दिशा सालियान केस: आदित्य ठाकरे के जवाब पर नीलेश ओझा बोले — 'शब्दों की बाजीगरी, मोबाइल लोकेशन और ड्रग्स आरोपों का जवाब नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में दिशा सालियान मामले से जुड़े मानहानि नोटिस पर शिवसेना (उद्धव गुट) नेता आदित्य ठाकरे की ओर से आए जवाब को सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने 23 सितंबर 2026 को 'भ्रामक और तथ्यहीन' करार दिया। ओझा के अनुसार, इस जवाब ने समाधान देने की बजाय कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले नोटिस पर चुप्पी, दूसरे पर 'गोलमोल' जवाब
वकील नीलेश ओझा ने स्पष्ट किया कि आदित्य ठाकरे पहले नोटिस का जवाब इसलिए नहीं दे पाए क्योंकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी पूरी याचिका खारिज कर दी थी। ओझा ने कहा, 'पहले नोटिस का जवाब वह नहीं दे पाए क्योंकि हाईकोर्ट ने उनकी पूरी याचिका खारिज कर दी थी, इसलिए उनके पास जवाब देने के लिए कुछ था ही नहीं। आश्चर्य की बात है कि पहले नोटिस का जवाब नहीं दे रहे हैं और दूसरे नोटिस का जवाब दे रहे हैं।'
ओझा के अनुसार, दूसरे नोटिस के जवाब में वही स्थिति बन गई है जो हाईकोर्ट ने मालवणी पुलिस के बारे में कही थी — कि 'जवाब कई और सवाल खड़े करता है।'
ठाकरे का पक्ष और ओझा की प्रतिक्रिया
आदित्य ठाकरे के जवाब में कहा गया है: 'मैं दिशा को नहीं जानता था; मेरी पोस्ट सतीश सालियान को बदनाम करने के लिए नहीं थी। जो लोग राजनीतिक रूप से प्रेरित होकर इस मामले को लेकर मुझे बदनाम कर रहे थे, मेरी पोस्ट उनसे संबंधित थी। मुझे अपना बचाव करने का अधिकार है।'
इस पर ओझा ने पलटवार किया, 'उन्हें बिल्कुल अधिकार है, लेकिन उनके पास सबूत होना चाहिए। उन्होंने किसी भी बात का जवाब नहीं दिया है; उनका जवाब सिर्फ शब्दों की बाजीगरी है।'
मोबाइल टावर लोकेशन का सवाल
ओझा ने ज़ोर देकर पूछा कि आदित्य ठाकरे आज तक यह क्यों नहीं बता रहे कि घटना वाले दिन उनकी मोबाइल टावर लोकेशन कहाँ थी। उन्होंने कहा कि यह सवाल केवल उनकी तरफ से नहीं, बल्कि वंचित बहुजन आघाड़ी प्रमुख प्रकाश अंबेडकर जैसे राजनीतिक रूप से असंबद्ध व्यक्ति ने भी उठाया है।
ओझा ने दलील दी कि ठाकरे एक मंत्री रह चुके हैं, उनके साथ सरकारी बॉडीगार्ड रहते हैं और उनका पूरा मूवमेंट रजिस्टर दर्ज होता है। इसलिए लोकेशन बताने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।
ड्रग्स कारोबार के आरोप और नारकोटिक्स ब्यूरो का हवाला
ओझा ने तीसरा बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि उनके हलफनामे और 2025 के नोटिस दोनों में स्पष्ट उल्लेख था कि ड्रग्स कारोबार से जुड़े आरोप नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के क्राइम नंबर 15/2020 में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर ठाकरे के नवीनतम जवाब में भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
गौरतलब है कि यह मामला 2020 में दिशा सालियान की संदिग्ध मृत्यु के बाद से विवादों में है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश के पैरा 38 में मुंबई पुलिस की जाँच में कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया था और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।
आगे क्या होगा
ओझा ने संकेत दिया कि सतीश सालियान की ओर से आगामी कानूनी कदम उठाए जाएँगे। यह मामला अब केवल मानहानि तक सीमित नहीं रहा — मोबाइल लोकेशन, ड्रग्स आरोप और हाईकोर्ट के निर्देश इसे कई परतों वाला कानूनी और राजनीतिक विवाद बना चुके हैं। आने वाले दिनों में न्यायालय की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें रहेंगी।