दिशा सालियान केस: वकील नीलेश ओझा ने सीबीआई को सौंपी चिट्ठी, 4 लोगों के लिए माँगी सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
वकील नीलेश ओझा ने दिशा सालियान मामले में सीबीआई को एक औपचारिक पत्र सौंपा है, जिसमें मामले से जुड़े चार प्रमुख व्यक्तियों को पुलिस सुरक्षा देने की माँग की गई है। 27 सितंबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में ओझा ने बताया कि यह पत्र सीबीआई को सौंप दिया गया है और उसकी प्रतियाँ संबंधित पक्षों को भी दी गई हैं।
पत्र में क्या हैं तीन प्रमुख मुद्दे
ओझा के अनुसार, सीबीआई को सौंपे गए पत्र में तीन विशेष माँगें शामिल हैं। पहला, आदित्य ठाकरे और डिनो मोरिया पर मुंबई में कथित तौर पर ड्रग्स के कारोबार से जुड़े होने के आरोप लगाए गए हैं। दूसरा, कथित गैंगरेप और हत्या के मुख्य आरोपी के विरुद्ध सभी साक्ष्य और एक पेन ड्राइव सीबीआई को सौंपी गई है। तीसरा, मामले से जुड़े लोगों को जान का खतरा बताते हुए तत्काल पुलिस सुरक्षा की माँग की गई है।
अदालत ने मुंबई पुलिस की एसआईटी रिपोर्ट की खारिज
ओझा ने बताया कि सतीश सालियान और उनकी टीम द्वारा उठाए गए सभी मुद्दे न्यायालय में सही पाए गए। अदालत ने अपने 44 पृष्ठों के आदेश में मुंबई पुलिस, मालवणी पुलिस स्टेशन और एसआईटी की कथित धोखाधड़ी और गलत हरकतों का विस्तृत उल्लेख किया है। इसी आधार पर अदालत ने एसआईटी रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। ओझा के अनुसार, सतीश सालियान के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज भी की जा चुकी है।
सुरक्षा की माँग और जान का खतरा
ओझा ने इस विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया कि इस मामले में जो लोग आरोपी हैं, उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई गई है, जबकि मामला लड़ने वाले पक्ष को कोई सुरक्षा नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि उनसे जुड़े किसी व्यक्ति की जान को खतरा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी मुंबई पुलिस आयुक्त देवेंद्र भारती पर होगी।
ओझा ने यह भी रेखांकित किया कि उच्च न्यायालय के आदेश में पुलिस द्वारा तैयार किए गए कथित झूठे रिकॉर्ड सहित प्रारंभिक साक्ष्य स्थापित किए जा चुके हैं। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानून के तहत ऐसे गंभीर मामलों में यह प्रक्रिया अनुसरणीय होती है।
किन चार लोगों को सुरक्षा की माँग
ओझा ने बताया कि मामले से जुड़े लोगों को मिल रही धमकियों के मद्देनज़र चार व्यक्तियों के लिए पुलिस सुरक्षा की माँग की गई है — समीर वानखेड़े, सतीश सालियान, आशुतोष पाठक और स्वयं नीलेश ओझा। इस माँग को सीबीआई को लिखित रूप में सौंपा गया है।
आगे की राह
ओझा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास मामले से जुड़े और भी प्रत्यक्षदर्शी हैं, और यदि आवश्यक पड़ा तो अतिरिक्त साक्ष्य सीबीआई को सौंपे जाएँगे। यह मामला सीबीआई जाँच के नए चरण में प्रवेश कर चुका है, और अब सुरक्षा एवं साक्ष्य दोनों मोर्चों पर घटनाक्रम तेज़ी से आकार ले रहा है।