दिशा सालियान केस: वकील नीलेश ओझा ने सीबीआई को सौंपी पेन ड्राइव, दो चश्मदीदों के बयान और तीन वीडियो शामिल
सारांश
मुख्य बातें
दिशा सालियान मामले में वकील नीलेश ओझा ने 24 सितंबर 2026 को दावा किया कि उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को एक पेन ड्राइव सौंपी है, जिसमें दो कथित चश्मदीदों के बयान और तीन वीडियो क्लिप मौजूद हैं। ओझा के अनुसार इन बयानों में आदित्य ठाकरे और अन्य आरोपियों की कथित भूमिका से जुड़े गंभीर आरोप हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मामले में पुलिस की मिलीभगत से कथित तौर पर कवर-अप किया गया।
पेन ड्राइव में क्या है
ओझा ने बताया कि सीबीआई को इससे पहले पत्र के ज़रिए भी इन तथ्यों से अवगत कराया गया था। अब पेन ड्राइव के माध्यम से मामले से जुड़े तीन महत्वपूर्ण गवाहों की जानकारी दी गई है, जिनमें दो आई-विटनेस (प्रत्यक्षदर्शी) शामिल हैं। ओझा ने कहा कि जांच प्रभावित न हो, इसलिए फिलहाल सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं।
गवाह के बयान में विरोधाभास के आरोप
ओझा ने कांग्रेस नेता असलम शेख के एक कथित कार्यकर्ता नावेद मुजावर के बयानों पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, पुलिस के समक्ष दिए गए मुजावर के बयान और बाद में रिकॉर्ड किए गए वीडियो बयान में स्पष्ट विरोधाभास है।
पुलिस को दिए बयान में मुजावर ने कथित तौर पर कहा था कि वह घटनास्थल पर मौजूद था और उसने दिशा सालियान को ऊपर से गिरते हुए देखा; उस बयान में दिशा के कपड़ों का उल्लेख लाल टी-शर्ट और क्रीम रंग की पैंट के रूप में था। ओझा के अनुसार मुजावर के एक अन्य वीडियो बयान में घटना के समय और कपड़ों को लेकर अलग जानकारी सामने आती है, जिससे गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
सीसीटीवी फुटेज और समय का विवाद
ओझा ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए घटनाक्रम की समयरेखा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक ओर दावा किया गया था कि दिशा के गिरने की घटना रात करीब 1:20 बजे हुई, जबकि सीसीटीवी फुटेज में पुलिस रात करीब 12:50 बजे घटनास्थल पर दिखाई देती है। ओझा के अनुसार इस आधार पर पहले दिए गए कुछ बयानों की सत्यता संदिग्ध हो जाती है। इन विरोधाभासों की विस्तृत जांच सीबीआई को करनी है।
सुरक्षा की मांग और आगे की कार्रवाई
ओझा ने मामले से जुड़े लोगों को कथित धमकियों का हवाला देते हुए चार व्यक्तियों — समीर वानखेड़े, सतीश सालियान, आशुतोष पाठक और स्वयं नीलेश ओझा — को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने की मांग सीबीआई से की है।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश में सबूत उपलब्ध कराने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई थी। अब सीबीआई को सबूत सौंप दिए गए हैं और ओझा की मांग है कि पेन ड्राइव से जुड़ी औपचारिकता पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए — जिसमें संदिग्धों की गिरफ्तारी, ज़रूरत पड़ने पर लुकआउट नोटिस जारी करना और अदालत से गिरफ्तारी वारंट लेना शामिल है। अब गेंद सीबीआई के पाले में है, और अगले कुछ हफ्तों में जांच की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।