरोसा है, लेकिन जांच में हो रही देरी को लेकर उन्हें गहरी चिंता है। यह मामला अब तक कई एजेंसियों के समक्ष पहुँच चुका है और इसकी दिशा आने वाले समय में स्पष्ट होने की संभावना है।