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दिशा सालियान केस: आदित्य ठाकरे के जवाब पर नीलेश ओझा बोले — 'शब्दों की बाजीगरी, मोबाइल लोकेशन और ड्रग्स आरोपों का जवाब नहीं'

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दिशा सालियान केस: आदित्य ठाकरे के जवाब पर नीलेश ओझा बोले — 'शब्दों की बाजीगरी, मोबाइल लोकेशन और ड्रग्स आरोपों का जवाब नहीं'

सारांश

दिशा सालियान मामले में आदित्य ठाकरे का जवाब आया — लेकिन वकील नीलेश ओझा के अनुसार, यह समाधान नहीं, नए सवाल लेकर आया। मोबाइल टावर लोकेशन, ड्रग्स कारोबार के आरोप और हाईकोर्ट के पैरा 38 के निष्कर्ष — इन तीनों पर चुप्पी इस विवाद को और गहरा बना रही है।

मुख्य बातें

नीलेश ओझा ने आदित्य ठाकरे के दूसरे मानहानि नोटिस के जवाब को 23 सितंबर 2026 को 'भ्रामक और तथ्यहीन' करार दिया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठाकरे की याचिका खारिज करते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था; पहले नोटिस पर कोई जवाब नहीं आया था।
ओझा ने घटना वाले दिन आदित्य ठाकरे की मोबाइल टावर लोकेशन सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के क्राइम नंबर 15/2020 में उठाए गए ड्रग्स आरोपों पर ठाकरे के जवाब में कोई स्पष्टीकरण नहीं।
प्रकाश अंबेडकर ने भी स्वतंत्र रूप से ठाकरे से उस दिन की लोकेशन बताने की माँग की है।

मुंबई में दिशा सालियान मामले से जुड़े मानहानि नोटिस पर शिवसेना (उद्धव गुट) नेता आदित्य ठाकरे की ओर से आए जवाब को सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने 23 सितंबर 2026 को 'भ्रामक और तथ्यहीन' करार दिया। ओझा के अनुसार, इस जवाब ने समाधान देने की बजाय कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहले नोटिस पर चुप्पी, दूसरे पर 'गोलमोल' जवाब

वकील नीलेश ओझा ने स्पष्ट किया कि आदित्य ठाकरे पहले नोटिस का जवाब इसलिए नहीं दे पाए क्योंकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी पूरी याचिका खारिज कर दी थी। ओझा ने कहा, 'पहले नोटिस का जवाब वह नहीं दे पाए क्योंकि हाईकोर्ट ने उनकी पूरी याचिका खारिज कर दी थी, इसलिए उनके पास जवाब देने के लिए कुछ था ही नहीं। आश्चर्य की बात है कि पहले नोटिस का जवाब नहीं दे रहे हैं और दूसरे नोटिस का जवाब दे रहे हैं।'

ओझा के अनुसार, दूसरे नोटिस के जवाब में वही स्थिति बन गई है जो हाईकोर्ट ने मालवणी पुलिस के बारे में कही थी — कि 'जवाब कई और सवाल खड़े करता है।'

ठाकरे का पक्ष और ओझा की प्रतिक्रिया

आदित्य ठाकरे के जवाब में कहा गया है: 'मैं दिशा को नहीं जानता था; मेरी पोस्ट सतीश सालियान को बदनाम करने के लिए नहीं थी। जो लोग राजनीतिक रूप से प्रेरित होकर इस मामले को लेकर मुझे बदनाम कर रहे थे, मेरी पोस्ट उनसे संबंधित थी। मुझे अपना बचाव करने का अधिकार है।'

इस पर ओझा ने पलटवार किया, 'उन्हें बिल्कुल अधिकार है, लेकिन उनके पास सबूत होना चाहिए। उन्होंने किसी भी बात का जवाब नहीं दिया है; उनका जवाब सिर्फ शब्दों की बाजीगरी है।'

मोबाइल टावर लोकेशन का सवाल

ओझा ने ज़ोर देकर पूछा कि आदित्य ठाकरे आज तक यह क्यों नहीं बता रहे कि घटना वाले दिन उनकी मोबाइल टावर लोकेशन कहाँ थी। उन्होंने कहा कि यह सवाल केवल उनकी तरफ से नहीं, बल्कि वंचित बहुजन आघाड़ी प्रमुख प्रकाश अंबेडकर जैसे राजनीतिक रूप से असंबद्ध व्यक्ति ने भी उठाया है।

ओझा ने दलील दी कि ठाकरे एक मंत्री रह चुके हैं, उनके साथ सरकारी बॉडीगार्ड रहते हैं और उनका पूरा मूवमेंट रजिस्टर दर्ज होता है। इसलिए लोकेशन बताने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।

ड्रग्स कारोबार के आरोप और नारकोटिक्स ब्यूरो का हवाला

ओझा ने तीसरा बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि उनके हलफनामे और 2025 के नोटिस दोनों में स्पष्ट उल्लेख था कि ड्रग्स कारोबार से जुड़े आरोप नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के क्राइम नंबर 15/2020 में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर ठाकरे के नवीनतम जवाब में भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

गौरतलब है कि यह मामला 2020 में दिशा सालियान की संदिग्ध मृत्यु के बाद से विवादों में है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश के पैरा 38 में मुंबई पुलिस की जाँच में कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया था और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

आगे क्या होगा

ओझा ने संकेत दिया कि सतीश सालियान की ओर से आगामी कानूनी कदम उठाए जाएँगे। यह मामला अब केवल मानहानि तक सीमित नहीं रहा — मोबाइल लोकेशन, ड्रग्स आरोप और हाईकोर्ट के निर्देश इसे कई परतों वाला कानूनी और राजनीतिक विवाद बना चुके हैं। आने वाले दिनों में न्यायालय की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसका जवाब किसी भी सरकारी रिकॉर्ड से मिल सकता है, का वर्षों तक अनुत्तरित रहना खुद एक कहानी कहता है। हाईकोर्ट ने पैरा 38 में मुंबई पुलिस की जाँच पर गंभीर टिप्पणी की थी — मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस न्यायिक भाषा की गंभीरता को रेखांकित करने से चूक जाती है। जब तक लोकेशन, एनसीबी फ़ाइल और एफआईआर की जाँच पारदर्शी नहीं होती, यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का एक और उदाहरण बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिशा सालियान मामले में आदित्य ठाकरे को मानहानि नोटिस क्यों भेजा गया?
सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा के अनुसार, आदित्य ठाकरे की सोशल मीडिया पोस्ट को सतीश सालियान की छवि को नुकसान पहुँचाने वाला माना गया, जिसके आधार पर मानहानि नोटिस भेजा गया। ठाकरे का कहना है कि उनकी पोस्ट उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाने वालों के जवाब में थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया था?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदित्य ठाकरे की याचिका खारिज करते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। अदालत ने अपने आदेश के पैरा 38 में मुंबई पुलिस की जाँच में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया था।
नीलेश ओझा आदित्य ठाकरे से मोबाइल टावर लोकेशन क्यों माँग रहे हैं?
ओझा का तर्क है कि दिशा सालियान की मृत्यु वाले दिन ठाकरे की मोबाइल लोकेशन यह स्थापित कर सकती है कि वे कहाँ थे। चूँकि ठाकरे मंत्री रहे हैं और उनके साथ सरकारी बॉडीगार्ड रहते हैं, यह जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध होनी चाहिए।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के क्राइम नंबर 15/2020 का इस मामले से क्या संबंध है?
नीलेश ओझा ने दावा किया है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के क्राइम नंबर 15/2020 में आदित्य ठाकरे पर ड्रग्स कारोबार से जुड़े आरोप सामने आए थे। यह उल्लेख उनके हलफनामे और 2025 के नोटिस दोनों में था, लेकिन ठाकरे के ताजा जवाब में इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
प्रकाश अंबेडकर का इस विवाद में क्या रोल है?
वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख प्रकाश अंबेडकर ने स्वतंत्र रूप से आदित्य ठाकरे से उस दिन की अपनी लोकेशन सार्वजनिक करने की माँग की है। ओझा ने इसे इस बात के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया कि यह सवाल केवल राजनीतिक विरोधियों तक सीमित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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