28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाकाल मंदिर उज्जैन: ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी पर पंचामृत अभिषेक और भव्य भस्म आरती

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाकाल मंदिर उज्जैन: ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी पर पंचामृत अभिषेक और भव्य भस्म आरती

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी पर बाबा महाकाल को पंचामृत अभिषेक और रजत आभूषणों से राजसी शृंगार कर भव्य भस्म आरती की गई। 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से परिसर गूंज उठा, देर रात से उमड़े श्रद्धालुओं ने दिव्य दर्शन का लाभ लिया।

मुख्य बातें

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 12 जून 2026 (ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष द्वादशी) को भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर, फलों का रस) से अभिषेक कर रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुण्ड से राजसी शृंगार किया गया।
तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ कपाट खोले गए।
वर्तमान में कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है।
मंदिर में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 12 जून 2026 (ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष द्वादशी, शुक्रवार) को बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। भगवान महाकाल को पुष्प-अलंकरण और राजसी आभूषणों से सुसज्जित कर दिव्य शृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में एकत्रित हो गए थे।

कपाट खुलने का क्रम और वातावरण

तड़के सबसे पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली गई, तत्पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। जैसे ही भस्म आरती और दिव्य शृंगार के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिला, 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को और भी दिव्य बना दिया।

पंचामृत अभिषेक और राजसी शृंगार

मंदिर के कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा महाकाल को रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुण्ड से अलंकृत कर राजा स्वरूप में सजाया गया। मंदिर के पुजारियों ने महाआरती संपन्न कराई।

भस्म आरती की परंपरा और विशेषता

मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी। वर्तमान में विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है। मंदिर की परंपरा के अनुसार पुरुष श्रद्धालुओं के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

देश-विदेश से उमड़ती है आस्था

बाबा महाकाल की भस्म आरती की ख्याति देश की सीमाओं से परे विदेशों तक फैली हुई है। इसके दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ समाज की著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। 12 जून को भी बड़ी संख्या में भक्त देर रात से ही पंक्तिबद्ध होकर बाबा के दर्शन की प्रतीक्षा में खड़े रहे। आने वाले पर्वों पर भी इसी प्रकार की भव्य आरती और शृंगार का सिलसिला जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है जो पर्यटन और आस्था को एक साथ जोड़ती है। गौरतलब है कि भस्म आरती की बढ़ती लोकप्रियता के साथ मंदिर प्रशासन पर भीड़ प्रबंधन और परंपराओं के संरक्षण का दोहरा दबाव भी बढ़ा है। ड्रेस कोड जैसे नियम परंपरा को जीवित रखने के प्रयास हैं, लेकिन बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इनकी जानकारी सुनिश्चित करना एक सतत चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला विशेष अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित कर आरती की जाती है। वर्तमान में कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है।
12 जून 2026 को महाकाल का शृंगार किस प्रकार किया गया?
12 जून को ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी पर बाबा महाकाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर, फलों का रस) से अभिषेक के बाद रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुण्ड से अलंकृत कर राजा स्वरूप में सजाया गया। पुष्प-अलंकरण भी किया गया।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के लिए ड्रेस कोड क्या है?
मंदिर की परंपरा के अनुसार पुरुष श्रद्धालुओं के लिए धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। इस नियम का पालन भस्म आरती दर्शन के लिए आवश्यक है।
भस्म आरती में भस्म कहाँ से आती है?
मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में श्मशान की राख का उपयोग होता था, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म अर्पित की जाती है। यह परिवर्तन स्वास्थ्य और शुद्धता की दृष्टि से किया गया बताया जाता है।
महाकाल भस्म आरती के दर्शन के लिए कब जाना चाहिए?
भस्म आरती तड़के (ब्रह्ममुहूर्त में) होती है और कपाट खुलने से पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली जाती है। श्रद्धालु प्रायः देर रात से ही पंक्तिबद्ध होते हैं, इसलिए समय से पूर्व पहुँचना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 4 सप्ताह पहले
  5. 4 सप्ताह पहले
  6. 4 सप्ताह पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले