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दिशा सालियान के पिता का आदित्य ठाकरे पर पलटवार: 'कर्मों का फल मिलेगा'

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दिशा सालियान के पिता का आदित्य ठाकरे पर पलटवार: 'कर्मों का फल मिलेगा'

सारांश

दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने आदित्य ठाकरे के सफाई-बयान को झूठ करार देते हुए कहा — 'कर्मों का फल मिलेगा।' हाई कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच-विरोध खारिज होने के बाद, अदालत में झूठे हलफनामे और मोबाइल-टावर रिकॉर्ड जैसे सबूतों के दावों के बीच यह मामला एक नए मोड़ पर है।

मुख्य बातें

दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने आदित्य ठाकरे के प्रेस बयान को 'साफ झूठ' करार दिया।
हाई कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 के आदेश से आदित्य ठाकरे की सीबीआई जांच-विरोध आपत्ति खारिज की।
आदित्य ठाकरे के वकील ने हाई कोर्ट के सामने शपथ पर दिए झूठे बयान पर माफी माँगी।
सालियान के अनुसार, 8 जून 2020 को मुंबई से बाहर होने का आदित्य ठाकरे का दावा भी झूठा निकला — पाटणकर 14 जून 2020 तक जीवित थे।
एनसीबी क्राइम नंबर 15/2020 में मिली चैट्स ने रिया चक्रवर्ती से अपरिचितता के दावे को भी गलत बताया।
21 अक्टूबर 2023 को भेजे गए मानहानि नोटिस का आदित्य ठाकरे ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया।

दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने 16 सितंबर 2026 को आदित्य ठाकरे के उस प्रेस बयान को 'साफ झूठ और गुमराह करने वाला' करार दिया, जिसमें ठाकरे ने कहा था कि वे दिशा को नहीं जानते थे और उन पर लगे आरोप राजनीतिक मकसद से प्रेरित हैं। सतीश सालियान के अनुसार, आदित्य ठाकरे कथित गैंगरेप-मर्डर और मामले को दबाने की कोशिश के मुख्य आरोपी हैं।

मुख्य आरोप और अदालती पृष्ठभूमि

सतीश सालियान ने बताया कि आदित्य ठाकरे ने उनकी याचिका पर अपने हलफनामे में भी एफआईआर दर्ज करने और सीबीआई जांच का विरोध किया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 के अपने आदेश से यह आपत्ति खारिज कर दी।

सालियान के अनुसार, आदित्य ठाकरे ने हाई कोर्ट के समक्ष शपथ पर यह झूठा दावा किया कि दिशा का मामला पहले ही सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका था और सीबीआई जांच कर चुकी थी, इसलिए हाई कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकता। जब हाई कोर्ट ने सीबीआई से इसकी पुष्टि की, तो यह दावा झूठा निकला और आदित्य ठाकरे के वकील को अदालत के सामने माफी माँगनी पड़ी।

रिया चक्रवर्ती और एनसीबी चैट्स का संदर्भ

सतीश सालियान ने यह भी कहा कि आदित्य ठाकरे ने पहले दावा किया था कि वे रिया चक्रवर्ती को नहीं जानते, लेकिन क्राइम नंबर 15/2020 की जांच के दौरान एनसीबी, मुंबई को मिली चैट्स ने उस दावे को भी झूठा साबित कर दिया।

सालियान के अनुसार, उनके पास ऐसे ठोस सबूत हैं जो आदित्य ठाकरे की आपराधिक गतिविधियों से जुड़े हैं। इनमें अपराध स्थल पर उनके मोबाइल-टावर लोकेशन के रिकॉर्ड और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की रिपोर्ट शामिल हैं, जिसमें कथित तौर पर ड्रग्स तस्करी और हाइड्रोपोनिक वीड के सेवन का उल्लेख है।

मृत्यु की तारीख और झूठे अनुपस्थिति दावे

सतीश सालियान ने कहा कि आदित्य ठाकरे ने पहले यह भी दावा किया था कि 8 जून 2020 — जिस दिन दिशा सालियान की मौत हुई — को वे मुंबई से बाहर थे क्योंकि उनके दादाजी पाटणकर का निधन हो गया था। लेकिन यह दावा झूठा निकला, क्योंकि पाटणकर 14 जून 2020 तक जीवित थे।

उन्होंने यह भी कहा कि 21 अक्टूबर 2023 को एडवोकेट चैतन्य रावटे द्वारा — सर्वोच्च न्यायालय और हाई कोर्ट लिटिगेंट्स एसोसिएशन के चेयरमैन राशिद खान पठान की ओर से — भेजे गए मानहानि नोटिस का आदित्य ठाकरे ने आज तक कोई जवाब नहीं दिया।

मीडिया की भूमिका और सार्वजनिक दबाव

सतीश सालियान ने कहा कि यह मामला केवल मीडिया के सक्रिय हस्तक्षेप के कारण ही दोबारा खोला जा सका, इसलिए मीडिया बहस पर आपत्ति जताना दुर्भावनापूर्ण है। उनके अनुसार, जनता की नजर निष्पक्ष जांच में बाधा नहीं बनती, बल्कि जांच को पटरी से उतारने की किसी भी कोशिश को मुश्किल बना देती है।

उन्होंने कहा कि शायद आदित्य ठाकरे की असली चिंता 'मीडिया का दखल' नहीं, बल्कि यह है कि इस बार हर घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है और उसे सार्वजनिक रूप से दर्ज किया जा रहा है। सतीश सालियान ने अपने बयान का समापन 'सत्यमेव जयते' से करते हुए कहा — 'आपके कर्मों का फल आपको मिलेगा।'

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है। हाई कोर्ट में झूठे हलफनामे पर माफी, अनुपस्थिति के दावे का झूठा निकलना और मानहानि नोटिस का जवाब न देना — ये सब मिलकर एक ऐसा पैटर्न बनाते हैं जिसे नजरअंदाज करना कठिन है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर बयानबाजी पर केंद्रित रहती है, जबकि असली सवाल यह है कि अदालत में स्वीकृत तथ्यात्मक विसंगतियों का जांच पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यदि सीबीआई जांच में मोबाइल-टावर रिकॉर्ड और एनसीबी की रिपोर्ट जैसे दस्तावेजी सबूत कानूनी परीक्षण में खरे उतरते हैं, तो यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए निर्णायक पड़ाव बन सकता है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिशा सालियान केस में हाई कोर्ट का 2 सितंबर 2026 का आदेश क्या था?
हाई कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को आदित्य ठाकरे की वह आपत्ति खारिज कर दी जिसमें उन्होंने एफआईआर दर्ज करने और सीबीआई जांच का विरोध किया था। इससे दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की याचिका पर आगे की कार्यवाही का रास्ता खुला।
आदित्य ठाकरे ने हाई कोर्ट में क्या झूठा बयान दिया था?
आदित्य ठाकरे ने शपथ पर दावा किया था कि दिशा का मामला पहले ही सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका था और सीबीआई जांच कर चुकी थी, इसलिए हाई कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकता। हाई कोर्ट ने सीबीआई से पुष्टि की और यह बयान झूठा पाया, जिसके बाद ठाकरे के वकील को अदालत में माफी माँगनी पड़ी।
सतीश सालियान के पास आदित्य ठाकरे के खिलाफ कौन-से सबूत होने का दावा है?
सतीश सालियान के अनुसार, उनके पास 8 जून 2020 को अपराध स्थल पर आदित्य ठाकरे के मोबाइल-टावर लोकेशन के रिकॉर्ड, एनसीबी क्राइम नंबर 15/2020 की रिपोर्ट, फोन-सर्विलांस रिकॉर्ड और ड्रग तस्करी से जुड़े दस्तावेज हैं।
8 जून 2020 को मुंबई से बाहर होने का दावा झूठा कैसे साबित हुआ?
आदित्य ठाकरे ने कहा था कि 8 जून 2020 को — दिशा की मौत के दिन — वे मुंबई से बाहर थे क्योंकि उनके दादाजी पाटणकर का निधन हुआ था। लेकिन सतीश सालियान के अनुसार पाटणकर 14 जून 2020 तक जीवित थे, जिससे यह अनुपस्थिति का दावा झूठा साबित होता है।
दिशा सालियान केस में आगे क्या होने की संभावना है?
हाई कोर्ट के 2 सितंबर 2026 के आदेश के बाद सीबीआई जांच की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। सतीश सालियान ने कहा है कि उनके पास ठोस सबूत हैं और मीडिया व जनता की नजर इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखेगी।
राष्ट्र प्रेस
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