महाकाल का भव्य शृंगार: आषाढ़ द्वादशी पर रजत ओम, मुकुट और रुद्राक्ष माला से सजे बाबा
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 26 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर बाबा को रजत ओम, बेल पत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित कर अलौकिक शृंगार किया गया। मंदिर परिसर में देश-विदेश से आए हज़ारों श्रद्धालु इस दिव्य दृश्य के साक्षी बने।
कपाट खुलने का पावन क्षण
रविवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टनकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
अभिषेक और शृंगार की विधि
मंदिर के कपाट खुलते ही विधि-विधान से जलाभिषेक किया गया। इसके उपरांत दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से बाबा का अभिषेक संपन्न हुआ। शृंगार में मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल सजाए गए, साथ ही डमरू, शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। सुगंधित पुष्पमाला से बाबा का शृंगार पूर्ण किया गया।
भस्म आरती की परंपरा और नियम
मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। गौरतलब है कि पूर्व में बाबा महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों को धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं की आस्था और व्यवस्था
बाबा महाकाल के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतार में खड़े रहे। भस्म आरती का यह दृश्य देश-विदेश में प्रसिद्ध है और जनसामान्य के साथ-साथ著名 हस्तियाँ भी इसमें सम्मिलित होने आती हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात रहा।
आगे क्या
आषाढ़ मास के शेष दिनों में भी श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजन और शृंगार के आयोजन होते रहेंगे, जिनमें श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।