महाकालेश्वर मंदिर में राजा स्वरूप भस्म आरती: ज्येष्ठ अधिक मास अष्टमी पर भक्त हुए भावविभोर
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 8 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिक मास कृष्ण पक्ष अष्टमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में भव्य शृंगार कर दिव्य भस्म आरती संपन्न की गई। भोर में 4 बजे कपाट खुलते ही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की जयकारों से गूंज उठा, और दर्शन पाते ही भक्त भावविभोर हो गए।
मुख्य घटनाक्रम
भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। कपाट खुलते ही पूरे परिसर में 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वेद-मंत्रों के उच्चारण से मंदिर प्रांगण गुंजायमान रहा।
शृंगार एवं अभिषेक विधि
मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया, इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को चंदन तिलक और बहुमूल्य आभूषण अर्पित कर राजा स्वरूप में सुसज्जित किया गया। तत्पश्चात मंदिर के पुजारी ने विधिपूर्वक महाआरती संपन्न कराई।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही लंबी कतारों में खड़े नजर आए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही भक्तों को बाबा के दर्शन हुए, अनेक श्रद्धालु भावुक हो गए। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि महाकालेश्वर के प्रति आस्था का प्रवाह अटूट है।
शंकराचार्य की प्रतिक्रिया
गोवर्धन पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज भी इस अवसर पर बाबा महाकाल के दर्शन हेतु उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि 'बाबा महाकाल का धाम दिव्य है। यहाँ मिलने वाले आध्यात्मिक अनुभव को शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता।' उन्होंने आगे कहा कि 'आज हम सौभाग्यशाली रहे कि हमें संतों और ऋषियों के साथ बाबा की भस्म आरती में शामिल होने का मौका मिला। हमने उनकी ऊर्जा को महसूस किया और यहाँ से मैंने सभी भक्तों और दुनिया भर के लोगों के कल्याण के लिए बाबा से प्रार्थना की है।'
आगे की संभावना
गौरतलब है कि ज्येष्ठ अधिक मास का विशेष धार्मिक महत्व होने के कारण इस पूरे माह महाकालेश्वर मंदिर में विशेष अनुष्ठानों और शृंगार का क्रम जारी रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं की भारी संख्या में उपस्थिति अपेक्षित है।