6 अगस्त 2026
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केरल विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन का बड़ा प्रस्ताव: आम नागरिकों को सदन में सवाल पूछने का मिल सकता है अधिकार

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केरल विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन का बड़ा प्रस्ताव: आम नागरिकों को सदन में सवाल पूछने का मिल सकता है अधिकार

सारांश

केरल विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन ने आम नागरिकों को सदन में सवाल पूछने का अधिकार देने का प्रस्ताव रखा है — यह कदम 138 साल पुरानी संस्था को जनता के और करीब लाने की बड़ी पहल हो सकती है।

मुख्य बातें

केरल विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन ने 16 जून 2026 को आम नागरिकों को सदन में प्रश्न पूछने का अवसर देने की संभावना पर विचार की घोषणा की।
प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले विशेषज्ञों से चर्चा की जाएगी; किसी विदेशी विधायिका के मॉडल का हवाला दिया गया।
विधानसभा अपनी पुस्तकों और दस्तावेजों को ऑडियोबुक में बदलने की संभावना भी तलाश रही है।
केरल विधानसभा के 140 सदस्यों में से 71 नए विधायकों के लिए बुधवार से दो दिवसीय ओरिएंटेशन कोर्स शुरू होगा — हाल के इतिहास में रिकॉर्ड संख्या।
स्पीकर ने कहा कि 138 साल पुरानी यह संस्था बदलती लोकतांत्रिक जरूरतों के अनुसार विकसित होनी चाहिए।

केरल विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन ने मंगलवार, 16 जून 2026 को घोषणा की कि केरल विधानसभा में आम नागरिकों को सीधे प्रश्न पूछने का अवसर देने की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव लागू होने पर तिरुवनंतपुरम स्थित 138 वर्ष पुरानी इस विधायी संस्था और आम जनता के बीच संवाद का स्वरूप बदल सकता है।

स्पीकर ने कहाँ और क्या कहा

स्पीकर राधाकृष्णन प्रेस क्लब इंस्टीट्यूट ऑफ जर्नलिज्म में एक वॉयस एक्टिंग कोर्स और स्टूडियो कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'जैसे कुछ विदेशी विधायिकाओं में होता है, वैसे ही जनता को भी सवाल पूछने का अवसर मिलना चाहिए।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा की जाएगी।

प्रस्ताव की पृष्ठभूमि और महत्व

स्पीकर ने तर्क दिया कि विधानसभा केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — उन नागरिकों को भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का अधिकार मिलना चाहिए जो अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं। गौरतलब है कि यह विचार विधायी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने और नागरिक जुड़ाव को गहरा करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि 138 साल पुरानी यह संस्था बदलती लोकतांत्रिक जरूरतों के अनुसार लगातार विकसित होनी चाहिए।

अन्य प्रस्तावित पहलें

सार्वजनिक पहुँच बढ़ाने की दिशा में स्पीकर ने बताया कि विधानसभा अपनी पुस्तकों और दस्तावेजों के संग्रह को ऑडियोबुक में बदलने की संभावना भी तलाश रही है। यह कदम विधायी जानकारी को आम नागरिकों तक सरल और सुलभ तरीके से पहुँचाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

नए विधायकों के लिए ओरिएंटेशन

केरल विधानसभा में कुल 140 सदस्य हैं, जिनमें से 71 नए विधायकों के लिए बुधवार से दो दिवसीय ओरिएंटेशन कोर्स शुरू होगा। इसका उद्देश्य नए जनप्रतिनिधियों को सदन की कार्यप्रणाली, नियमों और परंपराओं से परिचित कराना है। हाल के समय में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पहली बार चुने गए विधायकों का होना एक तरह का रिकॉर्ड माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

स्पीकर के इस बयान के बाद विधायी मामलों में चुनाव के बाद भी नागरिक भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा तेज हो गई है। यदि यह प्रस्ताव विशेषज्ञ परामर्श के बाद आगे बढ़ता है, तो केरल उन चुनिंदा भारतीय राज्यों में शामिल हो सकता है जहाँ विधायी प्रक्रिया में जन-भागीदारी का कोई औपचारिक ढाँचा मौजूद हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'जनता के सवाल' की व्यावहारिक संरचना क्या होगी — कौन पूछेगा, किस विषय पर, और जवाब देने की जिम्मेदारी किसकी होगी। भारत में विधायी प्रक्रिया पहले से ही समय की कमी से जूझती है; बिना स्पष्ट ढाँचे के यह पहल महज प्रतीकात्मक बनकर रह सकती है। दुनिया में जहाँ भी ऐसे प्रयोग सफल हुए हैं — जैसे स्कॉटलैंड या न्यूज़ीलैंड की संसद में — वहाँ सख्त चयन प्रक्रिया और डिजिटल मंच की भूमिका निर्णायक रही है। केरल को इन मॉडलों से सीखकर एक ठोस, सत्यापन-योग्य ढाँचा तैयार करना होगा, वरना यह विचार अगली विधानसभा सत्र तक भुला दिया जाएगा।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल विधानसभा में आम नागरिकों को सवाल पूछने का प्रस्ताव क्या है?
केरल विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन ने 16 जून 2026 को प्रस्ताव रखा कि आम नागरिकों को भी सदन में प्रश्न पूछने का अवसर मिलना चाहिए, जैसा कुछ विदेशी विधायिकाओं में होता है। अभी यह विचार के स्तर पर है और विशेषज्ञों से चर्चा के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
यह प्रस्ताव कब लागू होगा?
अभी तक कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। स्पीकर ने कहा कि किसी भी व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा होगी।
केरल विधानसभा में 71 नए विधायकों का ओरिएंटेशन क्यों हो रहा है?
केरल विधानसभा के 140 सदस्यों में से 71 पहली बार चुने गए हैं, जो हाल के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। उन्हें सदन की कार्यप्रणाली, नियमों और परंपराओं से परिचित कराने के लिए बुधवार से दो दिवसीय ओरिएंटेशन कोर्स शुरू हो रहा है।
क्या केरल विधानसभा में और कौन-सी पारदर्शिता संबंधी पहलें हो रही हैं?
स्पीकर ने बताया कि विधानसभा अपनी पुस्तकों और दस्तावेजों के संग्रह को ऑडियोबुक में बदलने की संभावना तलाश रही है, ताकि आम नागरिकों तक विधायी जानकारी आसानी से पहुँच सके।
क्या भारत के किसी अन्य राज्य में ऐसी व्यवस्था पहले से मौजूद है?
स्पीकर ने विदेशी विधायिकाओं के उदाहरण का हवाला दिया, लेकिन किसी भारतीय राज्य का उल्लेख नहीं किया। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो केरल इस दिशा में कदम उठाने वाले अग्रणी भारतीय राज्यों में शामिल हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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