16 सितंबर 2026
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69वें कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन में केरल विधानसभा की समावेशी शासन पहल पेश, स्पीकर राधाकृष्णन ने रखा मॉडल

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69वें कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन में केरल विधानसभा की समावेशी शासन पहल पेश, स्पीकर राधाकृष्णन ने रखा मॉडल

सारांश

केरल विधानसभा स्पीकर तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने केप टाउन में 69वें कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन में केरल की 'सब्जेक्ट कमिटी सिस्टम', नागरिक-विधानसभा संवाद और दिव्यांगजन सशक्तिकरण की पहलों को वैश्विक मंच पर रखा — एक राज्य जो अपनी विधायी प्रक्रियाओं से अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित करने का दावा करता है।

मुख्य बातें

केरल विधानसभा स्पीकर तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने 16 सितंबर 2026 को केप टाउन में 69वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस में केरल की संसदीय पहलें प्रस्तुत कीं।
केरल की 'सब्जेक्ट कमिटी सिस्टम' को भारत में अपनी तरह की पहली प्रणाली बताया गया, जिसने विधायी निगरानी को मजबूत किया।
आम नागरिकों को सीधे विधानसभा में प्रश्न पूछने की सुविधा देने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को समेटता व्यापक कानूनी ढाँचा लागू।
राधाकृष्णन ने विधायी कार्यक्षमता सुधारने में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया।

केरल विधानसभा के स्पीकर तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने 16 सितंबर 2026 को केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित 69वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस के मंच पर केरल की संसदीय नवाचार और समावेशी शासन की प्रमुख पहलों को वैश्विक सांसदों के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा ने अपनी विधायी प्रक्रियाओं और नागरिक-केंद्रित पहलों के जरिए दुनिया भर के लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित किया है।

मुख्य घटनाक्रम

आठ बार के विधायक और 76 वर्षीय स्पीकर राधाकृष्णन ने सम्मेलन में केरल द्वारा कानून-निर्माण, संसदीय प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक शासन के क्षेत्र में उठाए गए कई अहम कदमों का विस्तार से उल्लेख किया। इस सम्मेलन में कॉमनवेल्थ देशों के सांसदों और विधायकों की उपस्थिति रही, जिनके सामने केरल की विधायी कार्यप्रणाली को विस्तार से रखा गया।

सब्जेक्ट कमिटी प्रणाली: भारत में पहली पहल

स्पीकर ने विशेष रूप से राज्य की 'सब्जेक्ट कमिटी सिस्टम' (विषय समिति प्रणाली) का जिक्र किया, जो कानूनों और प्रशासनिक मामलों की बारीकी से समीक्षा करती है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली भारत में अपनी तरह की पहली थी और इसने विधायी निगरानी को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है। गौरतलब है कि इस प्रणाली ने न केवल विधायी दक्षता बढ़ाई, बल्कि जनहित के मुद्दों पर त्वरित संसदीय प्रतिक्रिया को भी संभव बनाया।

नागरिक और विधानसभा के बीच सीधा संवाद

राधाकृष्णन ने बताया कि केरल नागरिकों और विधायी संस्थाओं के बीच जुड़ाव को और गहरा करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत एक ऐसी व्यवस्था शुरू करने के कदम उठाए गए हैं, जिससे आम नागरिक सीधे विधानसभा में प्रश्न पूछ सकें, जिससे विधायी प्रक्रिया में जनभागीदारी सुनिश्चित हो। यह पहल लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक ले जाने की केरल की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण में अधिकार-आधारित दृष्टिकोण

समावेशिता के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए स्पीकर ने कहा कि केरल ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए केवल बुनियादी ढाँचागत सहायता तक सीमित न रहते हुए एक अधिकार-आधारित दृष्टिकोण अपनाया है, जिसका उद्देश्य उनका सशक्तिकरण, समानता और सम्मान सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि राज्य ने 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के अंतर्गत एक व्यापक कानूनी ढाँचा लागू किया है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को एक साथ संबोधित करता है।

तकनीक और आगे की राह

राधाकृष्णन ने विधायी निकायों की पहुंच और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि केरल की कोशिशें लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक समावेशी, प्रतिनिधिमूलक और जनआकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील बनाने पर केंद्रित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर संसदीय संस्थाओं की प्रासंगिकता और जनविश्वास को पुनर्स्थापित करने की चुनौती बढ़ रही है। केप टाउन सम्मेलन में हुई इस प्रस्तुति से केरल की विधायी प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मंच पर व्यापक पहचान मिली है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनके क्रियान्वयन की स्वतंत्र समीक्षा अभी भी सीमित है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम का हवाला देना सराहनीय है, परंतु राज्य में इसके अनुपालन की दर और रोजगार में दिव्यांगजनों की वास्तविक भागीदारी के आँकड़े इस दावे की असली परीक्षा होंगे। कॉमनवेल्थ मंच पर 'मॉडल विधानसभा' का तमगा तभी सार्थक होगा जब यह पहलें अन्य राज्यों द्वारा अपनाई जाएँ और स्वतंत्र मूल्यांकन में खरी उतरें।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

69वाँ कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस क्या है और यह कहाँ हुआ?
69वाँ कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित किया गया, जिसमें कॉमनवेल्थ देशों के सांसद और विधायक शामिल हुए। इसका मुख्य विषय संसदीय संस्थाओं के कामकाज और लोकतांत्रिक प्रणालियों को सुदृढ़ करने के तरीके थे।
केरल की 'सब्जेक्ट कमिटी सिस्टम' क्या है और यह खास क्यों है?
केरल की 'सब्जेक्ट कमिटी सिस्टम' एक विषय समिति प्रणाली है जो कानूनों और प्रशासनिक मामलों की गहन समीक्षा करती है। स्पीकर राधाकृष्णन के अनुसार यह भारत में अपनी तरह की पहली प्रणाली है, जिसने विधायी निगरानी को उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है।
केरल में नागरिक सीधे विधानसभा में प्रश्न कैसे पूछ सकेंगे?
केरल सरकार एक ऐसी व्यवस्था विकसित कर रही है जिसके तहत आम नागरिक सीधे विधानसभा में प्रश्न पूछ सकेंगे, जिससे विधायी प्रक्रिया में जनभागीदारी सुनिश्चित होगी। स्पीकर राधाकृष्णन ने इसे नागरिकों और विधायी संस्थाओं के बीच जुड़ाव गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
दिव्यांगजनों के लिए केरल ने क्या कानूनी ढाँचा बनाया है?
केरल ने 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के तहत एक व्यापक कानूनी ढाँचा लागू किया है जो शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को एक साथ संबोधित करता है। राज्य का दृष्टिकोण केवल बुनियादी ढाँचागत सहायता तक सीमित नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, समानता और सम्मान पर केंद्रित है।
तिरुवंचूर राधाकृष्णन कौन हैं?
तिरुवंचूर राधाकृष्णन केरल विधानसभा के वर्तमान स्पीकर हैं और आठ बार विधायक रह चुके हैं। 76 वर्षीय राधाकृष्णन एक वरिष्ठ राजनेता हैं जिन्होंने केप टाउन में 69वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस में केरल का प्रतिनिधित्व किया।
राष्ट्र प्रेस
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