PM मोदी का वैश्विक सेमीकंडक्टर CEOs से आह्वान: 'भारत के अगले विकास चरण में जुड़ें'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक में दुनिया की अग्रणी सेमीकंडक्टर कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के अगले विकास चरण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में प्रधानमंत्री ने सरकार और सेमीकंडक्टर उद्योग के बीच गहरे तालमेल की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
बैठक में किन कंपनियों ने लिया हिस्सा
इस राउंडटेबल में SEMI, माइक्रोन, इन्फीनियन, एप्लाइड मैटेरियल्स, ASML, मर्क, टोक्यो इलेक्ट्रॉन लिमिटेड, फुजीफिल्म, AMD, इंटेल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, Lam Research, Rapidus, NXP, फॉक्सकॉन, Advantest, Celesta Capital, CG Power और IBM Research सहित कई प्रमुख वैश्विक संगठनों के CEO, प्रमुख और वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह अपने आप में इस बात का संकेत है कि वैश्विक सेमीकंडक्टर समुदाय में भारत की साख किस तेज़ी से बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री ने क्या कहा
मोदी ने कहा कि भारत के पास प्रतिभा, प्रौद्योगिकी अपनाने की क्षमता और सुदृढ़ बुनियादी ढाँचे का मज़बूत आधार है। उन्होंने उद्योग जगत को कौशल विकास, नवाचार तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रधानमंत्री ने AI में 1 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करने के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की प्रतिभा और वैश्विक उद्योग के अनुभव का संयोजन विशाल अवसरों का द्वार खोल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को उभरती प्रौद्योगिकियों में शुरुआती वैश्विक नेताओं की सूची में शामिल होने का लक्ष्य रखना चाहिए।
सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की मौजूदा स्थिति
मोदी ने रेखांकित किया कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हो चुकी है और अब यह इकोसिस्टम बुनियादी निर्माण के चरण से आगे बढ़कर व्यापक विस्तार और बड़े अवसरों के दौर में प्रवेश कर चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के तहत देश में कई नए संयंत्र और डिज़ाइन केंद्र स्थापित हो रहे हैं।
गौरतलब है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिज़ाइन, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास — सभी मोर्चों पर एक साथ काम करने की रणनीति अपनाई है। यही रणनीति इस बैठक में उद्योग जगत के नेताओं की व्यापक भागीदारी का कारण बनी।
नीतिगत स्थिरता की प्रतिबद्धता
सरकार की ओर से एक स्थिर और संवेदनशील नीतिगत वातावरण उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नीतियों को तकनीकी प्रगति और उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप लगातार विकसित होना होगा। उन्होंने उद्योग के नेताओं को नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों पर सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया और आश्वस्त किया कि इन सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और आगे की राह
बैठक में शामिल उद्योग के शीर्ष अधिकारियों ने भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताएँ विकसित करने के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने ISM 2.0 के अंतर्गत उभर रहे अवसरों पर विश्वास जताया और कहा कि भारत विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास (R&D), उन्नत प्रौद्योगिकियों और सहायक उद्योगों सहित पूरी सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में सशक्त भूमिका निभाने में सक्षम है।
प्रतिनिधियों ने हाल के वर्षों में हुई प्रगति को आगे के निवेश और दीर्घकालिक साझेदारी की नींव बताया और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर व तकनीकी हब बनाने में अपना योगदान जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। अब सबकी नज़रें इस बात पर होंगी कि ये प्रतिबद्धताएँ ज़मीन पर कितनी तेज़ी से निवेश और रोज़गार में तब्दील होती हैं।