केरल विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन का बड़ा प्रस्ताव: आम नागरिकों को सदन में सवाल पूछने का मिल सकता है अधिकार
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन ने मंगलवार, 16 जून 2026 को घोषणा की कि केरल विधानसभा में आम नागरिकों को सीधे प्रश्न पूछने का अवसर देने की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव लागू होने पर तिरुवनंतपुरम स्थित 138 वर्ष पुरानी इस विधायी संस्था और आम जनता के बीच संवाद का स्वरूप बदल सकता है।
स्पीकर ने कहाँ और क्या कहा
स्पीकर राधाकृष्णन प्रेस क्लब इंस्टीट्यूट ऑफ जर्नलिज्म में एक वॉयस एक्टिंग कोर्स और स्टूडियो कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'जैसे कुछ विदेशी विधायिकाओं में होता है, वैसे ही जनता को भी सवाल पूछने का अवसर मिलना चाहिए।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा की जाएगी।
प्रस्ताव की पृष्ठभूमि और महत्व
स्पीकर ने तर्क दिया कि विधानसभा केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — उन नागरिकों को भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का अधिकार मिलना चाहिए जो अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं। गौरतलब है कि यह विचार विधायी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने और नागरिक जुड़ाव को गहरा करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि 138 साल पुरानी यह संस्था बदलती लोकतांत्रिक जरूरतों के अनुसार लगातार विकसित होनी चाहिए।
अन्य प्रस्तावित पहलें
सार्वजनिक पहुँच बढ़ाने की दिशा में स्पीकर ने बताया कि विधानसभा अपनी पुस्तकों और दस्तावेजों के संग्रह को ऑडियोबुक में बदलने की संभावना भी तलाश रही है। यह कदम विधायी जानकारी को आम नागरिकों तक सरल और सुलभ तरीके से पहुँचाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
नए विधायकों के लिए ओरिएंटेशन
केरल विधानसभा में कुल 140 सदस्य हैं, जिनमें से 71 नए विधायकों के लिए बुधवार से दो दिवसीय ओरिएंटेशन कोर्स शुरू होगा। इसका उद्देश्य नए जनप्रतिनिधियों को सदन की कार्यप्रणाली, नियमों और परंपराओं से परिचित कराना है। हाल के समय में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पहली बार चुने गए विधायकों का होना एक तरह का रिकॉर्ड माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
स्पीकर के इस बयान के बाद विधायी मामलों में चुनाव के बाद भी नागरिक भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा तेज हो गई है। यदि यह प्रस्ताव विशेषज्ञ परामर्श के बाद आगे बढ़ता है, तो केरल उन चुनिंदा भारतीय राज्यों में शामिल हो सकता है जहाँ विधायी प्रक्रिया में जन-भागीदारी का कोई औपचारिक ढाँचा मौजूद हो।