7 जुलाई 2026
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उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: आषाढ़ कृष्ण सप्तमी पर उमड़े हजारों श्रद्धालु

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उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: आषाढ़ कृष्ण सप्तमी पर उमड़े हजारों श्रद्धालु

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ कृष्ण सप्तमी पर भस्म आरती का अलौकिक दृश्य — हजारों श्रद्धालु रात से ही कतार में। कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म से शृंगार, ढोल-शंख की गूंज और 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंजा मंदिर परिसर।

मुख्य बातें

श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में 7 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष सप्तमी पर भस्म आरती संपन्न हुई।
भक्तों ने देर रात से ही कतारबद्ध होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए।
अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से विशेष भस्म तैयार की जाती है — पहले श्मशान की राख का उपयोग होता था।
भस्म आरती में प्रवेश के लिए पुरुषों को धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।
मंदिर परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की व्यापक तैनाती की गई।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 7 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे। ढोल-नगाड़ों की गूंज और 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से समूचा मंदिर परिसर आस्था के रंग में रंग गया।

मुख्य अनुष्ठान क्रम

मंगलवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात परंपरागत विधि से बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। इसके उपरांत मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को हरि ओम का जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के बाद ढोल, झांझ एवं शंखध्वनि के मध्य पवित्र भस्म से भव्य शृंगार किया गया।

भस्म की विशेषता और परंपरा

जानकारों के अनुसार, परंपरागत रूप से पहले महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से विशेष रूप से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह परिवर्तन धार्मिक परंपरा को आधुनिक स्वच्छता मानकों के अनुरूप ढालने का प्रयास माना जाता है। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुष श्रद्धालुओं को धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।

श्रद्धालुओं की आस्था और व्यवस्था

मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई, जिसके बाद जैसे ही भक्तों को बाबा के दर्शन हुए, मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए सामान्य जनमानस के साथ-साथ著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में पुलिस बल की व्यापक तैनाती की गई।

धार्मिक महत्व

महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उज्जैन को हिंदू धर्म के सात पवित्र नगरों — सप्तपुरियों — में गिना जाता है। आषाढ़ मास में भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है, यही कारण है कि इस माह में मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। आने वाले सावन माह में यह संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला विशेष अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल का पवित्र भस्म से शृंगार किया जाता है। यह भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पर होने वाला सबसे प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन माना जाता है।
भस्म आरती में किस भस्म का उपयोग होता है?
जानकारों के अनुसार, अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से विशेष रूप से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। परंपरागत रूप से पहले श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, जिसे बाद में बदला गया।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती में प्रवेश के लिए पुरुष श्रद्धालुओं को धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह पारंपरिक वेशभूषा नियम मंदिर प्रशासन द्वारा निर्धारित है।
आषाढ़ माह में महाकाल दर्शन का क्या महत्व है?
आषाढ़ मास में भगवान शिव की उपासना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जिस कारण इस अवधि में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। आषाढ़ कृष्ण सप्तमी जैसे विशेष तिथियों पर देश-विदेश से भक्त उज्जैन पहुँचते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर में भीड़ प्रबंधन कैसे होता है?
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में पुलिस बल की व्यापक तैनाती की जाती है। विशेष धार्मिक अवसरों पर प्रशासन अतिरिक्त व्यवस्था करता है।
राष्ट्र प्रेस
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