भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: स्कॉट मॉरिसन ने मोदी और जयशंकर की सराहना की
सारांश
मुख्य बातें
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने 13 अगस्त 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और व्यावहारिकता को केंद्र में रखा है — और यह बदलाव वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को इस नीतिगत दिशा को ज़मीन पर उतारने वाला 'सक्षम सहयोगी' बताया।
साक्षात्कार की पृष्ठभूमि
यह टिप्पणियाँ इटालियन-भारतीय उद्यमी और विश्लेषक वास शेनॉय के साथ 'इंडो-मेडिटेरेनियन डायलॉग्स' के दौरान हुई बातचीत में सामने आईं। यह साक्षात्कार ऐसे समय हुआ जब नई दिल्ली अपना 80वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी में थी — एक ऐसा अवसर जो भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति पर चर्चा के लिए स्वाभाविक पृष्ठभूमि बना।
मोदी की विदेश नीति पर मॉरिसन का आकलन
मॉरिसन ने कहा, 'भारत अपनी स्वतंत्रता और स्वतंत्र माहौल का सम्मान करता है। वह अपने हितों के कारण ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया और कई अन्य देशों के साथ करीबी जुड़ाव बना रहा है। ऐसा दूसरे संबंधों को नज़रअंदाज़ करके नहीं किया जाता।' उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट हैं — वे जिस भी देश जाना ज़रूरी समझें, भारत के राष्ट्रीय हित को आगे बढ़ाने के लिए जाते हैं।
मॉरिसन के अनुसार, 'प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और व्यावहारिकता पर बहुत मज़बूत जोर दिया है। इस प्रक्रिया में डॉ. जयशंकर एक सक्षम सहयोगी रहे हैं और उन्होंने इस नेतृत्व को बेहद मेहनत से आगे बढ़ाया है।'
भारत की अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की संभावना
मॉरिसन ने अर्थव्यवस्था, तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की संभावनाओं को 'असीमित' बताया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि अगले 20-30 सालों में जब भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था परिपक्व होगी, तो भारत एक अंतरिक्ष महाशक्ति बनकर उभरेगा।' यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेज़ी से निजी निवेश और सरकारी महत्वाकांक्षा दोनों से आगे बढ़ रहा है।
क्वाड में भारत की भूमिका
मॉरिसन ने ज़ोर देकर कहा कि क्वाड की प्रासंगिकता और सफलता के लिए भारत की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'क्वाड में भारत का जुड़ाव ही इसे इतना खास बनाता है।' साथ ही उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा पर बढ़ते जोर का उल्लेख करते हुए कहा कि क्वाड के एजेंडे में 'हिंद' को अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो और उनके उपसचिव की भूमिका की सराहना करते हुए मॉरिसन ने कहा कि वे क्वाड की अहमियत को लेकर पूरी तरह सजग हैं और उनका रुख समुद्री सुरक्षा पर बेहद मज़बूत है — 'सिर्फ प्रशांत तक नहीं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत के लिए।'
प्रधानमंत्री मोदी से व्यक्तिगत मुलाकात
मॉरिसन ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि मोदी उन मुद्दों को लेकर 'बहुत सजग' रहते हैं। गौरतलब है कि यह टिप्पणी भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के लगातार गहरे होते दौर में आई है, जिसमें व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी साझेदारी तीनों मोर्चों पर सहयोग बढ़ा है। आने वाले वर्षों में भारत की कूटनीतिक सक्रियता और क्वाड की दिशा दोनों पर दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी।