13 अगस्त 2026
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भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: स्कॉट मॉरिसन ने मोदी और जयशंकर की सराहना की

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भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: स्कॉट मॉरिसन ने मोदी और जयशंकर की सराहना की

सारांश

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि मोदी ने भारत की विदेश नीति को राष्ट्रीय हित की धुरी पर केंद्रित किया है और जयशंकर इसे ज़मीन पर उतार रहे हैं। साथ ही उन्होंने भारत को अगले 20-30 वर्षों में अंतरिक्ष महाशक्ति बनते देखने की उम्मीद जताई।

मुख्य बातें

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने 13 अगस्त 2026 को कहा कि PM मोदी ने भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और व्यावहारिकता को केंद्र में रखा है।
जयशंकर को मोदी के विज़न को आगे बढ़ाने वाला 'सक्षम सहयोगी' बताया।
उन्होंने क्वाड की सफलता के लिए भारत की भागीदारी को अनिवार्य बताया और हिंद-प्रशांत एजेंडे में 'हिंद' को अधिक प्राथमिकता देने की वकालत की।
मॉरिसन के अनुसार अगले 20-30 वर्षों में भारत एक अंतरिक्ष महाशक्ति बनकर उभरेगा।
यह साक्षात्कार 'इंडो-मेडिटेरेनियन डायलॉग्स' के दौरान विश्लेषक वास शेनॉय के साथ हुआ, जब भारत अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारी में था।

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने 13 अगस्त 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और व्यावहारिकता को केंद्र में रखा है — और यह बदलाव वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को इस नीतिगत दिशा को ज़मीन पर उतारने वाला 'सक्षम सहयोगी' बताया।

साक्षात्कार की पृष्ठभूमि

यह टिप्पणियाँ इटालियन-भारतीय उद्यमी और विश्लेषक वास शेनॉय के साथ 'इंडो-मेडिटेरेनियन डायलॉग्स' के दौरान हुई बातचीत में सामने आईं। यह साक्षात्कार ऐसे समय हुआ जब नई दिल्ली अपना 80वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी में थी — एक ऐसा अवसर जो भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति पर चर्चा के लिए स्वाभाविक पृष्ठभूमि बना।

मोदी की विदेश नीति पर मॉरिसन का आकलन

मॉरिसन ने कहा, 'भारत अपनी स्वतंत्रता और स्वतंत्र माहौल का सम्मान करता है। वह अपने हितों के कारण ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया और कई अन्य देशों के साथ करीबी जुड़ाव बना रहा है। ऐसा दूसरे संबंधों को नज़रअंदाज़ करके नहीं किया जाता।' उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट हैं — वे जिस भी देश जाना ज़रूरी समझें, भारत के राष्ट्रीय हित को आगे बढ़ाने के लिए जाते हैं।

मॉरिसन के अनुसार, 'प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और व्यावहारिकता पर बहुत मज़बूत जोर दिया है। इस प्रक्रिया में डॉ. जयशंकर एक सक्षम सहयोगी रहे हैं और उन्होंने इस नेतृत्व को बेहद मेहनत से आगे बढ़ाया है।'

भारत की अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की संभावना

मॉरिसन ने अर्थव्यवस्था, तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की संभावनाओं को 'असीमित' बताया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि अगले 20-30 सालों में जब भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था परिपक्व होगी, तो भारत एक अंतरिक्ष महाशक्ति बनकर उभरेगा।' यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेज़ी से निजी निवेश और सरकारी महत्वाकांक्षा दोनों से आगे बढ़ रहा है।

क्वाड में भारत की भूमिका

मॉरिसन ने ज़ोर देकर कहा कि क्वाड की प्रासंगिकता और सफलता के लिए भारत की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'क्वाड में भारत का जुड़ाव ही इसे इतना खास बनाता है।' साथ ही उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा पर बढ़ते जोर का उल्लेख करते हुए कहा कि क्वाड के एजेंडे में 'हिंद' को अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो और उनके उपसचिव की भूमिका की सराहना करते हुए मॉरिसन ने कहा कि वे क्वाड की अहमियत को लेकर पूरी तरह सजग हैं और उनका रुख समुद्री सुरक्षा पर बेहद मज़बूत है — 'सिर्फ प्रशांत तक नहीं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत के लिए।'

प्रधानमंत्री मोदी से व्यक्तिगत मुलाकात

मॉरिसन ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि मोदी उन मुद्दों को लेकर 'बहुत सजग' रहते हैं। गौरतलब है कि यह टिप्पणी भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के लगातार गहरे होते दौर में आई है, जिसमें व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी साझेदारी तीनों मोर्चों पर सहयोग बढ़ा है। आने वाले वर्षों में भारत की कूटनीतिक सक्रियता और क्वाड की दिशा दोनों पर दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब यही नीति पश्चिमी नेताओं की प्रशंसा पा रही है। हालाँकि यह भी ध्यान रखना होगा कि क्वाड के भीतर 'हिंद' को अधिक स्थान देने की मॉरिसन की माँग परोक्ष रूप से उस तनाव को उजागर करती है जो इस समूह में हिंद महासागर बनाम प्रशांत प्राथमिकताओं को लेकर बना हुआ है। भारत के लिए असली परीक्षा यह है कि वह क्वाड की बढ़ती सुरक्षा-केंद्रितता और अपनी बहु-संरेखण नीति के बीच संतुलन कैसे बनाए रखता है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्कॉट मॉरिसन ने PM मोदी की विदेश नीति के बारे में क्या कहा?
मॉरिसन ने कहा कि PM मोदी ने भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और व्यावहारिकता पर मज़बूत जोर दिया है। उनके अनुसार मोदी स्पष्ट हैं कि वे भारत के हित के लिए जिस भी देश से जुड़ना ज़रूरी हो, जुड़ेंगे — बिना किसी अन्य संबंध को नज़रअंदाज़ किए।
मॉरिसन ने डॉ. जयशंकर की क्या भूमिका बताई?
मॉरिसन ने डॉ. एस. जयशंकर को PM मोदी के विज़न को आगे बढ़ाने वाला 'सक्षम सहयोगी' बताया। उनके अनुसार जयशंकर ने इस नेतृत्व को बेहद मेहनत से ज़मीन पर उतारा है।
क्वाड में भारत की भूमिका पर मॉरिसन का क्या मत है?
मॉरिसन ने कहा कि क्वाड की प्रासंगिकता के लिए भारत की सक्रिय भागीदारी केंद्रीय है। उन्होंने क्वाड के एजेंडे में हिंद महासागर को अधिक प्राथमिकता देने की वकालत की और कहा कि वे इसके बड़े समर्थक हैं।
मॉरिसन ने भारत की अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की संभावना पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि अगले 20-30 वर्षों में जब भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था परिपक्व होगी, तो भारत एक अंतरिक्ष महाशक्ति बनकर उभरेगा। यह टिप्पणी उन्होंने अर्थव्यवस्था, तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की व्यापक संभावनाओं के संदर्भ में की।
यह साक्षात्कार किस संदर्भ में और कहाँ हुआ?
यह बातचीत 'इंडो-मेडिटेरेनियन डायलॉग्स' के दौरान इटालियन-भारतीय विश्लेषक वास शेनॉय के साथ हुई। यह उस समय हुई जब भारत अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारी कर रहा था।
राष्ट्र प्रेस
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