सावन में महाकाल की भस्म आरती: उज्जैन में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, 'जय श्री महाकाल' से गूंजा मंदिर
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 8 अगस्त 2026 को श्रावण कृष्ण पक्ष दशमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती अत्यंत श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। तड़के सवेरे मंदिर के कपाट खुलते ही 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा, और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने।
कपाट खुलने से भस्म आरती तक का क्रम
शनिवार की भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और वेदमंत्रों के उच्चार से पवित्र हो उठा। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।
दिव्य शृंगार और भोग
अभिषेक के पश्चात बाबा महाकाल के मस्तक पर चंद्रमा धारण कराया गया और उनका भस्म से विशेष शृंगार किया गया। फल और मिष्ठान से बाबा को भोग लगाया गया। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई, जिसके दर्शन करने के लिए श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध होकर प्रतीक्षारत थे।
भस्म आरती के नियम और परंपरा
गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में प्रवेश के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और मंदिर प्रशासन इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करता है। सावन के महीने में यह आरती विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इस माह भगवान शिव की आराधना का पुण्यफल कई गुना माना जाता है।
काशी विश्वनाथ में भी उमड़े श्रद्धालु
सावन के इस पवित्र माह में वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। अत्यधिक श्रद्धालुओं के आगमन के कारण स्पर्श दर्शन अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि सावन के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे थे और उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की थी।
सावन का धार्मिक महत्व
सावन का महीना शिव भक्तों के लिए सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक की परंपरा चलती है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में तो यह भीड़ हर वर्ष सावन में कई गुना बढ़ जाती है, और इस वर्ष भी श्रद्धालुओं का उत्साह अटूट देखा गया। आने वाले सावन सोमवारों पर भी इसी प्रकार की भव्य आरती और दर्शन की व्यवस्था जारी रहेगी।