गुरु पूर्णिमा पर महाकाल का भव्य शृंगार: भांग, सूर्य-चंद्रमा और बेलपत्र से सजे बाबा, उज्जैन में उमड़े श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती संपन्न हुई। आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि पर हुए इस दिव्य आयोजन के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कपाट खुलने का क्षण
बुधवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। जैसे ही दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
पंचामृत अभिषेक और विशेष शृंगार
कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। गुरु पूर्णिमा की परंपरा के अनुसार बाबा महाकाल का भांग से शृंगार किया गया और उन्हें सूर्य, चंद्रमा तथा बेलपत्र से सजाया गया — यह अलौकिक दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय रहा।
भस्म आरती की परंपरा
मंदिर के पुजारियों ने विधिवत महाआरती संपन्न कराई। गौरतलब है कि पहले महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों हेतु पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं हेतु साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं की भीड़ और व्यवस्था
बाबा महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध होकर प्रतीक्षा कर रहे थे। भस्म आरती और दिव्य शृंगार के दर्शन का यह अवसर जनसामान्य के साथ-साथ विशिष्ट हस्तियों को भी मंदिर की ओर खींचता है। भीड़ के सुचारु प्रबंधन के लिए मंदिर परिसर के आसपास बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
महाकालेश्वर की महत्ता
यह ऐसे समय में आया है जब गुरु पूर्णिमा पर्व पूरे देश में गुरु-शिष्य परंपरा के उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। श्री महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उज्जैन को हिंदू धर्म की सप्तपुरियों में गिना जाता है। आने वाले दिनों में सावन माह की शुरुआत के साथ यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है।