23 जुलाई 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में राजा स्वरूप भस्म आरती: ज्येष्ठ अधिक मास अष्टमी पर भक्त हुए भावविभोर

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महाकालेश्वर मंदिर में राजा स्वरूप भस्म आरती: ज्येष्ठ अधिक मास अष्टमी पर भक्त हुए भावविभोर

सारांश

ज्येष्ठ अधिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में भव्य शृंगार हुआ। भोर 4 बजे कपाट खुले, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती के बाद भक्त भावविभोर हो उठे। गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य ने भी दर्शन कर विश्व-कल्याण की प्रार्थना की।

मुख्य बातें

8 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी पर श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में राजा स्वरूप भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल के कपाट भोर 4 बजे खोले गए; पंचामृत अभिषेक , चंदन तिलक और आभूषण से शृंगार किया गया।
ढोल-नगाड़ों , शंखध्वनि और 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा।
गोवर्धन पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने दर्शन कर विश्व-कल्याण की प्रार्थना की।
देर रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु लंबी कतारों में दर्शन के लिए खड़े रहे।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 8 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में भव्य शृंगार कर दिव्य भस्म आरती संपन्न की गई। भोर में 4 बजे कपाट खुलते ही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की जयकारों से गूंज उठा, और दर्शन पाते ही भक्त भावविभोर हो गए।

मुख्य घटनाक्रम

भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। कपाट खुलते ही पूरे परिसर में 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वेद-मंत्रों के उच्चारण से मंदिर प्रांगण गुंजायमान रहा।

शृंगार एवं अभिषेक विधि

मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया, इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को चंदन तिलक और बहुमूल्य आभूषण अर्पित कर राजा स्वरूप में सुसज्जित किया गया। तत्पश्चात मंदिर के पुजारी ने विधिपूर्वक महाआरती संपन्न कराई।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही लंबी कतारों में खड़े नजर आए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही भक्तों को बाबा के दर्शन हुए, अनेक श्रद्धालु भावुक हो गए। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि महाकालेश्वर के प्रति आस्था का प्रवाह अटूट है।

शंकराचार्य की प्रतिक्रिया

गोवर्धन पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज भी इस अवसर पर बाबा महाकाल के दर्शन हेतु उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि 'बाबा महाकाल का धाम दिव्य है। यहाँ मिलने वाले आध्यात्मिक अनुभव को शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता।' उन्होंने आगे कहा कि 'आज हम सौभाग्यशाली रहे कि हमें संतों और ऋषियों के साथ बाबा की भस्म आरती में शामिल होने का मौका मिला। हमने उनकी ऊर्जा को महसूस किया और यहाँ से मैंने सभी भक्तों और दुनिया भर के लोगों के कल्याण के लिए बाबा से प्रार्थना की है।'

आगे की संभावना

गौरतलब है कि ज्येष्ठ अधिक मास का विशेष धार्मिक महत्व होने के कारण इस पूरे माह महाकालेश्वर मंदिर में विशेष अनुष्ठानों और शृंगार का क्रम जारी रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं की भारी संख्या में उपस्थिति अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का केंद्र है — जो देश भर के श्रद्धालुओं को खींचती है। ज्येष्ठ अधिक मास जैसे विशेष कालखंड में गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य की उपस्थिति इस स्थान के राष्ट्रीय धार्मिक महत्व को रेखांकित करती है। यह भी उल्लेखनीय है कि महाकाल लोक परियोजना के बाद से मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो धार्मिक पर्यटन के लिहाज से उज्जैन की बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाती है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है और यह क्यों खास है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में प्रतिदिन भोर में होने वाला एक अनूठा अनुष्ठान है, जिसमें भगवान शिव को भस्म अर्पित कर आरती की जाती है। यह देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर की विशेष परंपरा है और इसे अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
8 जून 2026 को महाकाल मंदिर में राजा स्वरूप शृंगार क्यों हुआ?
8 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी थी, जो हिंदू पंचांग में विशेष पुण्य तिथि मानी जाती है। इस अवसर पर बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष शृंगार कर भव्य भस्म आरती का आयोजन किया गया।
गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य ने महाकाल दर्शन पर क्या कहा?
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने कहा कि बाबा महाकाल का धाम दिव्य है और यहाँ का आध्यात्मिक अनुभव शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने संतों और ऋषियों के साथ भस्म आरती में शामिल होने को सौभाग्य बताते हुए विश्व-कल्याण की प्रार्थना करने की बात कही।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन का समय क्या है?
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के लिए कपाट भोर में लगभग 4 बजे खोले जाते हैं। श्रद्धालु पहले से ऑनलाइन या मंदिर प्रबंधन समिति के माध्यम से दर्शन का पास प्राप्त कर सकते हैं।
ज्येष्ठ अधिक मास का महाकाल दर्शन में क्या महत्व है?
ज्येष्ठ अधिक मास हिंदू पंचांग में अतिरिक्त मास होता है, जो कुछ वर्षों में ही आता है और इसे विशेष पुण्यकारी माना जाता है। इस दौरान महाकालेश्वर मंदिर में विशेष अनुष्ठान, शृंगार और आरती का क्रम जारी रहता है, जिससे देशभर से श्रद्धालु उज्जैन आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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