7 जुलाई 2026
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थिरुवनचूर राधाकृष्णन बने केरल विधानसभा के नए अध्यक्ष, त्रिकोणीय मुकाबले में मिले 101 वोट

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थिरुवनचूर राधाकृष्णन बने केरल विधानसभा के नए अध्यक्ष, त्रिकोणीय मुकाबले में मिले 101 वोट

सारांश

केरल विधानसभा के इतिहास में पहली बार तीनों गठबंधनों ने अध्यक्ष पद पर उम्मीदवार उतारे। सात बार के विधायक थिरुवनचूर राधाकृष्णन ने 101 वोट पाकर यह ऐतिहासिक मुकाबला जीता — और मुख्यमंत्री व विपक्ष नेता ने मिलकर उन्हें कुर्सी तक पहुँचाया।

मुख्य बातें

थिरुवनचूर राधाकृष्णन को 21 मई 2025 को केरल विधानसभा का नया अध्यक्ष चुना गया।
त्रिकोणीय मुकाबले में राधाकृष्णन को 101 वोट , एसी मोइदीन को 35 वोट और बीबी गोपकुमार को 3 वोट मिले।
केरल विधानसभा के इतिहास में पहली बार तीनों राजनीतिक गठबंधनों — यूडीएफ, एलडीएफ और एनडीए — ने अध्यक्ष पद पर उम्मीदवार उतारे।
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और विपक्ष नेता पिनराई विजयन ने संयुक्त रूप से नए स्पीकर को उनकी कुर्सी तक पहुँचाया।
राधाकृष्णन कोट्टयम से सात बार के विधायक हैं और 1991 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं।

केरल विधानसभा के अध्यक्ष पद के लिए हुए ऐतिहासिक त्रिकोणीय चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक थिरुवनचूर राधाकृष्णन को 21 मई 2025 को नया अध्यक्ष चुना गया। तिरुवनंतपुरम में हुए इस मतदान में राधाकृष्णन को 101 वोट मिले और उन्होंने अपने दोनों प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए यह संवैधानिक पद हासिल किया। केरल विधानसभा के इतिहास में पहली बार सदन में प्रतिनिधित्व करने वाले तीनों राजनीतिक गठबंधनों ने अध्यक्ष पद के लिए अपने-अपने उम्मीदवार उतारे।

मुख्य घटनाक्रम

सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने सात बार के विधायक थिरुवनचूर राधाकृष्णन को अपना प्रत्याशी बनाया। वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) ने पूर्व मंत्री एसी मोइदीन को मैदान में उतारा, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपने तीन सदस्यीय दल से बीबी गोपकुमार को प्रत्याशी बनाया।

प्रोटेम स्पीकर जी सुधाकरण ने रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका निभाई और स्वयं मतदान में हिस्सा नहीं लिया। कुल 139 विधायकों ने मतदान किया। परिणाम में राधाकृष्णन को 101 वोट, मोइदीन को 35 वोट और गोपकुमार को 3 वोट मिले।

संसदीय परंपरा का दुर्लभ दृश्य

परिणाम घोषित होने के बाद सदन में जोरदार मेज-थाप हुई और विभिन्न दलों के सदस्य नवनिर्वाचित अध्यक्ष को बधाई देने के लिए आगे आए। एक उल्लेखनीय संसदीय दृश्य में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने संयुक्त रूप से नए स्पीकर को उनकी कुर्सी तक पहुँचाया — जो सदन की एकता और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

गौरतलब है कि केरल की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं का इस तरह एकसाथ किसी पद पर बैठाना एक दुर्लभ और सौहार्दपूर्ण क्षण होता है।

नेताओं की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री सतीशन ने राधाकृष्णन को विनम्र और परिपक्व व्यवहार वाला आदर्श नेता बताया। उन्होंने कहा कि वे छात्र आंदोलन के दिनों में भी राधाकृष्णन के लिए नारे लगाते थे और यह भी उल्लेख किया कि राधाकृष्णन ने अपने राजनीतिक जीवन में लगभग 17 विभाग संभाले हैं तथा अपने क्षेत्र के विकास पर लगातार ध्यान दिया है।

विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने भी राधाकृष्णन के लंबे संसदीय और सार्वजनिक जीवन के अनुभव की सराहना की और विश्वास जताया कि वे अपनी नई जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाएंगे।

राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर

समझौता-आधारित राजनीति के लिए जाने जाने वाले थिरुवनचूर राधाकृष्णन कोट्टयम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। 1987 में पहली चुनावी हार के बाद वे 1991 से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं — यह उनका सातवाँ कार्यकाल है। वे पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी के मंत्रिमंडल में मंत्री भी रह चुके हैं।

क्या होगा आगे

नए अध्यक्ष के रूप में राधाकृष्णन अब केरल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर कार्यभार संभाल रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब यूडीएफ सरकार अपने नए कार्यकाल की शुरुआत में है और सदन में तीन-ध्रुवीय राजनीतिक संरचना को संतुलित करना अध्यक्ष की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ BJP अब तीसरी ताकत के रूप में स्थापित होने की कोशिश कर रही है। एलडीएफ का उम्मीदवार उतारना भी संकेत देता है कि विपक्ष अब परंपरागत सहमति की राजनीति से हटकर प्रत्येक संवैधानिक पद पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है। राधाकृष्णन का 17 विभागों का अनुभव और सर्वदलीय स्वीकार्यता उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त बनाती है, लेकिन तीन-ध्रुवीय सदन में निष्पक्ष अध्यक्षता बनाए रखना उनकी असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थिरुवनचूर राधाकृष्णन केरल विधानसभा के अध्यक्ष कैसे चुने गए?
21 मई 2025 को हुए त्रिकोणीय मतदान में राधाकृष्णन को 139 में से 101 वोट मिले और वे केरल विधानसभा के नए अध्यक्ष चुने गए। यूडीएफ के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने एलडीएफ के एसी मोइदीन (35 वोट) और एनडीए के बीबी गोपकुमार (3 वोट) को पराजित किया।
केरल विधानसभा अध्यक्ष चुनाव 2025 ऐतिहासिक क्यों माना जा रहा है?
यह पहली बार है जब केरल विधानसभा में प्रतिनिधित्व करने वाले तीनों राजनीतिक गठबंधनों — यूडीएफ, एलडीएफ और एनडीए — ने अध्यक्ष पद के लिए अलग-अलग उम्मीदवार उतारे। इससे पहले यह पद प्रायः सर्वसम्मति या द्विपक्षीय मुकाबले से भरा जाता था।
थिरुवनचूर राधाकृष्णन कौन हैं और उनका राजनीतिक अनुभव क्या है?
राधाकृष्णन कोट्टयम विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के सात बार के विधायक हैं, जो 1991 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी के मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुके हैं और लगभग 17 विभागों का अनुभव रखते हैं।
मुख्यमंत्री और विपक्ष नेता ने मिलकर स्पीकर को कुर्सी तक क्यों पहुँचाया?
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और विपक्ष के नेता पिनराई विजयन का संयुक्त रूप से नए स्पीकर को कुर्सी तक पहुँचाना एक पुरानी संसदीय परंपरा का हिस्सा है, जो सदन की एकता और अध्यक्ष पद की निष्पक्षता को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है।
केरल विधानसभा अध्यक्ष चुनाव में मतदान की प्रक्रिया कैसे हुई?
प्रोटेम स्पीकर जी सुधाकरण ने रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका निभाई और स्वयं मतदान में हिस्सा नहीं लिया। कुल 139 विधायकों ने मतदान किया और परिणाम उसी दिन घोषित किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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