क्या स्पीकर ने केरल लोक भवन पर 'परंपरा का उल्लंघन' करने का आरोप लगाया?

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क्या स्पीकर ने केरल लोक भवन पर 'परंपरा का उल्लंघन' करने का आरोप लगाया?

सारांश

केरल विधानसभा के अध्यक्ष एएन शमसीर ने राज्यपाल के कार्यालय द्वारा अनुचित आचरण पर नाराजगी जताई। यह विवाद सरकार और लोक भवन के बीच टकराव को बढ़ाता है। मुख्यमंत्री विजयन ने भी इस मुद्दे को उठाया है। क्या यह राजनीति में और भी गहराई तक जाएगा?

Key Takeaways

  • केरल विधानसभा अध्यक्ष ने राज्यपाल के कार्यालय पर आरोप लगाया है।
  • राजनीतिक टकराव की संभावना बढ़ रही है।
  • संविधान के अनुसार राज्यपाल को नीतिगत बयान प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
  • मुख्यमंत्री ने मीडिया में बदलावों का मुद्दा उठाया है।
  • लोक भवन और निर्वाचित सरकार के बीच गतिरोध बढ़ सकता है।

तिरुवनंतपुरम, २७ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल विधानसभा के अध्यक्ष एएन शमसीर ने मंगलवार को राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के कार्यालय द्वारा अपनाए गए अनुचित आचरण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

इससे लोक भवन और निर्वाचित सरकार के बीच लंबे समय से चल रहे गतिरोध में टकराव उत्पन्न हो गया है।

उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें राज्यपाल के कार्यालय से एक पत्र प्राप्त हुआ, जिस पर 'अत्यधिक गोपनीय' लिखा था। इस कारण उन्हें इसे खुद खोलना पड़ा, जो सामान्य प्रथा से भिन्न था।

शमसीर ने यह भी कहा, “यह जानकर आश्चर्य हुआ कि पत्र का सामग्री मेरे पास पहुंचने से पहले ही मीडिया में प्रकाशित हो चुका था।”

उनके अनुसार, पत्र में मुख्यमंत्री पी. विजयन द्वारा राज्यपाल के नीतिगत भाषण समाप्त करने और सदन छोड़ने के बाद दिए गए बयान की वीडियो फुटेज की मांग की गई थी।

उन्होंने आगे कहा, “चिंताजनक यह है कि स्पीकर को उस संदेश की केवल एक 'प्रति' मिली है, जिसे पहले मीडिया के साथ साझा किया गया प्रतीत होता है। मैं इसका आरोप व्यक्तिगत रूप से राज्यपाल पर नहीं, बल्कि उनके कार्यालय पर लगा रहा हूं। यह केवल एक प्रति है, इसलिए मैं इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दूंगा।”

अध्यक्ष की ये टिप्पणियां २० जनवरी को विधानसभा में राज्यपाल के नीतिगत भाषण में किए गए बदलावों के विवाद के तुरंत बाद आई हैं।

मुख्यमंत्री विजयन ने कैबिनेट द्वारा टेक्स्ट में डिलीट किए गए हिस्सों और बदलावों को सार्वजनिक रूप से उठाया था।

उन्होंने बताया कि केरल राज्य द्वारा केंद्र सरकार की प्रतिकूल कार्रवाइयों, लंबित राज्य विधानों, और राजकोषीय संघवाद के मुद्दे के कारण उत्पन्न वित्तीय संकट से संबंधित महत्वपूर्ण अंशों को या तो हटा दिया गया है या संशोधित कर दिया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद १७६ के अंतर्गत राज्यपाल को वर्ष के पहले सत्र में सरकार का नीतिगत वक्तव्य प्रस्तुत करना अनिवार्य है और स्थापित विधायी नियम मंत्रीमंडल द्वारा अनुमोदित संबोधन को आधिकारिक मानते हैं।

स्पीकर ने मुख्यमंत्री का समर्थन करते हुए पहले यह फैसला सुनाया था कि कैबिनेट से मंजूर टेक्स्ट में कोई भी बदलाव विधायी परंपरा का उल्लंघन है और मूल संस्करण को सदन और मीडिया के लिए आधिकारिक दस्तावेज मान लिया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के नजदीक आने के साथ संस्थागत टकराव बढ़ सकता है, जो औपचारिक संवैधानिक पदों और निर्वाचित सरकार के अधिकार के बीच नाजुक संतुलन को रेखांकित करता है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि केरल विधानसभा के अध्यक्ष और राज्यपाल के कार्यालय के बीच का टकराव लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को चुनौती दे सकता है। यह घटना न केवल राज्य की राजनीति में, बल्कि पूरे देश में एक महत्वपूर्ण संवाद का हिस्सा बन सकती है। यह आवश्यक है कि संवैधानिक प्रावधानों का पालन किया जाए और सभी पक्ष एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करें।
NationPress
11/02/2026

Frequently Asked Questions

एएन शमसीर कौन हैं?
एएन शमसीर केरल विधानसभा के अध्यक्ष हैं।
राज्यपाल के कार्यालय का क्या आरोप है?
राज्यपाल के कार्यालय पर अनुचित आचरण का आरोप लगाया गया है।
क्या इस विवाद का चुनावों पर प्रभाव पड़ेगा?
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद चुनावों के नजदीक टकराव को बढ़ा सकता है।
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