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केरल: विपक्ष उप-नेता पद पर सीपीआई-सीपीएम में खुला टकराव, एलडीएफ संयोजक रामकृष्णन ने माँगा संयम

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केरल: विपक्ष उप-नेता पद पर सीपीआई-सीपीएम में खुला टकराव, एलडीएफ संयोजक रामकृष्णन ने माँगा संयम

सारांश

केरल में विपक्ष के उप-नेता पद पर सीपीआई और सीपीएम के बीच सार्वजनिक टकराव चरम पर है। एलडीएफ संयोजक रामकृष्णन को बीच-बचाव करना पड़ा — और यह सब ऐसे समय में जब पार्टी चुनावी हार और ईडी जाँच के दोहरे दबाव में है।

मुख्य बातें

केरल में विपक्ष उप-नेता पद को लेकर सीपीआई और सीपीआई-एम के बीच सार्वजनिक कलह तेज़ हुई।
एलडीएफ संयोजक टी.पी.
रामकृष्णन ने 29 अगस्त 2025 को दखल देकर संयम और बातचीत की अपील की।
सीपीआई के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम के सार्वजनिक बयान को पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने खारिज किया, जिससे विवाद खुले में आया।
सोशल मीडिया पर 1970 के दशक के ऐतिहासिक संदर्भ उछालकर सीपीआई पर हमले तेज़ किए जा रहे हैं।
कोझिकोड में होने वाली सीपीआई-एम की राज्य समिति की विस्तारित बैठक से पहले विवाद सुलझाने का दबाव है।
विजयन की बेटी वीना विजयन की ईडी जाँच ने सीपीआई-एम पर दबाव और बढ़ाया है।

केरल में विधानसभा में विपक्ष के उप-नेता के पद को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीआई-एम) के बीच सार्वजनिक कलह तेज़ हो गई है। स्थिति इतनी बिगड़ी कि वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के संयोजक टी.पी. रामकृष्णन को शुक्रवार, 29 अगस्त 2025 को बीच-बचाव करना पड़ा और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील करनी पड़ी।

विवाद की जड़

यह विवाद वामपंथी दलों की चुनावी हार के बाद सीपीआई की उस माँग से शुरू हुआ जिसमें उसने विधानसभा में विपक्ष के उप-नेता का पद अपने लिए माँगा। सीपीआई के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनकी पार्टी यह पद किसी भी स्थिति में नहीं छोड़ेगी। इस बयान को पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने खारिज कर दिया, जिससे जो मामला बंद दरवाज़ों के पीछे सुलझाया जा सकता था, वह खुले मंच पर आ गया।

रामकृष्णन ने स्पष्ट किया कि विजयन की पिछली टिप्पणियाँ गठबंधन द्वारा पहले लिए गए फैसले पर आधारित थीं, और यह भी कहा कि सीपीआई-एम का आधिकारिक रुख केवल पार्टी के राज्य सचिव द्वारा ही व्यक्त किया जाना चाहिए।

रामकृष्णन का दखल

रामकृष्णन ने कहा, 'समस्याओं को बातचीत के जरिए सुलझाना होगा। समाधान खोजने की कोशिशें जारी हैं।' राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह हस्तक्षेप महज़ शांति की अपील नहीं, बल्कि कोझिकोड में अगले महीने होने वाली सीपीआई-एम की राज्य समिति की विस्तारित बैठक से पहले विवाद को दबाने की रणनीतिक कोशिश है।

गौरतलब है कि इस तरह का सार्वजनिक मतभेद एलडीएफ के लिए राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील समय में आया है।

सोशल मीडिया पर ऐतिहासिक हमले

यह कड़वाहट अब सोशल मीडिया तक फैल चुकी है, जहाँ 1970 के दशक के उन उदाहरणों का हवाला दिया जा रहा है जब सीपीआई नेता कांग्रेस के समर्थन से केरल के मुख्यमंत्री बने थे। इन पुराने संदर्भों को वर्तमान टकराव में उछालकर दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच की दरार को ऐतिहासिक आयाम दिया जा रहा है।

सीपीआई-एम पर दोहरा दबाव

सीपीआई-एम पहले से ही अपनी सबसे बुरी चुनावी हार के नतीजों से उबरने की कोशिश में है। पूर्व मुख्यमंत्री विजयन की राजनीतिक साख को भी इस हार से धक्का लगा है। इसके अलावा, उनकी बेटी वीना विजयन की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जाँच ने उन पर व्यक्तिगत और राजनीतिक दबाव और बढ़ा दिया है।

इस पृष्ठभूमि में, सीपीआई के साथ यह सार्वजनिक विवाद पार्टी के लिए एक और मोर्चे पर मुश्किल खड़ी कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि यदि यह टकराव लंबा खिंचा, तो वामपंथ की आंतरिक एकता का भ्रम टूट सकता है।

आगे क्या होगा

फिलहाल दोनों दलों के बीच बातचीत जारी बताई जा रही है। कोझिकोड में होने वाली सीपीआई-एम की राज्य समिति की विस्तारित बैठक इस विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। यदि तब तक समझौता नहीं हुआ, तो यह मुद्दा बैठक में और विस्फोटक रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विजयन की घटती साख और सहयोगी दल की बगावत — तीनों मोर्चों पर घिरी है। रामकृष्णन का 'संयम' का आग्रह सुनने में तो शालीन लगता है, लेकिन यह उस ढाँचे की कमज़ोरी को उजागर करता है जिसमें गठबंधन के भीतर असहमति को दबाया तो जाता है, सुलझाया नहीं। जब तक उप-नेता पद पर कोई पारदर्शी, स्वीकार्य फॉर्मूला नहीं बनता, कोझिकोड की बैठक राहत नहीं, बल्कि एक और टकराव का मंच बन सकती है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में विपक्ष उप-नेता पद को लेकर विवाद क्या है?
चुनावी हार के बाद सीपीआई ने एलडीएफ गठबंधन में विधानसभा में विपक्ष के उप-नेता का पद माँगा, जिसे सीपीआई-एम ने मानने से इनकार कर दिया। इससे दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच सार्वजनिक बयानबाज़ी शुरू हो गई।
एलडीएफ संयोजक टी.पी. रामकृष्णन ने क्या कहा?
रामकृष्णन ने कहा कि 'समस्याओं को बातचीत के जरिए सुलझाना होगा' और नेताओं से सार्वजनिक बयानों में संयम बरतने की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समाधान खोजने की कोशिशें जारी हैं।
पिनाराई विजयन और बिनॉय विश्वम के बीच विवाद कैसे बढ़ा?
सीपीआई के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनकी पार्टी उप-नेता का पद नहीं छोड़ेगी, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने खारिज कर दिया। इससे एक आंतरिक गठबंधन विवाद खुले सार्वजनिक टकराव में बदल गया।
सीपीआई-एम के लिए यह विवाद इतना संवेदनशील क्यों है?
सीपीआई-एम पहले से ही अपनी सबसे बुरी चुनावी हार से उबरने की कोशिश में है और विजयन की बेटी वीना की ईडी जाँच ने पार्टी पर दबाव और बढ़ाया है। इसके अलावा, कोझिकोड में राज्य समिति की विस्तारित बैठक से पहले यह विवाद पार्टी के लिए शर्मिंदगी का सबब बन सकता है।
सोशल मीडिया पर 1970 के दशक का संदर्भ क्यों उठाया जा रहा है?
सोशल मीडिया पोस्ट में उन उदाहरणों का हवाला दिया जा रहा है जब 1970 के दशक में सीपीआई नेता कांग्रेस के समर्थन से केरल के मुख्यमंत्री बने थे। इसका इस्तेमाल वर्तमान विवाद में सीपीआई पर हमले को और धारदार बनाने के लिए किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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