28 जुलाई 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ एकादशी पर बाबा महाकाल का राजा स्वरूप शृंगार, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

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महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ एकादशी पर बाबा महाकाल का राजा स्वरूप शृंगार, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ एकादशी पर बाबा महाकाल का राजा स्वरूप शृंगार देखने लायक रहा — पंचामृत अभिषेक, रजत चंद्र और त्रिशूल से सजे बाबा के दर्शन पाकर श्रद्धालुओं ने 'जय श्री महाकाल' से परिसर गुंजा दिया।

मुख्य बातें

11 जून 2026 को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी पर श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का भांग, आभूषण, रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुण्ड से राजा स्वरूप में शृंगार किया गया।
पंचामृत अभिषेक — दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस — के साथ जलाभिषेक भी संपन्न हुआ।
केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर भस्म आरती में सम्मिलित हुए और व्यवस्था की सराहना की।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से कतारबद्ध होकर दर्शन के लिए प्रतीक्षारत रहे।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 11 जून 2026 को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। भगवान महाकाल को भांग, आभूषण और सुगंधित पुष्पों से राजा स्वरूप में सजाया गया, जिसके दर्शन पाते ही श्रद्धालुओं के कंठ से 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष फूट पड़े और पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में डूब गया।

मुख्य घटनाक्रम

तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने की परंपरा का निर्वहन करने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।

मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक के पश्चात भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुण्ड से अलंकृत कर बाबा को राजा स्वरूप में सुसज्जित किया गया।

भस्म आरती और श्रद्धालुओं की भीड़

मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही कतारबद्ध होकर अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा में थे। भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ा।

केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति

केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर भी इस अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती में सम्मिलित हुए। उन्होंने उपस्थित पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 'यह एक बहुत ही सुखद और आध्यात्मिक अनुभव है और यहाँ की व्यवस्था भी बहुत अच्छी है।' उन्होंने जोड़ा कि लोग अपनी मनोकामनाएँ लेकर यहाँ आते हैं और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

आध्यात्मिक महत्व

गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की भस्म आरती देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। ज्येष्ठ एकादशी के दिन यहाँ दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है, जो श्रद्धालुओं को दूर-दूर से खींच लाता है। प्रत्येक पर्व पर मंदिर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान का केंद्र बिंदु है। केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति यह संकेत देती है कि धार्मिक पर्यटन अब राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बन चुका है — जो एक ओर श्रद्धालुओं की आस्था को सम्मान देता है, वहीं दूसरी ओर मंदिर प्रशासन पर बुनियादी सुविधाओं और भीड़ प्रबंधन की जवाबदेही भी बढ़ाता है। महाकाल लोक परियोजना के बाद से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे आध्यात्मिक अनुभव और व्यावसायिक दबाव के बीच संतुलन बनाना मंदिर प्रशासन के लिए एक सतत चुनौती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन की सबसे प्रतिष्ठित दैनिक पूजा है, जो तड़के ब्रह्ममुहूर्त में होती है। इसमें भगवान महाकाल का भस्म से श्रृंगार किया जाता है और यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एकमात्र ऐसी परंपरा है।
ज्येष्ठ एकादशी पर महाकाल दर्शन का क्या महत्व है?
ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी को महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष शृंगार किया जाता है और श्रद्धालु दूर-दूर से मनोकामना लेकर आते हैं।
11 जून 2026 की भस्म आरती में कौन विशेष अतिथि उपस्थित थे?
केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर 11 जून 2026 को बाबा महाकाल की भस्म आरती में सम्मिलित हुए। उन्होंने मंदिर की व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे 'सुखद और आध्यात्मिक अनुभव' बताया।
महाकाल के राजा स्वरूप शृंगार में क्या-क्या शामिल होता है?
राजा स्वरूप शृंगार में बाबा महाकाल को भांग, आभूषण, रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुण्ड से अलंकृत किया जाता है। इससे पहले जलाभिषेक और पंचामृत — दूध, दही, घी, शक्कर व फलों के रस — से अभिषेक किया जाता है।
श्री महाकालेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
श्री महाकालेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है और भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर अपनी अनूठी भस्म आरती परंपरा और भव्य शृंगार के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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