महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भव्य भस्म आरती, भांग-चंदन और रजत आभूषणों से हुआ बाबा का दिव्य शृंगार
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार, 29 जून को बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक आयोजन में सहभागी होने के लिए देश-विदेश से आए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे। पूर्णिमा की इस विशेष तिथि ने आस्था के इस महापर्व को और भी अधिक दिव्य बना दिया।
कपाट खुलते ही गूंजा 'जय श्री महाकाल'
सोमवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के पट विधिवत खोले गए। जैसे ही भक्तों को दिव्य शृंगार और भस्म आरती के उपरांत बाबा के दर्शन प्राप्त हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टनकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
पंचामृत अभिषेक और दिव्य शृंगार
मंदिर के पट खुलते ही मंत्रोच्चार के मध्य भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। अभिषेक के पश्चात भांग, चंदन और रजत आभूषणों से बाबा का मनोहारी शृंगार किया गया, जिसे देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। तत्पश्चात मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई।
भस्म आरती की विशेष परंपरा
गौरतलब है कि पहले बाबा महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह परिवर्तन मंदिर प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य और शुद्धता के दृष्टिकोण से किया गया। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है — यह परंपरा मंदिर की गरिमा और आस्था की पवित्रता को बनाए रखती है।
सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं का उत्साह
बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में अपनी अलौकिकता के लिए विख्यात है। इसे देखने के लिए आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ著名 हस्तियाँ भी उज्जैन आती हैं। विशाल भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई, ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके। ज्येष्ठ पूर्णिमा जैसे विशेष अवसरों पर यहाँ का दृश्य अत्यंत भव्य और दिव्य होता है, जो हर भक्त के मन में गहरी छाप छोड़ता है।