27 जून 2026
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उज्जैन: ज्येष्ठ त्रयोदशी पर रजत मुकुट और रुद्राक्ष से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु

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उज्जैन: ज्येष्ठ त्रयोदशी पर रजत मुकुट और रुद्राक्ष से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु

सारांश

ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को रजत मुकुट और रुद्राक्ष की माला से राजा स्वरूप में सजाया गया। भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालु 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठे और पंचामृत अभिषेक की दिव्य परंपरा निभाई गई।

मुख्य बातें

27 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष त्रयोदशी पर श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को रजत मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित कर राजा स्वरूप शृंगार किया गया।
दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक हुआ; हरि ओम जल भी अर्पित किया गया।
अब भस्म आरती में श्मशान राख की जगह कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है।
आरती के दौरान पुरुषों को धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।
मंदिर परिसर में बड़े पैमाने पर पुलिस तैनाती से व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 27 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर खड़े रहे। रजत मुकुट और रुद्राक्ष की माला से अलंकृत बाबा महाकाल के राजा स्वरूप के दर्शन ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।

कपाट खुलने का क्रम

शनिवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक किया गया और इसके उपरांत दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। भगवान को हरि ओम का जल भी अर्पित किया गया।

दिव्य शृंगार और भस्म आरती

मंदिर के पुजारियों ने बाबा महाकाल को रजत मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित कर राजा स्वरूप शृंगार किया। जैसे ही दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को और अधिक पवित्र बना दिया।

भस्म की विशेषता और परंपरा

गौरतलब है कि पूर्व में महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, परंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह परिवर्तन परंपरा के साथ शुद्धता और स्वास्थ्य-सम्मत आस्था को जोड़ने का प्रयास है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति और व्यवस्था

बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में विख्यात है और इसे देखने के लिए आमजन से लेकर著名 हस्तियाँ तक उज्जैन पहुँचती हैं। 27 जून को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही दर्शन के लिए पंक्तिबद्ध रहे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। आस्था और अनुशासन के इस संगम ने ज्येष्ठ त्रयोदशी की भस्म आरती को और भी यादगार बना दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्रबिंदु है — जो हर तिथि पर हजारों श्रद्धालुओं को खींचती है। यह ध्यान देने योग्य है कि श्मशान राख से कपिला गाय की भस्म की ओर हुआ बदलाव परंपरा और आधुनिक स्वास्थ्य-चेतना के बीच संतुलन का प्रयास है, जिसे मंदिर प्रशासन ने चुपचाप लागू किया। बड़े पैमाने पर भीड़ प्रबंधन और पुलिस तैनाती यह भी दर्शाती है कि धार्मिक पर्यटन और सुरक्षा-व्यवस्था का तालमेल अब मंदिर प्रशासन की प्राथमिकता बन चुका है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला एक विशेष अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक और दिव्य शृंगार के बाद भस्म से आरती की जाती है। यह देश की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक आरतियों में से एक मानी जाती है।
भस्म आरती में किस भस्म का उपयोग होता है?
पहले श्मशान की राख का उपयोग होता था, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह बदलाव परंपरा को स्वास्थ्य-सम्मत रूप देने के उद्देश्य से किया गया है।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या पहनना अनिवार्य है?
भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए लागू है।
27 जून 2026 की भस्म आरती किस अवसर पर हुई?
यह भस्म आरती ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के पावन अवसर पर हुई। इस दिन बाबा महाकाल को रजत मुकुट और रुद्राक्ष की माला से राजा स्वरूप में सजाया गया और हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
महाकालेश्वर मंदिर में कपाट कैसे खोले जाते हैं?
प्रतिदिन तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले जाते हैं। इसके बाद जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक और दिव्य शृंगार के साथ भस्म आरती संपन्न होती है।
राष्ट्र प्रेस
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